Food Inflation: महंगाई का असर अब सिर्फ रसोई के कुल खर्च पर नहीं दिख रहा, बल्कि रोज की थाली में मिलने वाले पोषण पर भी पड़ रहा है. दाल, पनीर, अंडे, चिकन और मछली जैसे प्रोटीन के जरूरी सोर्स पिछले एक साल में महंगे हुए हैं. ऐसे में सीमित बजट में परिवारों के लिए रोजाना संतुलित और पौष्टिक खाना जुटाना पहले के मुकाबले मुश्किल हो रहा है.
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और क्रिसिल के थाली सूचकांक के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक साल में शाकाहारी थाली की लागत करीब 6 से 8 प्रतिशत और मांसाहारी थाली की लागत 7 से 9 प्रतिशत तक बढ़ी है. इसका मतलब है कि शाकाहारी हो या मांसाहारी, दोनों तरह के भोजन में प्रोटीन जुटाने का खर्च बढ़ा है.
दाल से चिकन तक, कितना बढ़ा दाम?
प्रोटीन वाली चीजों की कीमत में बढ़ोतरी हर खाद्य पदार्थ में अलग-अलग रही है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दाल और अरहर की कीमत करीब 7.8 प्रतिशत बढ़ी है. पनीर और दूसरे डेयरी उत्पाद लगभग 4.5 प्रतिशत महंगे हुए हैं. सोयाबीन और टोफू की कीमत में करीब 3.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. मांसाहारी खाद्य पदार्थों में चिकन ब्रेस्ट करीब 8.1 प्रतिशत महंगा हुआ है. अंडों की कीमत में लगभग 6.2 प्रतिशत और स्थानीय मछली की कीमत में करीब 5.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी बताई गई है.
प्रोटीन के लिहाज से देखें तो दो अंडों से करीब 13 ग्राम, पनीर और डेयरी से करीब 18 ग्राम, चिकन ब्रेस्ट से करीब 22 ग्राम प्रोटीन मिल सकता है. इसलिए इन चीजों के महंगे होने का सीधा असर परिवार के पोषण बजट पर पड़ सकता है.
| प्रोटीन सोर्स | एक साल में अनुमानित कीमत बढ़ोतरी | प्रोटीन कंटेंट |
|---|---|---|
| दाल | 7.8 फीसदी | 9 ग्राम |
| पनीर | 4.5 फीसदी | 18 ग्राम |
| सोयाबीन/टोफू | 3.2 फीसदी | 17 ग्राम |
| चिकन ब्रेस्ट | 8.1 फीसदी | 22 ग्राम |
| अंडे | 6.2 फीसदी | 13 ग्राम |
| मछली | 5.4 फीसदी | 18 ग्राम |
वेज थाली में दाल सबसे अहम
भारतीय घरों में दाल प्रोटीन का सबसे आम सोर्स मानी जाती है. इसकी कीमत बढ़ने का असर सीधे रोज के खाने पर पड़ता है. दाल के साथ सब्जियां, तेल, मसाले और दूसरी जरूरी चीजों के दाम में उतार-चढ़ाव होने से पूरी थाली का खर्च बढ़ जाता है. ऐसे में परिवारों को महीने के सीमित बजट में दाल, दूध, सब्जी और दूसरी जरूरी चीजों के बीच बैलेंस बनाना पड़ता है. कई परिवार ऐसी स्थिति में दाल की मात्रा कम करने या सस्ते विकल्प तलाशने के बारे में सोच सकते हैं.
अंडे और चिकन ने बढ़ाई नॉन-वेज थाली की लागत
मांसाहारी भोजन करने वाले परिवारों के लिए अंडे और चिकन प्रोटीन के लोकप्रिय सोर्स हैं. लेकिन इनकी बढ़ती कीमत ने नॉन-वेज थाली का खर्च भी बढ़ा दिया है. चिकन की कीमत में बढ़ोतरी के पीछे मुर्गियों के दाने की बढ़ती लागत भी एक कारण मानी जा रही है. अंडों को लेकर हाल की बाजार रिपोर्टों में इससे भी तेज बढ़ोतरी सामने आई है. कुछ रिपोर्टों में 2026 के दौरान अंडों की कीमत पिछले साल की तुलना में करीब 35 से 40 प्रतिशत तक बढ़ने की बात कही गई है. इसके पीछे पोल्ट्री दाने में इस्तेमाल होने वाले मक्के की बढ़ती कीमत को प्रमुख वजह बताया गया है.
खाद्य महंगाई का भी बढ़ रहा दबाव
जुलाई 2026 में देश की खुदरा महंगाई 4.45 प्रतिशत तक पहुंच गई थी, जबकि खाद्य महंगाई 5.52 प्रतिशत रही. लहसुन, अदरक और प्याज जैसी चीजों की कीमतों ने खाद्य महंगाई को बढ़ाने में भूमिका निभाई. सरकार भी जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर लगातार नजर रख रही है. इसके लिए देशभर के 555 बाजार केंद्रों से 22 जरूरी खाद्य पदार्थों के दाम जुटाए जाते हैं. इनमें चना, अरहर, उड़द, मूंग, मसूर, दूध, प्याज और टमाटर जैसी चीजें शामिल हैं.
बढ़ती कीमतों का असर सिर्फ जेब पर नहीं
प्रोटीन शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व है. ऐसे में जब दाल, दूध, अंडे, पनीर या चिकन जैसी चीजें लगातार महंगी होती हैं, तो इसका असर सिर्फ परिवार के महीने के बजट पर नहीं पड़ता. सीमित आय वाले परिवारों के सामने पौष्टिक भोजन और खर्च के बीच संतुलन बनाने की चुनौती भी बढ़ जाती है. हालांकि, अलग-अलग बाजारों और समय के हिसाब से कीमतों में अंतर हो सकता है. फिर भी तस्वीर साफ है कि प्रोटीन वाले कई खाद्य पदार्थ महंगे होने से आम परिवार की थाली का खर्च बढ़ रहा है.