खाद्य तेल खरीदने में नहीं होगा भ्रम, पैक साइज होंगे एक जैसे.. सरकार ला सकती है नए नियम
खाद्य तेल खरीदने वाले उपभोक्ताओं को जल्द राहत मिल सकती है. सरकार खाद्य तेल के पैक साइज को मानकीकृत करने की तैयारी में है. इससे कीमतों में पारदर्शिता बढ़ेगी, ब्रांडों की तुलना आसान होगी और प्लास्टिक के अनावश्यक उपयोग में कमी आएगी. उद्योग जगत का मानना है कि यह कदम उपभोक्ताओं, कंपनियों और पर्यावरण सभी के लिए फायदेमंद साबित होगा.
Edible Oil: खाद्य तेल खरीदने वाले उपभोक्ताओं के लिए जल्द ही अच्छी खबर आ सकती है. सरकार खाद्य तेल के पैक साइज को मानकीकृत (स्टैंडर्ड) करने के लिए नए नियम लाने की तैयारी कर रही है. उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि इससे कीमतों में पारदर्शिता बढ़ेगी और सभी कंपनियों के लिए समान प्रतिस्पर्धा का माहौल बनेगा. वर्तमान में बाजार में 850 मिलीलीटर, 875 मिलीलीटर, 900 मिलीलीटर और 950 मिलीलीटर जैसे अलग-अलग आकार के पैक उपलब्ध हैं. इससे उपभोक्ताओं को विभिन्न ब्रांडों की कीमतों की सही तुलना करने और प्रति लीटर वास्तविक कीमत समझने में कठिनाई होती है. नए नियम लागू होने पर उपभोक्ताओं के लिए कीमतों की तुलना करना आसान हो जाएगा.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, उपभोक्ता संरक्षण, पारदर्शी लेबलिंग और टिकाऊ पैकेजिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार खाद्य तेल के पैक साइज को मानकीकृत करने की दिशा में कदम उठा रही है. इस पहल का उद्योग जगत ने स्वागत किया है. पी मार्क सरसों तेल ब्रांड की निर्माता कंपनी पुरी ऑयल मिल्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक विवेक पुरी ने ‘बिजनेसलाइन’ से कहा कि सरकार ने इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर ध्यान दिया है और गैर-मानक पैक साइज की समस्या को दूर करने की दिशा में काम कर रही है. उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को स्पष्ट, पारदर्शी और आसानी से तुलना की जा सकने वाली कीमतों का अधिकार है.
कीमतों की तुलना करना आसान होगा
विवेक पुरी के अनुसार, मानकीकृत पैक साइज लागू होने से उपभोक्ताओं के लिए विभिन्न ब्रांडों के उत्पादों और उनकी कीमतों की तुलना करना आसान होगा. साथ ही, कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा पैकेजिंग के बजाय उत्पाद की गुणवत्ता, शुद्धता और मूल्य के आधार पर होगी. इससे पैकेज्ड खाद्य तेलों के प्रति उपभोक्ताओं का भरोसा भी बढ़ेगा. साथ ही खाद्य तेल के पैक साइज को मानकीकृत करने से केवल उपभोक्ताओं को ही नहीं, बल्कि पर्यावरण को भी लाभ मिल सकता है. उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अलग-अलग आकार के पैक बनाने के लिए अलग बोतलें, लेबल और पैकेजिंग सामग्री की जरूरत पड़ती है, जिससे उत्पादन प्रक्रिया जटिल होती है और अधिक प्लास्टिक का उपयोग होता है.
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उत्पादन और सप्लाई चेन सरल बनेगा
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि पैक साइज एक समान कर दिए जाएं तो उत्पादन और सप्लाई चेन को सरल बनाया जा सकता है. इससे अनावश्यक प्लास्टिक के इस्तेमाल में कमी आएगी और पैकेजिंग प्रक्रिया अधिक टिकाऊ बन सकेगी. पुरी ऑयल मिल्स जैसी कंपनियां लंबे समय से खाद्य तेल के पैक साइज को मानकीकृत करने की मांग कर रही हैं. उनका मानना है कि उपभोक्ताओं को अलग-अलग ब्रांडों के उत्पादों की कीमत और मूल्य की सीधी तुलना करने का अवसर मिलना चाहिए. उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम खाद्य तेल बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों को मजबूत करने में मदद करेगा.
प्रस्तावित बदलावों की आधिकारिक घोषणा नहीं
सरकार ने अभी तक इन प्रस्तावित बदलावों की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन उद्योग जगत को उम्मीद है कि यह कदम जल्द लागू हो सकता है. पुरी ऑयल मिल्स के प्रबंध निदेशक विवेक पुरी का कहना है कि जब कोई ग्राहक दुकान पर दो अलग-अलग ब्रांड के तेल की तुलना करता है, तो उसे कीमत और मात्रा आसानी से समझ आनी चाहिए. लेकिन अलग-अलग पैक साइज होने के कारण यह तुलना कई बार मुश्किल हो जाती है. उनके अनुसार, पैक साइज को मानकीकृत करने से कीमतों में पारदर्शिता बढ़ेगी, पैकेज्ड खाद्य तेलों पर उपभोक्ताओं का भरोसा मजबूत होगा और सभी कंपनियों को समान प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलेगा.