सेब की कीमतों में तेजी से गिरावट, 700 रुपये में 10 किलो हुआ भाव.. किसानों के साथ व्यापारियों को नुकसान
कश्मीर में सेब किसानों को भारी नुकसान हो रहा ,है क्योंकि कीमतें 30- 40 फीसदी तक गिर गई हैं. CA स्टोरेज में 30 फीसदी सेब बिना बिके हैं और गुणवत्ता घटने से दाम और नीचे आए हैं. बढ़ती गर्मी और ताजे फलों की आवक से मांग कमजोर बनी हुई है.
Apple Price Fall: कश्मीर में सेब उत्पादक किसानों और व्यापारियों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. पिछले कुछ हफ्तों में सेब के दाम तेजी से गिर गए हैं. उद्योग से जुड़े लोगों और किसानों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर से बाहर के थोक बाजारों में कीमतें 30 से 40 प्रतिशत तक कम हो गई हैं. इसका कारण बढ़ता तापमान और फलों की गुणवत्ता में गिरावट बताया जा रहा है. मौजूदा वक्त में 10 किलो के क्रेट का रेट 700 रुपये है.
जम्मू-कश्मीर फ्रूट एंड वेजिटेबल प्रोसेसिंग एंड इंटीग्रेटेड कोल्ड चेन एसोसिएशन (JKPICCA) के प्रवक्ता इजहान जावेद ने ‘बिजनेसलाइन’ से कहा कि गर्मी बढ़ने की वजह से बाहरी बाजारों में व्यापारी कम मात्रा में सेब खरीद रहे हैं. इस सीजन में कश्मीर में लगभग 30 से 35 लाख सेब के क्रेट कंट्रोल्ड एटमॉस्फियर (CA) स्टोरेज में रखे गए, जो सामान्य से अधिक मात्रा है. उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार, पिछले साल अगस्त में जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे बंद होने और उस समय बाजार में कम दाम मिलने की वजह से कई किसानों और व्यापारियों ने अपना सेब स्टोरेज में रखना पड़ा. हालांकि बाद के महीनों में इसका एक बड़ा हिस्सा बिक गया, लेकिन अभी भी काफी मात्रा में सेब बिना बिके पड़े हैं, जिससे प्रमुख बाजारों में मांग कमजोर बनी हुई है.
10 किलो के क्रेट का रेट 700 रुपये
जम्मू-कश्मीर फ्रूट एंड वेजिटेबल प्रोसेसिंग एंड इंटीग्रेटेड कोल्ड चेन एसोसिएशन के प्रवक्ता इजहान जावेद ने कहा कि स्टोरेज में रखे गए कुल सेबों का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा अभी भी बिना बिके पड़ा है. किसानों का कहना है कि स्टोरेज में रखे सेबों की गुणवत्ता गिरने से कीमतों पर और दबाव पड़ा है. किसान और व्यापारी मोहम्मद अशरफ वानी ने कहा कि डिलीशियस किस्म के सेब, जो सबसे ज्यादा उगाए जाते हैं, इस समय 10 किलो के क्रेट में 700 से 1000 रुपये में बिक रहे हैं. उन्होंने कहा कि दो हफ्ते पहले यही कीमत 1000 से 1300 रुपये थी, यानी दामों में तेजी से गिरावट आई है.
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CA स्टोरेज में रखे सेबों की गुणवत्ता प्रभावित
उन्होंने यह भी बताया कि लंबे समय तक स्टोरेज और तापमान में उतार-चढ़ाव की वजह से CA स्टोरेज में रखे सेबों की गुणवत्ता प्रभावित हुई है, जिससे उनका बाजार मूल्य कम हो गया है. व्यापारियों के अनुसार, बाजार में मौसमी ताजे फलों की बढ़ती आवक भी सेब की मांग में गिरावट का एक बड़ा कारण है, जिससे कीमतों पर और दबाव बढ़ गया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर यही स्थिति जारी रही, तो किसानों के लिए इस सीजन में अपनी लागत निकालना भी मुश्किल हो सकता है. यह मंदी कश्मीर के बागवानी क्षेत्र को और प्रभावित कर रही है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था की एक महत्वपूर्ण रीढ़ है. सेब उद्योग से लगभग 7 लाख परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं और यह हर साल 10,000 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान देता है.
बर्फबारी से सेब की फसल को नुकसान
बता दें कि कश्मीर में जहां सेब किसानों को उचित रेट नहीं मिल रहा है, वहीं हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के ऊंचाई वाले में पिछले हफ्ते सेब उत्पादक क्षेत्रों को बर्फबारी से नुकसान पहुंचा, जिससे बागानों को काफी नुकसान पहुंचा था. किसानों के अनुसार, जिन बागानों में ओलावृष्टि से बचाने के लिए एंटी-हेल नेट लगाए गए थे, वहां ज्यादा नुकसान हुआ था.