पूरी दुनिया में मशहूर है यह शहद, मन की बात में PM मोदी कर चुके हैं जिक्र.. जानें खासियत
रामबन सुलाई शहद जम्मू-कश्मीर का GI टैग प्राप्त प्राकृतिक शहद है, जो जंगली तुलसी के फूलों से बनता है. यह अगस्त-अक्टूबर में उत्पादित होता है. इसमें विटामिन, एंजाइम और मिनरल्स पाए जाते हैं. यह ODOP योजना में शामिल है और लगभग 550 किसान इसका उत्पादन करते हैं.
Honey Production: जम्मू-कश्मीर की जब भी बात होती है, तो लोगों के जेहन में सबसे पहले सेब की तस्वीर उभरकर सामने आती है. लोगों को लगता है कि जम्मू-कश्मीर में किसान सबसे अधिक सेब की ही खेती करते हैं, लेकिन ऐसी बात नहीं है. यहां पर किसान शहद उत्पादन भी बड़े स्तर पर करते हैं. यही वजह है कि रामबन जिले में उत्पादित रामबन सुलाई शहद को जीआई टैग मिला हुआ है. यह अपनी बेहतरीन गुणवत्ता, खास स्वाद और पौष्टिक गुणों के लिए जाना जाता है. यह शहद हिमालयी क्षेत्र में उगने वाले सुलाई पौधों के फूलों के रस से तैयार होता है और अपने औषधीय गुणों तथा शुद्धता के कारण काफी लोकप्रिय है.
अगस्त से अक्टूबर के बीच मधुमक्खियां सुलाई के सफेद फूलों से रस एकत्र करती हैं, जिससे प्राकृतिक मिठास और हल्की पुष्प सुगंध वाला यह शहद तैयार होता है. सफेद से एम्बर रंग तक दिखाई देने वाले इस शहद में कई जरूरी खनिज, एंजाइम और विटामिन पाए जाते हैं, जो इसे स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बनाते हैं. खास बात यह है कि विशेष मधुमक्खी प्रजातियों और अनुकूल जलवायु के कारण रामबन में शहद का उत्पादन अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक होता है. इसकी विशिष्ट पहचान को देखते हुए वर्ष 2021 में इसे जीआई टैग प्रदान किया गया था. इसके अलावा, भारत सरकार ने रामबन सुलाई शहद को जिले के ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट (ODOP) के रूप में भी मान्यता दी है.
मन की बात में जिक्र कर चुके हैं पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने कार्यक्रम मन की बात में इस शहद का जिक्र कर चुके है, जिसके बाद देशभर में इसकी मांग और पहचान बढ़ने की उम्मीद है. माना जा रहा है कि इससे हिमालयी क्षेत्र के करीब 550 मधुमक्खी पालकों की आय में भी बढ़ोतरी हो सकती है. सुलाई शहद, जिसे एकेशिया हनी भी कहा जाता है, रामबन जिले में पाए जाने वाले सुलाई (प्लेक्ट्रैंथस रुगोसस) पौधे के फूलों के रस से तैयार होता है.
महारानी एलिजाबेथ को मिला था गिफ्ट
रामबन सुलाई शहद प्राकृतिक रूप से एंटीऑक्सीडेंट और जरूरी पोषक तत्वों जैसे विटामिन, एंजाइम और मिनरल्स से भरपूर होता है. ये सभी तत्व शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को मजबूत करने में मदद करते हैं. इसकी गुणवत्ता और खासियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे अपने विदेश दौरों के दौरान दुनिया के कई प्रमुख नेताओं और महारानी एलिजाबेथ को उपहार के रूप में भी दिया है.
143 टन सुलाई शहद का उत्पादन
अगर उत्पादन की बात करें तो मधुमक्खियां अगस्त से अक्टूबर के बीच सुलाई के पौधों (जंगली तुलसी) के सफेद फूलों से रस इकट्ठा करती हैं, जिससे यह खास शहद तैयार होता है. रामबन क्षेत्र के करीब 550 से ज्यादा किसान इस उत्पादन से जुड़े हुए हैं और हर साल लगभग 143 टन सुलाई शहद का उत्पादन किया जाता है. इस शहद को ‘एक जिला एक उत्पाद’ (ODOP) के तहत मान्यता मिली हुई है.
शहद निर्यात के लिए क्या करें
रामबन सुलाई शहद को अंतरराष्ट्रीय बाजार में भेजने के लिए कुछ जरूरी प्रक्रियाओं का पालन करना होता है. निर्यातकों को सबसे पहले एपीडा (APEDA) से रजिस्ट्रेशन कम मेंबरशिप सर्टिफिकेट (RCMC) लेना अनिवार्य होता है, जो निर्यात की आधिकारिक अनुमति के रूप में काम करता है. इसके बाद शहद की गुणवत्ता की जांच प्रमाणित प्रयोगशालाओं में कराना जरूरी है, ताकि यह FSSAI और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा उतर सके. निर्यात के लिए पैकेजिंग और लेबलिंग भी बहुत महत्वपूर्ण होती है. पैकेट पर GI टैग की जानकारी, पोषण मूल्य और शुद्धता का स्पष्ट विवरण होना चाहिए. जो लोग शहद का निर्यात या थोक व्यापार करना चाहते हैं, वे एपीडा (APEDA) की आधिकारिक वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करके अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जुड़ सकते हैं और निर्यात से जुड़े दिशानिर्देश प्राप्त कर सकते हैं.
खबर से जुड़े आंकड़े
- रामबन सुलाई शहद को साल 2021 में मिला जीआई टैग
- हर साल लगभग 143 टन सुलाई शहद का होता है उत्पादन
- 550 मधुमक्खी पालक जुड़े हुए हैं व्यापार से
- पीएम मोदी मन की बात कार्यक्रम में कर चुके हैं जिक्र
- महारानी एलिजाबेथ को मिला था उपहार