मई से जुलाई के बीच दस्तक दे सकता है अल नीनो, भारत के मानसून पर पड़ सकता है असर

इन दिनों एक खास मौसम प्रणाली सक्रिय है, जो हवा के रुख को बदल रही है. इससे समुद्र का तापमान और बढ़ सकता है और अल नीनो बनने की संभावना मजबूत हो जाती है. इसके अलावा 30 दिन का साउदर्न ऑसिलेशन इंडेक्स -7.7 तक गिर गया है, जो यह दिखाता है कि प्रशांत महासागर में दबाव का संतुलन बदल रहा है.

नई दिल्ली | Published: 22 Apr, 2026 | 10:19 AM

El Nino 2026 forecast: मौसम के बदलते मिजाज के बीच इस साल एक बार फिर अल नीनो असर दिखा सकता है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक मई से जुलाई के बीच इसके बनने की संभावना है. अगर ऐसा होता है, तो इसका असर सिर्फ गर्मी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बारिश और खासकर भारत के मानसून पर भी पड़ सकता है. यही वजह है कि आने वाले महीनों का मौसम थोड़ा अनिश्चित नजर आ रहा है.

अल नीनो के संकेत क्यों मिल रहे हैं

दुनिया भर के मौसम मॉडल यह बता रहे हैं कि प्रशांत महासागर का पानी लगातार गर्म हो रहा है. अभी स्थिति सामान्य है, यानी न तो पूरी तरह अल नीनो है और न ही ला नीना, लेकिन तापमान धीरे-धीरे बढ़ रहा है.

12 अप्रैल तक नीनो 3.4 इंडेक्स -0.27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य सीमा में है. लेकिन इसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे साफ है कि समुद्र के अंदर और ऊपर दोनों जगह गर्मी बढ़ रही है.

समुद्र के अंदर क्या हो रहा है

बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिकों का कहना है कि समुद्र के भीतर तापमान बढ़ने से आने वाले दिनों में सतह का तापमान भी बढ़ सकता है. इसके साथ ही हवा और समुद्र के बीच तालमेल भी बहुत अहम होता है. अगर यह संतुलन मजबूत बना रहता है, तो अल नीनो पूरी तरह विकसित हो सकता है. हालांकि अभी यह कहना मुश्किल है कि इसका असर कब और कितना होगा.

दुनिया में पहले से ज्यादा गर्मी

दुनिया भर में तापमान पहले ही सामान्य से ज्यादा बना हुआ है. एपीईसी क्लाइमेट सेंटर के अनुसार आने वाले महीनों में भी ज्यादातर जगहों पर तापमान औसत से ज्यादा रहेगा. इसका मतलब है कि गर्मी का असर बना रहेगा और कई जगहों पर लू जैसी स्थिति देखने को मिल सकती है.

हवाओं का बदलता रुख

इन दिनों एक खास मौसम प्रणाली सक्रिय है, जो हवा के रुख को बदल रही है. इससे समुद्र का तापमान और बढ़ सकता है और अल नीनो बनने की संभावना मजबूत हो जाती है. इसके अलावा 30 दिन का साउदर्न ऑसिलेशन इंडेक्स -7.7 तक गिर गया है, जो यह दिखाता है कि प्रशांत महासागर में दबाव का संतुलन बदल रहा है.

हिंद महासागर की स्थिति

हिंद महासागर फिलहाल सामान्य स्थिति में है और इसका इंडेक्स +0.06 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है. हालांकि कुछ संकेत ऐसे भी हैं कि आगे चलकर यह सकारात्मक स्थिति में जा सकता है. अगर ऐसा होता है, तो यह भारत के मानसून को कुछ हद तक संतुलित कर सकता है और अल नीनो के असर को कम कर सकता है.

बारिश का असर हर जगह अलग होगा

मौसम मॉडल यह भी बता रहे हैं कि इस बार बारिश हर जगह एक जैसी नहीं होगी. कहीं सामान्य से ज्यादा बारिश हो सकती है, तो कहीं कम. भारत, उत्तरी ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण-पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में अच्छी बारिश के संकेत हैं, लेकिन यह पूरी तरह तय नहीं है और समय के साथ बदल सकता है.

भारत पर क्या असर पड़ेगा

भारत के लिए यह स्थिति काफी महत्वपूर्ण है. आमतौर पर जब मौसम सामान्य रहता है, तो मानसून भी ठीक रहता है. लेकिन अगर अल नीनो बनता है, तो बारिश का पैटर्न बिगड़ सकता है. कई बार इसके कारण मानसून कमजोर पड़ जाता है और सूखे जैसी स्थिति भी बन सकती है. हालांकि अगर हिंद महासागर का प्रभाव सकारात्मक रहता है, तो कुछ राहत मिल सकती है.

अभी भी बनी हुई है अनिश्चितता

सबसे बड़ी बात यह है कि अभी मौसम को लेकर पूरी तरह स्पष्टता नहीं है. कुछ मॉडल कहते हैं कि अल नीनो जल्दी बनेगा, जबकि कुछ इसे धीरे-धीरे बनने वाला मानते हैं. इसलिए आने वाले समय में मौसम तेजी से बदल सकता है और अभी सटीक अनुमान लगाना आसान नहीं है.

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