कपास बुवाई ने पकड़ी रफ्तार, 100 लाख हेक्टेयर के पार पहुंचा रकबा.. तेलंगाना-MP में बढ़ा क्षेत्रफल

मॉनसून की सक्रियता के बाद देश में कपास की बुवाई ने रफ्तार पकड़ ली है. इस सीजन में 100 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में कपास बोई जा चुकी है. तेलंगाना, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में रकबा बढ़ा है. विशेषज्ञों के मुताबिक फसल की स्थिति अच्छी है, लेकिन बेहतर उत्पादन के लिए आगे अच्छी बारिश जरूरी है.

नोएडा | Updated On: 29 Jul, 2026 | 10:02 AM

Cotton Cultivation: देश के प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में मॉनसून सक्रिय होने के साथ कपास की बुवाई ने रफ्तार पकड़ ली है. इस सीजन में अब तक 100 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में कपास की बुवाई हो चुकी है. तेलंगाना, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में पिछले साल के मुकाबले अधिक क्षेत्र में कपास की खेती की गई है. इस साल मॉनसून देर से आने के कारण कपास की बुवाई करीब 20 से 30 दिन पीछे चली गई थी. हालांकि, हाल के दिनों में अच्छी बारिश होने से किसानों ने तेजी से बुवाई पूरी की है.

कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) की फसल समिति के अध्यक्ष अतुल गणात्रा ने बिजनेसलाइन से कहा कि अब तक 100 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में कपास की बुवाई  हो चुकी है, जबकि पिछले साल इसी समय यह करीब 103 लाख हेक्टेयर थी. उन्होंने कहा कि पिछले छह दिनों में हुई अच्छी बारिश से उन राज्यों के किसानों को भी बुवाई का मौका मिला है, जहां पहले बारिश कम होने के कारण खेती प्रभावित हो रही थी. साथ ही उम्मीद जताई कि इस बार कपास का कुल रकबा पिछले साल के स्तर को पार कर सकता है.

कपास की बुवाई की अवधि 25 अगस्त तक बढ़ाई गई

कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CAI) का कहना है कि इस साल मॉनसून देर से आने के कारण कपास की बुवाई की अवधि 25 अगस्त तक बढ़ा दी गई है. संगठन को उम्मीद है कि 20 अगस्त तक सरकार का 120 लाख हेक्टेयर से अधिक बुवाई का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है. CAI के अनुसार, फिलहाल देश में हर दिन करीब 50,000 हेक्टेयर में कपास की बुवाई हो रही है. आंध्र प्रदेश में कपास का रकबा  पिछले साल के मुकाबले 31 फीसदी और तेलंगाना में 4 फीसदी बढ़ा है. गुजरात में हाल की अच्छी बारिश और राज्य सरकार द्वारा 14,000 रुपये प्रति एकड़ की सब्सिडी देने की घोषणा के बाद इस साल कपास का रकबा 7 से 10 फीसदी तक बढ़ने की उम्मीद है.

तेलंगाना में 17.64 लाख हेक्टेयर में कपास बुवाई

27 जुलाई तक गुजरात में 20 लाख हेक्टेयर में कपास की बुवाई हुई, जो पिछले साल के 20.16 लाख हेक्टेयर से थोड़ी कम है. वहीं, महाराष्ट्र में कपास का रकबा 35.76 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले साल यह 37.89 लाख हेक्टेयर था. दूसरी ओर तेलंगाना में बुवाई बढ़कर 17.64 लाख हेक्टेयर और मध्य प्रदेश में 5.79 लाख हेक्टेयर हो गई है, जो पिछले साल से अधिक है.

कब शुरू होगी कपास की आवक

कपास की फसल को लेकर किसानों और व्यापारियों से मिल रहे संकेत फिलहाल सकारात्मक हैं. कपास विशेषज्ञों के अनुसार, देश के ज्यादातर कपास उत्पादक क्षेत्रों में फसल की स्थिति अच्छी बनी हुई है, हालांकि पौधों की बेहतर बढ़त के लिए आने वाले दिनों में अच्छी बारिश की जरूरत है. कॉटन एसोसिएशन से जुड़े विशेषज्ञ गणात्रा ने बताया कि अभी तक फसल की स्थिति काफी अच्छी है. उत्तर भारत और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में करीब 15 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जल्दी बोई गई कपास की आवक सितंबर के पहले सप्ताह से शुरू हो सकती है.

तेलंगाना में कपास की बुवाई खत्म

रायचूर के कपास कारोबारी रामानुज दास बोब ने कहा कि तेलंगाना में कपास  की बुवाई पूरी हो चुकी है और अच्छी बारिश के कारण फसल की स्थिति बेहतर है. कर्नाटक के रायचूर और आंध्र प्रदेश के अडोनी क्षेत्र में भी हाल की बारिश से कपास की फसल को फायदा हुआ है. उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर कपास की फसल संतोषजनक स्थिति में है, लेकिन पौधों की अच्छी वृद्धि के लिए आगे भी तेज बारिश की जरूरत है. देर से हुई बारिश के कारण सूखे क्षेत्रों में पौधों की ऊंचाई पर थोड़ा असर पड़ सकता है. हालांकि, इस साल कपास का रकबा पिछले साल की तुलना में करीब 10 फीसदी अधिक है, जो आगे चलकर उत्पादन में मदद कर सकता है.

 

Published: 29 Jul, 2026 | 09:56 AM

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