Tractor price hike: देश में खेती-किसानी से जुड़ी मशीनों की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी होने जा रही है. किसानों के लिए यह खबर चिंता बढ़ाने वाली है, क्योंकि ट्रैक्टर जैसी जरूरी मशीन अब और महंगी होने वाली है. देश की प्रमुख ट्रैक्टर निर्माता कंपनियों महिंद्रा और स्वराज ने अपने ट्रैक्टरों की कीमतें बढ़ाने का फैसला लिया है. यह बढ़ोतरी अप्रैल 2026 से अलग-अलग तारीखों पर लागू होगी और इसका असर सीधे किसानों की जेब पर पड़ेगा.
कब से लागू होंगे नए रेट
कंपनी के अनुसार, महिंद्रा अपने ट्रैक्टरों की कीमतें 8 अप्रैल 2026 से बढ़ाने जा रही है. वहीं स्वराज ट्रैक्टर्स, जो महिंद्रा ग्रुप का ही हिस्सा है, 21 अप्रैल 2026 से नई कीमतें लागू करेगा.
इसके अलावा, पहले ही कंपनी एस्कॉर्ट्स कुबोटा भी ट्रैक्टर की कीमतें बढ़ाने का ऐलान कर चुकी है. कंपनी ने बताया है कि 15 अप्रैल 2026 से नई कीमतें लागू होंगी. हालांकि यह बढ़ोतरी कुबोटा ब्रांड के ट्रैक्टरों पर लागू नहीं होगी, बल्कि बाकी सभी मॉडल्स पर इसका असर पड़ेगा.
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क्यों बढ़ रहे हैं ट्रैक्टर के दाम
ट्रैक्टर की कीमतों में बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह बढ़ती लागत है. पिछले कुछ समय से कच्चे माल की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है. स्टील, रबर और अन्य जरूरी मटेरियल महंगे हो गए हैं, जिससे कंपनियों का उत्पादन खर्च बढ़ गया है. ऐसे में कंपनियों के पास कीमत बढ़ाने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं बचा है. यही वजह है कि अब ट्रैक्टर कंपनियां अपनी लागत को संतुलित करने के लिए दाम बढ़ा रही हैं.
ऑटो सेक्टर में भी दिख रहा ट्रेंड
यह सिर्फ ट्रैक्टर उद्योग तक सीमित नहीं है. ऑटोमोबाइल और फार्म इक्विपमेंट सेक्टर में भी इसी तरह का ट्रेंड देखने को मिल रहा है. कई कंपनियां बढ़ती लागत के कारण अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ा रही हैं. इससे साफ है कि आने वाले समय में मशीनरी और वाहनों की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका असर आम लोगों और किसानों दोनों पर पड़ेगा.
स्वराज ट्रैक्टर का सफर
स्वराज ट्रैक्टर्स आज देश के प्रमुख ब्रांड्स में से एक है. यह महिंद्रा ग्रुप का हिस्सा है, जिसने 2007 में पंजाब ट्रैक्टर्स लिमिटेड में हिस्सेदारी लेकर इसे अपने साथ जोड़ा था. इसके बाद से स्वराज ने भारतीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाई है और आज यह किसानों के बीच एक भरोसेमंद नाम बन चुका है.
किसानों पर क्या पड़ेगा असर
ट्रैक्टर की कीमत बढ़ने का सीधा असर किसानों पर पड़ेगा. पहले ही खेती की लागत बढ़ रही है, बीज, खाद, डीजल और मजदूरी सब महंगे हो चुके हैं. अब ट्रैक्टर महंगा होने से किसानों के लिए नई मशीन खरीदना और मुश्किल हो सकता है. हालांकि ग्रामीण और कृषि क्षेत्र में ट्रैक्टर की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है, लेकिन बढ़ती कीमतें इस मांग को कुछ हद तक प्रभावित कर सकती हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे माल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले महीनों में और भी कंपनियां अपने उत्पादों के दाम बढ़ा सकती हैं.