किलो नहीं गिनती से बिकता है यह आम, 1500 रुपये दर्जन है रेट.. पूरी दुनिया में भारी डिमांड
हापुस आम बेहद स्वादिष्ट, खुशबूदार और रसीला होता है. इसमें फाइबर कम होता है, इसलिए इसका गूदा बहुत मुलायम लगता है. पकने पर इसका रंग सुनहरा पीला हो जाता है और ऊपर की तरफ हल्का लालपन भी दिख सकता है. यह आम आमतौर पर किलो के बजाय दर्जन के हिसाब से बेचा जाता है, इसलिए यह भारत के सबसे महंगे आमों में गिना जाता है.
Mango cultivation: आम के सीजन की शुरुआत हो गई है. बाग में पेड़ मंजर से लद गए हैं. मई से मार्केट में स्वादिष्ट आमों की सप्लाई शुरू हो जाएगी. हर साल की तरह इस बार भी उत्तर भारत के राज्यों में लंगड़ा, दशहरी और चौसा की बंपर पैदावार की उम्मीद है. लेकिन महाराष्ट्र में इस बार हापुस आम के ज्यादा प्रोडक्शन हो सकता है. इससे किसानों की बंपर उत्पादन कमाई हो सकती है. क्योंकि हापुस आम केवल महाराष्ट्र में ही मशहूर नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया में अपने स्वाद के लिए जाना जाता है. इसकी कीमत भी सामान्य आमों के तुलना में ज्यादा होती है. साथ ही इसे साल 2018 में जीआई टैग भी मिला हुआ है. मार्केट में यह 1200 रुपये 1500 रुपये दर्जन बिकता है. तो आइए जानते हैं हापुस आम की खासियत के बारे में.
हापुस आम को ‘आमों का राजा’ कहा जाता है. यह अपनी खास खुशबू, मलाईदार गूदा और केसरिया रंग के लिए मशहूर है. इसकी खेती मुख्य रूप से महाराष्ट्र के रत्नागिरी और देवगढ़ इलाकों में होती है और यह अप्रैल-मई में बाजार में आता है. स्वाद में यह बेहद मीठा होता है. एक आम का वजन आमतौर पर लगभग 200 से 300 ग्राम के बीच होता है. यह प्रीमियम श्रेणी का और काफी महंगा आम माना जाता है.
हापुस आम का गूदा बहुत मुलायम लगता है
हापुस आम बेहद स्वादिष्ट, खुशबूदार और रसीला होता है. इसमें फाइबर कम होता है, इसलिए इसका गूदा बहुत मुलायम लगता है. पकने पर इसका रंग सुनहरा पीला हो जाता है और ऊपर की तरफ हल्का लालपन भी दिख सकता है. यह आम आमतौर पर किलो के बजाय दर्जन के हिसाब से बेचा जाता है, इसलिए यह भारत के सबसे महंगे आमों में गिना जाता है. इसका सीजन अप्रैल से मई के मध्य तक रहता है. बेहतरीन स्वाद के कारण इसे जापान, कोरिया और यूरोप जैसे देशों में निर्यात भी किया जाता है. स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह फायदेमंद है. इसमें विटामिन A और C अच्छी मात्रा में होते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और आंखों की सेहत के लिए लाभकारी माने जाते हैं.
हापुस आम के पौधे लगाने का सबसे अच्छा समय मॉनसून होता है
हापुस आम के पौधे लगाने का सबसे अच्छा समय मॉनसून के दौरान होता है. यानी जून के अंतिम सप्ताह से अगस्त तक. इस समय नमी के कारण पौधों की जड़ें जल्दी पकड़ती हैं और उनकी जीवित रहने की संभावना ज्यादा होती है. यदि क्षेत्र सूखा या गर्म है, तो फरवरी-मार्च में भी रोपाई की जा सकती है, बशर्ते पर्याप्त सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो.
हापुस की खेती करने से पहले इन बातों का रखें खयाल
हापुस आम के पेड़ों को अच्छी पैदावार के लिए पर्याप्त धूप और जल निकासी वाली मिट्टी चाहिए. विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा स्थान चुनें जहां रोजाना कम से कम छह घंटे धूप मिले और मिट्टी में पानी जमा न हो. हापुस के पेड़ बीज से उगाए जा सकते हैं या ग्राफ्टेड पौधे खरीदे जा सकते हैं. पौधा लगाते समय जड़ों को ढकने के लिए गहरा गड्ढा खोदें और मिट्टी को अच्छे से दबाएं. पौधों को नियमित पानी देना जरूरी है, खासकर फूल और फल आने के समय. बेहतर विकास और अधिक फल के लिए 10-10-10 या 12-12-12 अनुपात वाली संतुलित खाद का प्रयोग करें. इससे पौधे स्वस्थ रहेंगे और स्वादिष्ट हापुस आम देंगे.
यह मक्खी और एन्थ्रेक्नोज जैसी बीमारियों के प्रति होता है संवेदनशील
हापुस आम के पेड़ों को नियमित रूप से छांटते रहना जरूरी है. इससे पेड़ का आकार नियंत्रित रहता है और स्वस्थ विकास होता है. आप चाहें तो पेड़ को खुला केंद्र या केंद्रीय तना जैसी विशिष्ट शैली में आकार दे सकते हैं. साथ ही, आम के पेड़ फल मक्खी, एन्थ्रेक्नोज जैसी बीमारियों और कीटों के प्रति संवेदनशील होते हैं. इससे बचने के लिए विशेष कीटनाशक और फफूंदनाशक का इस्तेमाल करें और क्षतिग्रस्त या रोगग्रस्त शाखाओं को तुरंत हटा दें. आम के पेड़ों को नियमित रूप से छांटते रहना जरूरी है. इससे पेड़ का आकार नियंत्रित रहता है और स्वस्थ विकास होता है. आप चाहें तो पेड़ को खुला केंद्र या केंद्रीय तना जैसी विशिष्ट शैली में आकार दे सकते हैं.
कोंकण क्षेत्र में होती है इसकी सबसे अधिक खेती
महाराष्ट्र में हापुस आम का सालाना उत्पादन 5-6 लाख मीट्रिक टन से अधिक होता है. सिर्फ देवगढ़ तहसील में ही लगभग 50,000 टन आम होता है. कोंकण क्षेत्र में लगभग लाख हेक्टेयर से ज्यादा भूमि पर हापुस आम की खेती की जाती है. यह आम मार्च से जून तक बाजार में उपलब्ध रहता है. महाराष्ट्र में आम की औसत उत्पादकता लगभग 15 से 22 टन प्रति हेक्टेयर है. ऐसे मार्केट में हापुस आम 1200 रुपये से 1500 रुपये दर्जन बिकता है.
खबर से जुड़े जरूरी आंकड़ें
- हापुस आम को साल 2018 में मिला जीआई टैग
- मार्केट में 1200 से 1500 रुपये किलो है रेट
- यूरोप में है भारी डिमांड
- सलाना 5-6 लाख मीट्रिक है उत्पादन
- इसका गूदा बहुत मुलायम लगता है
- पकने पर इसका रंग सुनहरा पीला हो जाता है