Buffalo Farming: कम खर्च में ज्यादा फायदा, ये भैंस एक ब्यांत में देती है 1700 लीटर से ज्यादा दूध

पंढरपुरी भैंस डेयरी फार्मिंग के लिए फायदेमंद नस्ल मानी जाती है. यह एक ब्यांत में करीब 1790 लीटर तक दूध देती है और दूध में लगभग 8 प्रतिशत वसा पाई जाती है. कम संसाधनों में पालन योग्य यह नस्ल किसानों को बेहतर आमदनी का मौका देती है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 22 Feb, 2026 | 08:22 PM

Pandharpuri Buffalo: अगर आप डेयरी फार्मिंग में अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं, तो सही नस्ल का चुनाव बहुत जरूरी है. देश में भैंसों की कई नस्लें पाई जाती हैं, लेकिन महाराष्ट्र की पंढरपुरी भैंस अपनी खास पहचान रखती है. लंबी घुमावदार सींग, ज्यादा वसा वाला दूध और स्थानीय मौसम में आसानी से ढल जाने की क्षमता इसे किसानों के लिए खास बनाती है. यही वजह है कि डेयरी कारोबार में इस नस्ल की मांग लगातार बढ़ रही है.

कहां पाई जाती है और क्यों है खास

पंढरपुरी भैंस का नाम महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के पंढरपुर इलाके से पड़ा है. यह नस्ल मुख्य रूप से महाराष्ट्र के पश्चिमी हिस्सों में पाई जाती है. गर्म और सूखे मौसम  में भी यह आसानी से रह सकती है, इसलिए कम संसाधनों में भी इसका पालन संभव है. इस भैंस की सबसे बड़ी पहचान इसकी लंबी और पीछे की ओर मुड़ी हुई सींगें हैं. इन्हीं सींगों की वजह से इसे दूर से ही पहचाना जा सकता है. ग्रामीण इलाकों में इसे भरोसेमंद और मजबूत नस्ल माना जाता है.

शारीरिक बनावट और पहचान

पंढरपुरी भैंस आमतौर पर काले रंग की होती है. कुछ में हल्के या गहरे काले रंग के साथ माथे या पैरों पर सफेद निशान भी दिखते हैं. इसकी नाक सीधी और उभरी हुई होती है. मादा भैंस का औसत कद करीब 130 सेंटीमीटर और शरीर की लंबाई लगभग 133 सेंटीमीटर होती है. इसका वजन औसतन 400 किलो से ज्यादा होता है. जन्म के समय बछड़े का वजन लगभग 25 किलो के आसपास होता है. इस नस्ल की खास बात इसकी सींगें हैं, जो तीन तरह की पाई जाती हैं-कुछ पीछे और ऊपर की ओर मुड़ी हुई, कुछ बाहर की ओर घूमी हुई और कुछ नीचे की ओर सीधी जाती हुई. यही इसकी असली पहचान है.

दूध उत्पादन और कमाई का जरिया

डेयरी फार्मिंग के लिए यह नस्ल इसलिए पसंद की जाती है क्योंकि इसका दूध उत्पादन अच्छा होता है. एक ब्यांत में यह भैंस औसतन 1700 लीटर तक दूध दे सकती है. इसके दूध में वसा की मात्रा  लगभग 8 प्रतिशत होती है, जो बाजार में ज्यादा कीमत दिलाने में मदद करती है. पहली बार यह भैंस लगभग 3.5 साल की उम्र में बछड़ा देती है. इसके बाद लगभग हर 13 से 14 महीने में इसका प्रजनन चक्र चलता है. एक और खास बात यह है कि कई किसान इन भैंसों को ग्राहकों के घर ले जाकर वहीं दूध निकालते हैं. इससे लोगों को ताजा दूध मिलता है और ग्राहक का भरोसा भी बना रहता है. कम खर्च में पालन, ज्यादा वसा वाला दूध और अच्छी उत्पादन  क्षमता-ये तीन बातें पंढरपुरी भैंस को डेयरी फार्मिंग के लिए बेहतरीन विकल्प बनाती हैं. अगर सही देखभाल और संतुलित आहार  दिया जाए, तो यह नस्ल किसानों को लंबे समय तक अच्छा मुनाफा दे सकती है.

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Published: 22 Feb, 2026 | 08:22 PM

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