कीमत गिरने से परेशान मक्का किसानों के लिए खुशखबरी, कर्नाटक में लागू हुई MIS, जानें फायदे

यह योजना अधिकतम चार लाख मीट्रिक टन मक्का के लेनदेन तक लागू रहेगी और इसे यूनिफाइड मार्केट प्लेटफॉर्म के जरिए अधिसूचित एपीएमसी और उप-मंडियों में लागू किया जाएगा. हर किसान को अधिकतम 50 क्विंटल तक लाभ मिलेगा, जबकि प्रति एकड़ 12 क्विंटल की सीमा तय की गई है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 5 Jan, 2026 | 07:56 AM

Market Intervention Scheme MIS: कर्नाटक के मक्का किसानों के लिए नई साल की शुरुआत राहत भरी खबर लेकर आई है. खरीफ सीजन में रिकॉर्ड उत्पादन के बाद बाजार में कीमतों में आई तेज गिरावट से किसान लंबे समय से परेशान थे. इसी संकट को देखते हुए कर्नाटक सरकार ने 2025–26 खरीफ सीजन के लिए मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) को मंजूरी दे दी है. इस योजना का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को अपनी फसल औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर न होना पड़े और न्यूनतम स्तर तक उनकी आय सुरक्षित रहे.

गिरती कीमतों से बढ़ी किसानों की चिंता

राज्य में इस बार मक्का की बंपर पैदावार हुई है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2025–26 में मक्का की खेती करीब 17.64 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में की गई और उत्पादन 53.80 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचने का अनुमान है. अगस्त से दिसंबर 2025 के बीच ही लगभग 20.50 लाख मीट्रिक टन मक्का मंडियों में पहुंच चुका था. इतनी बड़ी आवक के चलते बाजार में कीमतें 1,600 से 2,000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच सिमट गईं, जिससे किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल होने लगा.

2,150 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया हस्तक्षेप मूल्य

किसानों को इस दबाव से निकालने के लिए कर्नाटक सरकार ने मार्केट इंटरवेंशन स्कीम के तहत मक्का के लिए 2,150 रुपये प्रति क्विंटल का मार्केट इंटरवेंशन प्राइस तय किया है. अगर किसान अपनी उपज इससे कम कीमत पर बेचते हैं, तो सरकार उन्हें अंतर की भरपाई करेगी. उदाहरण के तौर पर, यदि बाजार भाव 1,900 रुपये है, तो किसान को प्रति क्विंटल 250 रुपये तक का मुआवजा मिलेगा. जैसे-जैसे कीमतें बढ़ेंगी, मुआवजे की राशि अपने आप कम होती जाएगी और 2,150 रुपये या उससे ऊपर पहुंचते ही भुगतान बंद हो जाएगा.

सीमित मात्रा और तय शर्तों के साथ लागू होगी योजना

यह योजना अधिकतम चार लाख मीट्रिक टन मक्का के लेनदेन तक लागू रहेगी और इसे यूनिफाइड मार्केट प्लेटफॉर्म के जरिए अधिसूचित एपीएमसी और उप-मंडियों में लागू किया जाएगा. हर किसान को अधिकतम 50 क्विंटल तक लाभ मिलेगा, जबकि प्रति एकड़ 12 क्विंटल की सीमा तय की गई है. जमीन से जुड़ी जानकारी की जांच FRUITS सॉफ्टवेयर के जरिए की जाएगी, ताकि केवल वास्तविक किसानों को ही लाभ मिल सके.

डीबीटी से सीधे खाते में पहुंचेगा पैसा

योजना के तहत भुगतान पूरी तरह पारदर्शी तरीके से डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से किसानों के बैंक खातों में भेजा जाएगा. किसान पंजीकरण बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के जरिए किया जाएगा और आधार, भूमि रिकॉर्ड तथा फसल सर्वे का सत्यापन अनिवार्य होगा. गुणवत्ता की जांच के लिए जिला स्तर पर तकनीकी अधिकारी तैनात किए जाएंगे, ताकि खराब या मानक से बाहर की उपज को योजना का लाभ न मिले.

एक महीने तक लागू रहेगी योजना

यह मार्केट इंटरवेंशन स्कीम पहले लेनदेन की तारीख से एक महीने तक प्रभावी रहेगी. जिलों के उपायुक्त इसकी निगरानी करेंगे और रोजाना रिपोर्टिंग के जरिए किसी भी तरह की गड़बड़ी पर नजर रखी जाएगी. योजना खत्म होने के बाद दो महीने के भीतर ऑडिट भी किया जाएगा.

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