चीनी के दाम में 11.9 फीसदी का बड़ा उछाल! ब्राजील-यूरोप के मौसम से भारत के आयात तक, ये वजहें जिम्मेदार

Global Sugar Prices: अगस्त 2026 में वैश्विक चीनी कीमतों में जुलाई के मुकाबले 11.9 फीसदी का बड़ा उछाल आया. FAO के मुताबिक यूरोप में खराब मौसम से चीनी चुकंदर की पैदावार घटने की आशंका, एशिया में अल नीनो का असर, ब्राजील में कम उत्पादन और भारत के शुल्क मुक्त कच्ची चीनी आयात के फैसले ने कीमतों को प्रभावित किया.

नोएडा | Published: 5 Sep, 2026 | 07:44 AM

Sugar Crisis: दुनियाभर में चीनी की कीमतों में अगस्त महीने के दौरान अचानक तेजी देखने को मिली है. संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2026 में वैश्विक चीनी कीमतें जुलाई के मुकाबले 11.9 फीसदी बढ़ गईं. खाद्य जिंसों में यह सबसे बड़ी मासिक बढ़ोतरी रही. FAO के मुताबिक चीनी की कीमत बढ़ने के पीछे कई वजहें एक साथ काम कर रही हैं. यूरोप में खराब मौसम के कारण चीनी चुकंदर की पैदावार कम होने की आशंका है. वहीं एशिया के प्रमुख चीनी उत्पादक देशों में अल नीनो के असर को लेकर चिंता बढ़ी है. इसके अलावा ब्राजील में चीनी उत्पादन कम रहने और भारत की ओर से कच्ची चीनी के ड्यूटी फ्री आयात की घोषणा ने भी अंतरराष्ट्रीय बाजार को प्रभावित किया है.

यूरोप के मौसम ने बढ़ाई चिंता

FAO के अनुसार यूरोपीय संघ में खराब मौसम का सीधा असर चीनी चुकंदर की फसल पर पड़ सकता है. ज्यादा गर्मी और मौसम में बदलाव के कारण पैदावार उम्मीद से कम रहने की आशंका जताई जा रही है. यूरोप चीनी के बड़े उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है. ऐसे में अगर वहां उत्पादन घटता है तो वैश्विक बाजार में चीनी की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है. इसी चिंता के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ा है.

अल नीनो भी बन रहा बड़ी वजह

एशिया के प्रमुख चीनी उत्पादक देशों में अल नीनो के संभावित असर को लेकर भी बाजार में चिंता है. अल नीनो के कारण मौसम का मिजाज बदल सकता है, जिसका असर गन्ने समेत कई फसलों के उत्पादन पर पड़ सकता है. जब उत्पादन को लेकर अनिश्चितता बढ़ती है तो बाजार में कीमतों के बढ़ने का दबाव भी बढ़ जाता है. यही वजह है कि अगस्त में चीनी की कीमतों में इतनी बड़ी मासिक तेजी देखने को मिली.

भारत और ब्राजील के फैसले का भी असर

FAO ने चीनी की कीमतों में तेजी के पीछे भारत और ब्राजील की स्थिति को भी अहम बताया है. ब्राजील में चीनी का उत्पादन कम रहने की खबरों ने वैश्विक सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ाई. वहीं भारत ने कच्ची चीनी के ड्यूटी फ्री आयात की घोषणा की है. इस फैसले का मकसद घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता को बनाए रखने से जुड़ा है, लेकिन इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों पर भी पड़ा है.

इन चीजों के भी बढ़े दाम

अगस्त में सिर्फ चीनी ही नहीं, बल्कि कई दूसरी खाने-पीने की चीजों के दाम भी बढ़े. खाद्य और कृषि संगठन के मुताबिक, अगस्त में खाने-पीने की चीजों की कीमतों का आंकड़ा 133.3 अंक पर पहुंच गया. यह जुलाई के मुकाबले 1.9 फीसदी और पिछले साल के मुकाबले 2.5 फीसदी ज्यादा रहा. अगस्त में अनाज के दाम 2.2 फीसदी, दूध से बनी चीजों के दाम 2.3 फीसदी, खाने के तेल के दाम 1.1 फीसदी और मांस के दाम 1 फीसदी बढ़े. गेहूं के दाम भी अगस्त में 2.6 फीसदी बढ़ गए. पिछले साल के मुकाबले गेहूं करीब 15 फीसदी महंगा रहा. इसके पीछे काला सागर इलाके से सामान भेजने में आई दिक्कत, यूरोप में ज्यादा गर्मी और सूखे से फसल खराब होने की चिंता और अमेरिकी डॉलर के कमजोर होने जैसी वजहें बताई गई हैं.

वैश्विक खाद्य सप्लाई पर बढ़ रहा दबाव

FAO ने कहा है कि ज्यादा तापमान, खराब मौसम, भू-राजनीतिक तनाव और अहम व्यापार मार्गों में रुकावट से दुनियाभर में खाद्य सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ रही है. FAO के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो के मुताबिक, जलवायु संकट, भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार में रुकावट एक साथ मिलकर खाद्य बाजार पर दबाव बढ़ा रहे हैं. FAO ने 2026 में वैश्विक अनाज उत्पादन करीब 2,980 मिलियन टन रहने का अनुमान लगाया है. यह 2025 के मुकाबले करीब 2 फीसदी कम है, हालांकि फिर भी इसे अब तक की दूसरी सबसे बड़ी फसल माना जा रहा है.

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