पहले से ज्यादा खतरनाक होगा अल नीनो ! धान- मक्का पर मंडराया खतरा.. किसान हो जाएं सतर्क
FAO ने चेतावनी दी है कि अल नीनो के नए चरण से भारत का मॉनसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे धान और मक्का जैसी खरीफ फसलें प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है. संस्था के अनुसार, कम बारिश से कृषि उत्पादन, किसानों की आय और खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ सकता है. दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में सूखे का जोखिम भी बढ़ने की आशंका है.
El Nino Effect: आने वाले महीनों में किसानों को सिंचाई से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. ऐसी समस्याएं केवल भारत के किसानों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि दुनिया के कई अन्य देशों के किसान भी इससे प्रभावित हो सकते हैं. क्योंकि संयुक्त राष्ट्र की संस्था खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने चेतावनी दी है कि अल नीनो (El Nino) का नया चरण शुरू होने से भारत का दक्षिण-पश्चिम मॉनसून कमजोर पड़ सकता है. इसका सबसे ज्यादा असर बारिश पर निर्भर खरीफ फसलों, खासकर धान और मक्का की खेती पर पड़ने की आशंका है. खास बात यह है इस बार का अल नीनो पहले के तुलना में ज्यादा खतरनाक हो सकता है.
FAO के अनुसार, यदि मॉनसून सामान्य से कमजोर रहता है तो किसानों को फसलों की सिंचाई और उत्पादन में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. संस्था ने कहा कि यह स्थिति कृषि पर निर्भर लोगों की आजीविका और खाद्य सुरक्षा के लिए भी चुनौती पैदा कर सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पहले से ही संकट की स्थिति बनी हुई है. FAO ने कहा है कि अल नीनो का असर सिर्फ खेती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक कृषि बाजारों पर भी पड़ सकता है. संस्था के अनुसार, अल नीनो के कारण भारत के कई हिस्सों में मॉनसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे बारिश पर निर्भर धान और मक्का जैसी खरीफ फसलें प्रभावित हो सकती हैं. यह फसलों की वृद्धि का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है, इसलिए बारिश की कमी उत्पादन पर असर डाल सकती है.
इन देशों को भी होगा नुकसान
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, FAO ने यह भी चेतावनी दी है कि कृषि सूखे (एग्रीकल्चरल ड्रॉट) का खतरा दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में बढ़ सकता है. इनमें पाकिस्तान, भारत, म्यांमार, थाईलैंड, कंबोडिया, वियतनाम, फिलीपींस, इंडोनेशिया और तिमोर-लेस्ते जैसे देश शामिल हैं. इन देशों में खेती काफी हद तक मॉनसून और बारिश पर निर्भर है, इसलिए कमजोर वर्षा किसानों और खाद्य उत्पादन दोनों के लिए चुनौती बन सकती है. FAO की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है, जब विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने इस साल सामान्य से बेहतर मॉनसून की संभावना जताई है. हालांकि FAO ने 41 वर्षों के सैटेलाइट आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर कहा है कि मजबूत अल नीनो की स्थिति में कई क्षेत्रों में गंभीर कृषि सूखा पड़ सकता है.
1.5 करोड़ टन चावल का नुकसान
संस्था ने कहा कि भारत पर इसका असर विशेष चिंता का विषय है. वर्ष 2015-16 के अल नीनो के दौरान देश में मक्का उत्पादन में करीब 4 फीसदी और धान उत्पादन में 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी. वहीं, दक्षिण-पूर्व एशिया में इसी अवधि के दौरान लगभग 1.5 करोड़ टन चावल का नुकसान हुआ था, जिससे कीमतें बढ़ गई थीं और आयात पर निर्भर देशों पर दबाव बढ़ा था.
अल नीनो पहले की तुलना में ज्यादा नुकसानदायक
FAO के प्राकृतिक संसाधन अधिकारी जॉर्ज अल्वार-बेल्ट्रान ने कहा कि जब बारिश कम होती है तो सबसे पहले खेती प्रभावित होती है. इससे किसानों की फसलें खराब हो सकती हैं, फिर पशुधन पर असर पड़ता है और आखिरकार उनकी आजीविका संकट में पड़ जाती है. FAO ने चेतावनी दी है कि इस बार का अल नीनो पहले की तुलना में ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकता है. संस्था के अनुसार, अब दुनिया पहले से ज्यादा गर्म हो चुकी है और कई देशों में खाद्य संकट व संघर्ष जैसी समस्याएं पहले से मौजूद हैं. ऐसे में अल नीनो का सबसे अधिक असर उन क्षेत्रों पर पड़ेगा, जहां लोगों की आर्थिक स्थिति कमजोर है और संकट से निपटने की क्षमता सीमित है.