हरियाणा में बागवानी फसलों को बढ़ावा, बनाए जाएंगे क्लस्टर.. किसान करेंगे टिशू कल्चर आधारित खेती

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी कहा कि दूसरे राज्यों के विश्वविद्यालयों में विकसित सफल हाइब्रिड किस्मों, फल पौधों और आधुनिक तकनीकों का अध्ययन कर उन्हें हरियाणा की परिस्थितियों के अनुसार अपनाया जाए, ताकि किसानों को गुणवत्ता वाले बीज और पौध सामग्री उपलब्ध हो सके.

नोएडा | Published: 5 Apr, 2026 | 08:28 PM

Natural Farming: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए फसल विविधीकरण, बागवानी और उच्च मूल्य वाले फलों की खेती पर विशेष जोर दिया है. उन्होंने अधिकारियों को स्ट्रॉबेरी, नींबू, अमरूद और ड्रैगन फ्रूट जैसी प्रमुख फसलें उगाने के लिए उपयुक्त क्षेत्र पहचानने और क्लस्टर विकसित करने के निर्देश दिए है. मुख्यमंत्री ने कहा है कि बढ़ती बाजार मांग और लाभकारी कीमतों को ध्यान में रखते हुए किसानों को उत्पादन, पौध सामग्री, प्रसंस्करण और विपणन से जोड़ना जरूरी है, ताकि उनकी आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो. उन्होंने अरहर, सोयाबीन, मूंगफली, दालें, फलों और गन्ने की टिशू कल्चर आधारित खेती को बढ़ावा देने का भी निर्देश दिया.

दरअसल, सीएम सैनी ने बीते दिनों कृषि और बागवानी विभाग के अधिकारियों की समीक्षा बैठक  की अध्यक्षता करते हुए ये बातें कहीं. उन्होंने कहा कि मिट्टी और जलवायु के अनुसार क्लस्टर आधारित खेती मॉडल विकसित किए जाएं, ताकि कम समय में ज्यादा उत्पादन और बेहतर लाभ सुनिश्चित किया जा सके. उन्होंने पारंपरिक फसलों के साथ-साथ फलों की खेती को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने का भी निर्देश दिया.

अरहर, सोयाबीन, मूंगफली की किस्में होंगी विकसित

उन्होंने हर जिले की कृषि और बागवानी क्षमता का वैज्ञानिक मूल्यांकन करने और किसानों को बहुफसल, बहुप्रोडक्ट और उच्च मूल्य वाली खेती से जोड़कर स्थायी आय सुनिश्चित करने पर जोर दिया. मुख्यमंत्री ने नई हाइब्रिड और उच्च उपज वाली कपास (नरमा), सरसों, अरहर, सोयाबीन, मूंगफली  और दालों की किस्में विकसित करने तथा तूफान, जलवायु परिवर्तन और प्रतिकूल मौसम को सहन करने वाले बीज और पौध सामग्री पर शोध बढ़ाने के निर्देश दिए.

मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और पंचायत स्तर पर उपलब्ध जमीन को रिसर्च और ट्रायल के लिए चिन्हित किया जाए, ताकि नई किस्मों और तकनीकों का स्थानीय परिस्थितियों में परीक्षण किया जा सके और उन्हें जल्दी किसानों तक पहुंचाया जा सके. उन्होंने छात्रों और अनुसंधान संस्थानों को भी सक्रिय रूप से शामिल करने के निर्देश दिए ताकि नवाचार तेजी से आगे बढ़ सके.

हाइब्रिड किस्मों पर होगा अध्यन

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी कहा कि दूसरे राज्यों के विश्वविद्यालयों में विकसित सफल हाइब्रिड किस्मों, फल पौधों और आधुनिक तकनीकों का अध्ययन कर उन्हें हरियाणा की परिस्थितियों के अनुसार अपनाया जाए, ताकि किसानों को गुणवत्ता वाले बीज और पौध सामग्री उपलब्ध हो सके. वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार ने 1,40,000 एकड़ जलजमाव और खारा भूमि को उपजाऊ बनाने का लक्ष्य रखा है. इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने खेतों की बांधों, नहर किनारों और नालों के किनारे सुफ़ेदा (यूकेलिप्टस) के पेड़ लगाने का निर्देश दिय. उन्होंने कहा कि यूकेलिप्टस की गहरी जड़ें और उच्च जल अवशोषण क्षमता जलजमाव वाली भूमि को प्राकृतिक रूप से ठीक करने में बहुत प्रभावी है.

राज्यभर में क्लस्टर बनाने का निर्देश

मुख्यमंत्री ने प्राकृतिक और सतत खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्यभर में क्लस्टर बनाने का निर्देश दिया. इन क्लस्टरों के किसानों को जीवामृत, ऑर्गेनिक सोल्यूशंस, ड्रम और अन्य जरूरी संसाधन दिए जाएंगे, साथ ही व्यावहारिक प्रशिक्षण भी मिलेगा. उन्होंने कहा कि गुरुकुल कुरुक्षेत्र में आचार्य देवव्रत द्वारा लागू प्राकृतिक खेती मॉडल को आधार बनाकर इसे व्यापक रूप से लागू किया जाए, ताकि अधिक किसान कम लागत और टिकाऊ खेती अपना सकें.

पैदावार कम होने पर नुकसान की भरपाई

उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि यदि किसी क्लस्टर में प्रारंभिक चरण में पैदावार कम हो तो सरकार किसानों को नुकसान की भरपाई करे. वित्तीय सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन देकर किसानों का भरोसा मजबूत किया जाएगा, जिससे प्राकृतिक खेती को व्यापक आंदोलन बनाया जा सके. खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री ने कहा कि फसलों, फलों, सब्जियों और अन्य कृषि उत्पादों का कीटनाशक और अवशेष परीक्षण नियमित रूप से किया जाए. स्वास्थ्य के लिए हानिकारक रसायनों पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाए और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.

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