मॉनसून का आधा सफर पूरा: बारिश में 13 फीसदी कमी, बुवाई पिछड़ी.. जलाशयों में घटा पानी का स्तर
India Rainfall Deficit: जून में कमजोर शुरुआत के बाद जुलाई में मॉनसून ने अच्छी वापसी की, जिससे खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आई. हालांकि 31 जुलाई तक देश में अब भी सामान्य से 13 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. धान, मक्का और दलहन की बुवाई पिछले साल से कम है, जबकि तिलहन और गन्ने का रकबा बढ़ा है.
IMD Monsoon Report: देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून का आधा सीजन पूरा हो चुका है. जून में कमजोर शुरुआत के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई थी, लेकिन जुलाई में अच्छी बारिश होने से हालात काफी सुधरे हैं. बारिश बढ़ने के साथ खरीफ फसलों की बुवाई ने भी रफ्तार पकड़ी और पहले जो बड़ा अंतर दिखाई दे रहा था, वह अब काफी कम हो गया है.
इसके बावजूद देश में 1 जून से 31 जुलाई तक सामान्य से करीब 13 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है. ऐसे में किसानों की नजर अब अगस्त और सितंबर की बारिश पर टिकी हुई है, क्योंकि यही आने वाली खरीफ और रबी फसलों की तस्वीर तय करेगी.
जुलाई की बारिश से बदली स्थिति
मॉनसून की शुरुआत इस बार अच्छी नहीं रही. जून के आखिर तक देश में सामान्य से करीब 40 प्रतिशत कम बारिश हुई थी. इससे धान, मक्का, दलहन और दूसरी खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई थी. हालांकि जुलाई के पहले सप्ताह में अच्छी बारिश हुई और महीने के आखिरी दिनों में मॉनसून फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया. खासकर मध्य भारत में सामान्य से 41 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई. इसका असर यह हुआ कि 31 जुलाई तक देश में बारिश की कमी घटकर 13 प्रतिशत रह गई.
किन इलाकों में सबसे ज्यादा कम रही बारिश?
बारिश पूरे देश में एक जैसी नहीं हुई. कई राज्यों में अच्छी बारिश हुई, जबकि कुछ इलाके अब भी सूखे जैसे हालात का सामना कर रहे हैं.
- पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से 30 प्रतिशत कम बारिश हुई.
- उत्तर-पश्चिम भारत में 12 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई.
- दक्षिण भारत में 23 प्रतिशत कम बारिश हुई.
- वहीं मध्य भारत में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई.
यही वजह है कि कुछ राज्यों में खेती की स्थिति बेहतर है, जबकि कई इलाकों के किसान अब भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं.
खरीफ फसलों की बुवाई में आया सुधार
बारिश बढ़ने का सबसे बड़ा फायदा खेती को मिला है. कृषि मंत्रालय के अनुसार, 31 जुलाई तक देश में खरीफ फसलों की बुवाई 894.22 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है. पिछले साल इसी समय यह आंकड़ा 920.72 लाख हेक्टेयर था. यानी इस बार बुवाई पिछले साल से करीब 26.50 लाख हेक्टेयर कम है. हालांकि एक महीने पहले यह अंतर 20 प्रतिशत से ज्यादा था. जुलाई की बारिश ने इस कमी को काफी हद तक कम कर दिया है.
किस फसल की क्या स्थिति है?
इस बार अलग-अलग फसलों की बुवाई में अलग-अलग तस्वीर देखने को मिल रही है. धान की बुवाई 301.49 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल से करीब 2.24 प्रतिशत कम है. मक्का का रकबा 83.56 लाख हेक्टेयर रहा, जिसमें 7.31 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. मक्का उत्पादन कम होने का असर इथेनॉल उद्योग पर भी पड़ सकता है.
दलहन की बुवाई में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन यह अब भी पिछले साल के मुकाबले 6.31 प्रतिशत कम है. इससे अरहर, मूंग और दूसरी दलहनी फसलों के उत्पादन को लेकर चिंता बनी हुई है. वहीं तिलहन की खेती में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. कपास की बुवाई पिछले साल से 2.38 प्रतिशत कम रही, जबकि गन्ने का रकबा बढ़कर 57.58 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है.
जलाशयों में पानी अब भी कम
बारिश बढ़ने के बावजूद देश के जलाशयों की स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है. केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक, 30 जुलाई तक देश के 166 बड़े जलाशयों में 81.479 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) पानी मौजूद है. यह उनकी कुल क्षमता का करीब 44.39 प्रतिशत है. यह जल भंडारण पिछले साल की तुलना में काफी कम है और सामान्य स्तर से भी नीचे बना हुआ है. अगर अगस्त और सितंबर में अच्छी बारिश नहीं हुई तो रबी फसलों की सिंचाई और पेयजल व्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है.
अगस्त की बारिश होगी सबसे अहम
जुलाई ने किसानों को बड़ी राहत जरूर दी है, लेकिन अभी चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में बारिश की कमी बनी हुई है. अगर अगस्त और सितंबर में मॉनसून सामान्य या सामान्य से बेहतर रहता है, तो खरीफ फसलों का उत्पादन बेहतर हो सकता है. साथ ही जलाशयों में पानी का स्तर भी बढ़ेगा, जिससे रबी फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकेगा. यानी आने वाले दो महीने किसानों के साथ-साथ देश की कृषि व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहने वाले हैं.