तेल उद्योग पर शिकंजा कसने की तैयारी, नियम न मानने वाली कंपनियों को भेजा गया नोटिस

सरकार ने संबंधित कंपनियों को साफ तौर पर बताया है कि अगर नियमों का उल्लंघन साबित होता है, तो निरीक्षण से लेकर माल की जब्ती तक की कार्रवाई की जा सकती है. हालांकि, कानून के तहत पहले कंपनियों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया है.

नई दिल्ली | Published: 15 Jan, 2026 | 10:39 AM

VOPPA: देश में खाद्य तेल की कीमतें, उपलब्धता और पारदर्शिता लंबे समय से सरकार के लिए बड़ी चिंता का विषय रही हैं. आम उपभोक्ता से लेकर किसान और उद्योग तक, हर कड़ी इस बात से जुड़ी है कि तेल का उत्पादन कितना हो रहा है और बाजार में उसकी आपूर्ति कैसे हो रही है. इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने अब कुछ बड़ी खाद्य तेल कंपनियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है. नियमों का पालन न करने पर इन कंपनियों को कारण बताओ नोटिस भेजे गए हैं, जिससे पूरे सेक्टर में हलचल मच गई है.

क्यों भेजे गए नोटिस

केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने यह कदम तब उठाया, जब यह सामने आया कि कुछ बड़ी खाद्य तेल कंपनियां अनिवार्य मासिक उत्पादन विवरण जमा नहीं कर रही थीं. विभाग के मुताबिक कंपनियों को कई बार ईमेल, फोन और रिमाइंडर भेजे गए, लेकिन इसके बावजूद जरूरी जानकारी नहीं दी गई. सरकार का कहना है कि यह सीधा तौर पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत जारी आदेशों का उल्लंघन है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

सात दिन का अल्टीमेटम

सरकार ने संबंधित कंपनियों को साफ तौर पर बताया है कि अगर नियमों का उल्लंघन साबित होता है, तो निरीक्षण से लेकर माल की जब्ती तक की कार्रवाई की जा सकती है. हालांकि, कानून के तहत पहले कंपनियों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया गया है. इसी के तहत उन्हें सात दिन का समय दिया गया है, ताकि वे लिखित जवाब देकर बता सकें कि उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए. अगर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो आगे की सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है.

VOPPA 2025 से कसा गया शिकंजा

खाद्य तेल सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सरकार ने हाल ही में VOPPA 2025 लागू किया है. इस नए नियम के तहत खाद्य तेल बनाने, प्रोसेस करने, ब्लेंडिंग करने और पैकिंग करने वाली सभी इकाइयों का नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम और VOPPA पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है. इसके साथ ही हर महीने उत्पादन, स्टॉक, आयात, बिक्री और उपलब्धता से जुड़ा पूरा विवरण ऑनलाइन जमा करना जरूरी है.

निरीक्षण और सख्ती का दौर

सरकार ने साफ कर दिया है कि यह कार्रवाई सिर्फ कुछ कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगी. जो भी इकाइयां VOPPA के तहत रजिस्ट्रेशन नहीं कराएंगी या समय पर रिटर्न दाखिल नहीं करेंगी, उन्हें भी नोटिस भेजा जाएगा. इसके साथ ही जनवरी 2026 में हरियाणा, राजस्थान और अन्य राज्यों में खाद्य तेल प्रोसेसिंग यूनिट्स का निरीक्षण अभियान चलाने की योजना है, ताकि नियमों का सख्ती से पालन कराया जा सके.

पारदर्शिता से मजबूत होगी खाद्य सुरक्षा

सरकार का मानना है कि सही और समय पर डेटा मिलने से नीति निर्माण आसान होगा और देश की खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी. इसी उद्देश्य से नवंबर 2025 में इंदौर में एक राष्ट्रीय कार्यशाला भी आयोजित की गई थी, जहां कंपनियों को सही डेटा रिपोर्टिंग और पोर्टल के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी गई. आने वाले समय में ऐसे कार्यक्रम और तेज किए जाएंगे.

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