सरकार के इस फैसले से प्याज निर्यात होगा प्रभावित, कीमतों में आ सकती है गिरावट.. किसानों को नुकसान

जानकारों का कहना है कि सरकार के इस फैसले से भारतीय प्याज अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोर हो सकता है. निर्यात प्रोत्साहन कम होने से विदेशी मांग घट सकती है, जिससे घरेलू बाजार में भी प्याज के दाम गिरने की संभावना है और किसानों की आय  पर असर पड़ेगा.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 24 Feb, 2026 | 08:32 PM

Onion Export: केंद्र सरकार ने प्याज को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है. उसने निर्यातकों को मिलने वाले RoDTEP (रेमिशन ऑफ ड्यूटीज एंड टैक्सेज ऑन एक्सपोर्टेड प्रोडक्ट्स) लाभ को तुरंत प्रभाव से 50 प्रतिशत घटा दिया है. डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) की अधिसूचना के अनुसार अब लाभ दरें और वैल्यू कैप पहले तय दरों का आधा ही रहेंगे. DGFT की अधिसूचना में कहा गया है कि पहले 1.9 प्रतिशत मिलने वाली प्याज निर्यात सब्सिडी अब घटाकर 0.95 प्रतिशत कर दी गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से प्याज उगाने वाले किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता है.

जानकारों का कहना है कि सरकार के इस फैसले से भारतीय प्याज अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोर हो सकता है. निर्यात प्रोत्साहन कम होने से विदेशी मांग घट सकती है, जिससे घरेलू बाजार में भी प्याज के दाम गिरने की संभावना है और किसानों की आय  पर असर पड़ेगा. वहीं, नासिक के सांसद सांसद राजाभाऊ (पराग) प्रकाश वाजे ने जुलाई 2025 में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर RoDTEP को 5 प्रतिशत तक बढ़ाने और ट्रांसपोर्ट व मार्केटिंग सहायता (TMA) के तहत 7 प्रतिशत सब्सिडी देने की मांग की थी. लेकिन सरकार ने सब्सिडी बढ़ाने की बजाय इसे आधा कर दिया.

सरकार के इस फैसले से निर्यात पर असर पड़ेगा

जय किसान फार्मर्स फोरम, महाराष्ट्र के विभागीय अध्यक्ष निवृत्ती न्याहारकर का कहना है कि सरकार के इस फैसले से निर्यात पर असर  पड़ेगा. उन्होंने कहा कि सरकार के प्याज निर्यात सब्सिडी घटाने के फैसले से निर्यात में गिरावट आएगी और कीमतें और गिर सकती हैं. उन्होंने कहा कि नासिक में प्याज के दाम 1,000 रुपये प्रति क्विंटल तक हैं, जबकि उत्पादन लागत करीब 30 रुपये प्रति किलो है और किसानों को सिर्फ 10 रुपये प्रति किलो से ज्यादा कीमत नहीं मिल रही. ऐसे में किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है.

महाराष्ट्र के इन जिलों में होती है प्याज की खेती

वहीं, एक्सपर्ट का कहना है कि सरकार के इस फैसले से महाराष्ट्र के किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा. क्योंकि देश में सबसे अधिक प्याज का उत्पादन  महाराष्ट्र में ही होता है. यहां से पूरे विश्व में प्याज का निर्यात होता है. ऐसे महाराष्ट्र भारत के कुल प्याज उत्पादन में लगभग 35-43 फीसदी का योगदान देता है. मुख्य रूप से नासिक, अहमदनगर और पुणे से खाड़ी देशों (यूएई), बांग्लादेश, मलेशिया, श्रीलंका और नेपाल को प्याज का निर्यात होता है. 2024-25 में, भारत ने 2,000 टन सफेद प्याज और लगभग 2.5 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक कुल प्याज का निर्यात किया.

प्याज की कीमतों में भारी गिरावट

महाराष्ट्र में 2024-25 सीजन में प्याज का उत्पादन काफी बढ़ा और रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया. उसी दौरान प्याज की खेती का क्षेत्रफल 6.67 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 9.78 लाख हेक्टेयर हो गया. नासिक का लासलगांव एशिया का सबसे बड़ा प्याज बाजार है और यह राज्य के कुल निर्यात में अहम योगदान देता है. इसी बीच खबर है कि महाराष्ट्र के नासिक में प्याज की कीमतें तेजी से गिर रही हैं और अब यह 500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई हैं, जिससे किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा है. नाराज किसानों ने चांदवड़ स्थित कृषि उत्पन्न बाजार समिति (APMC) के कार्यालय पर प्रदर्शन किया और कुछ ने भूख हड़ताल भी शुरू कर दी.

किसानों को 1,500 रुपये क्विंटल आर्थिक मदद करने की मांग

किसानों की मांग है कि प्याज का न्यूनतम समर्थन मूल्य  (MSP) 3,000 रुपये प्रति क्विंटल तय किया जाए और पिछले छह महीनों में लागत से कम दाम पर प्याज बेचने वाले किसानों को 1,500 रुपये प्रति क्विंटल की मदद दी जाए. साथ ही, वे प्याज निर्यात को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन देने की भी मांग कर रहे हैं. APMC अधिकारियों के मुताबिक, करीब तीन हफ्ते पहले प्याज का औसत थोक भाव 1,500 रुपये प्रति क्विंटल था, जो अब घटकर 1,000 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है.

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Published: 24 Feb, 2026 | 08:30 PM

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