Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि पर इस समय करें पूजा, खुलेंगे भाग्य के द्वार! जानें पूजा मुहूर्त और विधि

Maha Shivratri 2026: महाशिवरात्रि 2026 भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मिलन का पर्व है, जिसे 15 फरवरी 2026 (रविवार) को पूरे देश में श्रद्धा से मनाया जाएगा. इस दिन व्रत, रात्रि जागरण और चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. मान्यता है कि निशिता काल में सच्चे मन से की गई शिव पूजा जीवन की बाधाएं दूर कर मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है.

नोएडा | Published: 9 Feb, 2026 | 04:22 PM

Maha Shivratri: महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे भगवान शिव की आराधना का महापर्व माना जाता है. यह दिन शिव और शक्ति के दिव्य मिलन का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी तिथि को भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती का विवाह हुआ था और इसी रात शिव तत्व पूर्ण रूप से जागृत होता है. इसलिए महाशिवरात्रि की रात्रि को साधना, व्रत और जागरण के लिए विशेष माना गया है.

महाशिवरात्रि 2026 की तिथि और शुभ योग

साल 2026 में महाशिवरात्रि का पर्व रविवार, 15 फरवरी को मनाया जाएगा. इस दिन देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में रहने वाले शिव भक्त पूरे श्रद्धा भाव से भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करेंगे. पंचांग के अनुसार, चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 5:04 बजे शुरू होकर 16 फरवरी को शाम 5:34 बजे समाप्त होगी.

शिव पूजन के लिए सबसे शुभ समय निशिता काल माना जाता है, जो 16 फरवरी की रात 12:09 बजे से 1:01 बजे तक रहेगा. व्रत रखने वाले श्रद्धालु 16 फरवरी की सुबह 6:59 बजे से दोपहर 3:24 बजे तक व्रत पारण कर सकते हैं.

चार प्रहर की पूजा का समय

महाशिवरात्रि की रात को चार प्रहरों में बांटकर पूजा करने की परंपरा है.

ऐसा माना जाता है कि जो भक्त चारों प्रहर में शिव पूजा करते हैं, उन्हें विशेष पुण्य और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है.

महाशिवरात्रि का धार्मिक महत्व

महाशिवरात्रि को शिवलिंग के प्राकट्य का दिन भी कहा जाता है. मान्यता है कि इसी रात भगवान शिव निराकार से साकार रूप में शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे. यही कारण है कि निशिता काल (मध्यरात्रि के समय) में की गई पूजा को सबसे श्रेष्ठ माना गया है. उत्तर भारत में यह पर्व फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाता है, जबकि दक्षिण भारत में इसे माघ कृष्ण चतुर्दशी कहा जाता है. नाम भले ही अलग हो, लेकिन आस्था और भाव पूरे देश में एक समान है.

महाशिवरात्रि व्रत और पूजा विधि

महाशिवरात्रि से एक दिन पहले, यानी त्रयोदशी को एक समय हल्का और सात्विक भोजन करने की परंपरा है. शिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद शिवलिंग पर जल अर्पित करें और पूरे दिन उपवास रखने का संकल्प लें.

शाम के समय दोबारा स्नान कर रात में शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद, बेलपत्र, फल और धतूरा अर्पित करें. ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें और रात्रि जागरण करें. जो लोग चारों प्रहर में पूजा नहीं कर पाते, वे कम से कम निशिता काल में पूजा अवश्य करें.

महाशिवरात्रि के अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत खोला जाता है. शास्त्रों के अनुसार, चतुर्दशी तिथि समाप्त होने से पहले व्रत पारण करना अधिक शुभ माना जाता है.

शिव भक्ति से जीवन में सकारात्मक बदलाव

कहा जाता है कि सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करने से मानसिक शांति मिलती है, नकारात्मकता दूर होती है और जीवन में स्थिरता आती है. महाशिवरात्रि केवल एक पर्व नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, साधना और आत्मशुद्धि का अवसर है. इसलिए महाशिवरात्रि 2026 को पूरी श्रद्धा, नियम और भक्ति भाव के साथ मनाना अत्यंत फलदायी माना गया है.

Disclaimer: यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पंचांगों और सामान्य जनविश्वासों पर आधारित है. यहां दी गई तिथि, समय और पूजा-विधि विभिन्न पंचांगों व परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है.

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