Cotton Imports 2026: भारत में कपास के आयात में इस साल बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है. कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) के अनुसार, साल 2025-26 में देश का कपास आयात बढ़कर करीब 60 लाख गांठ (बेल) तक पहुंच सकता है. यह अब तक का सबसे बड़ा आयात माना जा रहा है. इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह सरकार द्वारा दी गई 11 फीसदी आयात शुल्क (इंपोर्ट ड्यूटी) में छूट है. इस फैसले के बाद देश की टेक्सटाइल मिलें सस्ती विदेशी कपास खरीदने पर ज्यादा जोर दे रही हैं. इससे घरेलू बाजार की तस्वीर भी बदल रही है और कपास के निर्यात में कमी आने की संभावना जताई जा रही है.
11 फीसदी ड्यूटी छूट से बढ़ा विदेशी कपास का आयात
सरकार की ओर से आयात शुल्क में राहत मिलने के बाद टेक्सटाइल कंपनियों ने विदेशों से बड़ी मात्रा में कपास खरीदना शुरू कर दिया है. उद्योग से जुड़े आंकड़ों के मुताबिक जून 2026 के आखिर तक करीब 51 लाख गांठ कपास भारत के बंदरगाहों पर पहुंच चुकी थी. व्यापार से जुड़े जानकारों का अनुमान है कि सितंबर के अंत तक इसमें 10 से 15 लाख गांठ और जुड़ सकती हैं. इसी वजह से CAI ने अपने आयात के अनुमान को बढ़ाकर 60 लाख गांठ कर दिया है. कंपनियों का मानना है कि ड्यूटी छूट का फायदा उठाकर कम लागत में कच्चा माल खरीदना उनके लिए फायदेमंद रहेगा. इसलिए वे इस अवसर का पूरा लाभ लेने में जुटी हैं.
घरेलू बाजार में क्यों बढ़ी विदेशी कपास की मांग?
भारत दुनिया के बड़े कपास उत्पादक देशों में शामिल है, लेकिन इस समय टेक्सटाइल उद्योग की मांग काफी अधिक है. ऐसे में कई मिलें घरेलू कपास के साथ-साथ विदेशी कपास भी खरीद रही हैं. सस्ती कीमत पर आयात होने वाली कपास से मिलों की उत्पादन लागत कम होती है. इससे उन्हें कपड़ा और अन्य टेक्सटाइल उत्पाद बनाने में मदद मिलती है. विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में मिलें घरेलू खरीद की बजाय आयात को प्राथमिकता दे रही हैं ताकि लागत पर नियंत्रण रखा जा सके.
कपास के निर्यात में आएगी कमी
जहां एक ओर आयात तेजी से बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत से कपास के निर्यात में गिरावट की संभावना है. कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने चालू सीजन के लिए निर्यात का अनुमान 18 लाख गांठ से घटाकर 15 लाख गांठ कर दिया है. इसका मतलब है कि देश में उपलब्ध कपास का बड़ा हिस्सा घरेलू टेक्सटाइल उद्योग में ही इस्तेमाल होगा. उद्योग संगठनों का मानना है कि घरेलू मांग मजबूत रहने के कारण कंपनियां निर्यात की बजाय स्थानीय बाजार को प्राथमिकता दे रही हैं.
देश में कपास की खपत भी बढ़ी
कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (CITI) के अनुसार, इस साल देश में कपास की कुल खपत बढ़कर 348 लाख गांठ रहने का अनुमान है. वहीं, शुरुआती स्टॉक, घरेलू उत्पादन और आयात को मिलाकर इस सीजन में कुल उपलब्ध कपास 452.59 लाख गांठ रहने का अनुमान लगाया गया है.
किसानों और उद्योग पर क्या होगा असर?
विदेशी कपास के ज्यादा आयात से टेक्सटाइल उद्योग को कम लागत पर कच्चा माल मिल सकता है, जिससे कंपनियों की लागत घटेगी और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी. हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि अगर लंबे समय तक आयात पर निर्भरता बढ़ती रही तो इसका असर घरेलू कपास उत्पादकों पर पड़ सकता है. साथ ही, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव, डॉलर की चाल और सरकार की आयात-निर्यात नीति भी आगे चलकर बाजार की दिशा तय करेगी.
ऐसे में आने वाले महीनों में कपास उत्पादन, वैश्विक कीमतों और सरकार की नीतियों पर सभी की नजर रहेगी. यही तय करेगा कि रिकॉर्ड आयात का फायदा उद्योग को कितना मिलता है और इसका असर किसानों पर किस रूप में दिखाई देता है.