बढ़ेगा कपास का इंपोर्ट! मांग के आगे उत्पादन कमजोर, 60 लाख गांठ आयात का अनुमान

भारत में कपास की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन उत्पादन उसी रफ्तार से नहीं बढ़ पा रहा है. ऐसे में देश को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए पहले के मुकाबले अधिक कपास आयात करना पड़ सकता है. कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) के ताजा अनुमान में आयात बढ़ने और निर्यात घटने की संभावना जताई गई है.

नोएडा | Updated On: 3 Aug, 2026 | 09:08 AM

भारत में कपास की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन उत्पादन उसी रफ्तार से नहीं बढ़ पा रहा है. ऐसे में देश को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए पहले के मुकाबले अधिक कपास आयात करना पड़ सकता है. कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) के ताजा अनुमान में आयात बढ़ने और निर्यात घटने की संभावना जताई गई है. CAI के ताजा अनुमान के अनुसार, 2025-26 सीजन में भारत का कपास आयात बढ़कर 60 लाख गांठ (बेल) तक पहुंच सकता है. वहीं, कपास का निर्यात घटकर 15 लाख गांठ रहने का अनुमान है. ऐसे में CAI ने घरेलू कपास खपत का अनुमान भी बढ़ाकर 348 लाख गांठ कर दिया है. इससे साफ है कि देश में उत्पादन और मांग के बीच अंतर बढ़ रहा है और भारत की आयातित कपास पर निर्भरता बढ़ सकती है.

इस बीच, कृषि वैज्ञानिक आर.एस. परोड़ा ने द ट्रिब्यून से कहा कि भारत में कपास क्षेत्र को फिर से प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए नई तकनीक और नीतिगत सुधारों की तत्काल जरूरत है. उनका कहना है कि दुनिया के कई कपास उत्पादक देशों ने नई कृषि तकनीकों और नवाचारों को तेजी से अपनाया है, लेकिन भारत पिछले दो दशकों से आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) तकनीक का लाभ नहीं उठा पाया है. इससे कपास किसानों और उद्योग दोनों को नुकसान हो रहा है.

किसानों की आय पर पड़ रहा असर

कृषि वैज्ञानिक और पद्म भूषण सम्मानित डॉ. आर.एस. परोड़ा ने कहा कि नई कृषि तकनीकों को अपनाने में देरी का सीधा असर कपास की उत्पादकता, वैश्विक प्रतिस्पर्धा और किसानों की आय पर पड़ा है. उनका कहना है कि अब समय आ गया है कि सरकार विज्ञान आधारित और पारदर्शी नियामक व्यवस्था तैयार करे, ताकि नई तकनीकों को अपनाने का रास्ता आसान हो सके. उन्होंने सरकार से कपास क्षेत्र की व्यापक समीक्षा करने और आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी (बायोटेक्नोलॉजी), विज्ञान आधारित नियमों और नवाचार पर आधारित दीर्घकालिक रणनीति बनाने की अपील की.

दुनिया का सबसे बड़ा कपास उत्पादक भारत

डॉ. परोड़ा ने कहा कि कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) के ताजा अनुमान देश के लिए एक चेतावनी हैं. कभी दुनिया का सबसे बड़ा कपास उत्पादक और दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक रहा भारत अब धीरे-धीरे अपनी वैश्विक बढ़त खो रहा है. उनका कहना है कि कपास आयात पर बढ़ती निर्भरता न केवल देश की प्रतिस्पर्धा को कमजोर कर रही है, बल्कि भविष्य में वैश्विक बाजार और भू-राजनीतिक परिस्थितियों से जुड़े जोखिम भी बढ़ा सकती है.

क्या बोले चेयरमैन डॉ. आर.एस. परोड़ा

ट्रस्ट फॉर एडवांसमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज (TAAS) के संस्थापक चेयरमैन डॉ. आर.एस. परोड़ा ने कहा कि हाल ही में घोषित कॉटन मिशन में जीएम (GM) कपास तकनीक को बड़े स्तर पर अपनाने का कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है. उनका मानना है कि यह तकनीक किसानों की आय बढ़ाने और देश में कपास उत्पादन सुधारने में अहम भूमिका निभा सकती है. वहीं, कृषि विशेषज्ञ पीयूष सिंह का कहना है कि कपास क्षेत्र की मौजूदा समस्याएं अस्थायी नहीं बल्कि नीतिगत हैं. उनका मानना है कि नई तकनीकों और नवाचार को बढ़ावा देने वाली नीतियों की कमी के कारण यह स्थिति बनी है.

किस राज्य में होती है कपास की खेती

भारत में सबसे ज्यादा कपास उत्पादन  गुजरात, महाराष्ट्र और तेलंगाना में होता है. क्षेत्रफल के लिहाज से भारत दुनिया में सबसे बड़ा कपास उत्पादक देश है और उत्पादन के मामले में दूसरे स्थान पर है. देश में कपास की खेती से करीब 60 लाख किसान जुड़े हुए हैं. इसके अलावा कपास पर आधारित देश का विशाल टेक्सटाइल (वस्त्र) उद्योग भी काफी हद तक इसी फसल पर निर्भर करता है.

Published: 3 Aug, 2026 | 09:06 AM

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