अब 15 नहीं 25 किमी दूर होंगी चीनी मिलें, गन्ना किसानों- मिलों के लिए सरकार का नया प्लान, जानें क्या होगा फायदा?

सरकार ने सिर्फ नई मिलों के लिए ही नहीं, बल्कि पहले से चल रही मिलों के विस्तार पर भी नियम बनाने का विचार कर रही है. अगर कोई मिल अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाना चाहती है, तो इसका फैसला राज्य सरकार करेगी. इसके लिए गन्ने की उपलब्धता, खेती का क्षेत्र, औसत उत्पादन, मिल के चलने के दिन और आसपास की मिलों पर पड़ने वाले असर को ध्यान में रखा जाएगा.

नई दिल्ली | Updated On: 22 Apr, 2026 | 09:25 AM

India sugar mill distance rule: देश में चीनी उद्योग एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है. बदलती खानपान की आदतें, चीनी की मांग में ठहराव और गन्ने की सीमित उपलब्धता ने सरकार को नए नियमों पर सोचने के लिए मजबूर किया है. इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने चीनी मिलों से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा है, ताकि उद्योग में संतुलन बना रहे और किसानों व मिलों दोनों को फायदा मिल सके.

नई चीनी मिलों के बीच दूरी बढ़ाने की तैयारी

बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, सरकार ने प्रस्ताव दिया है कि अब नई चीनी मिल लगाने के लिए न्यूनतम दूरी 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 25 किलोमीटर कर दी जाए. यानी कोई भी नई मिल अब पहले से मौजूद मिल के 25 किलोमीटर के दायरे में नहीं लग सकेगी. इसका मकसद यह है कि एक ही इलाके में बहुत ज्यादा मिलें न खुलें, जिससे गन्ने की कमी और मिलों के बीच अनावश्यक प्रतिस्पर्धा न बढ़े. अगर किसी खास इलाके में जरूरत हो, तो राज्य सरकार केंद्र की मंजूरी लेकर इस दूरी को 25 किलोमीटर से ज्यादा भी तय कर सकती है.

लोगों से मांगे गए सुझाव

सरकार ने इस प्रस्ताव को लागू करने से पहले इसका मसौदा जारी किया है और इस पर 20 मई 2026 तक लोगों और उद्योग से जुड़े पक्षों से सुझाव मांगे हैं. इससे साफ है कि सरकार इस फैसले को जल्दबाजी में नहीं, बल्कि सभी की राय लेकर लागू करना चाहती है.

पुरानी मिलों के विस्तार पर भी नजर

सरकार ने सिर्फ नई मिलों के लिए ही नहीं, बल्कि पहले से चल रही मिलों के विस्तार पर भी नियम बनाने का विचार कर रही है. अगर कोई मिल अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाना चाहती है, तो इसका फैसला राज्य सरकार करेगी. इसके लिए गन्ने की उपलब्धता, खेती का क्षेत्र, औसत उत्पादन, मिल के चलने के दिन और आसपास की मिलों पर पड़ने वाले असर को ध्यान में रखा जाएगा. इससे यह सुनिश्चित होगा कि एक मिल के विस्तार से दूसरी मिलों को नुकसान न हो.

चीनी की खपत में ठहराव

भारत में चीनी की खपत अब पहले जैसी तेजी से नहीं बढ़ रही है. 2025-26 के सीजन में करीब 280 लाख टन चीनी की खपत का अनुमान है. इस सीजन के पहले छह महीनों में लगभग 141 लाख टन चीनी की बिक्री हो चुकी है और बाकी छह महीनों में भी लगभग इतनी ही खपत होने की उम्मीद है.

पिछले 2024-25 सीजन में कुल खपत करीब 281 लाख टन रही थी, जबकि सरकार ने 275.5 लाख टन चीनी की आपूर्ति तय की थी. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार खपत घटकर करीब 277 लाख टन तक रह सकती है.

बदलती आदतों का असर

चीनी की खपत में ठहराव का एक बड़ा कारण लोगों में बढ़ती स्वास्थ्य जागरूकता है. लोग अब मीठा कम खाने लगे हैं और कई लोग चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं. इस बदलाव का असर सीधे चीनी की मांग पर पड़ रहा है.

खांडसारी इकाइयों पर भी सख्ती

सरकार ने पिछले साल खांडसारी इकाइयों को भी नियमों के दायरे में लाने का फैसला किया था. 500 टन प्रतिदिन से ज्यादा क्षमता वाली इन इकाइयों को अब हर महीने अपनी जानकारी देनी होगी. साथ ही, उन्हें किसानों को वही कीमत देनी होगी जो चीनी मिलें देती हैं और तय क्षेत्र से ही गन्ना खरीदना होगा.

देश में इस समय 370 से ज्यादा खांडसारी इकाइयां हैं, जिनकी कुल क्षमता करीब 95 हजार टन प्रतिदिन है. इनमें से करीब 66 इकाइयां बड़ी श्रेणी में आती हैं.

किसानों और उद्योग दोनों को होगा फायदा

सरकार का मानना है कि इन बदलावों से गन्ने की उपलब्धता बेहतर तरीके से बंटेगी और किसानों को समय पर उचित कीमत मिल सकेगी. साथ ही, मिलों के बीच प्रतिस्पर्धा संतुलित रहेगी और उद्योग में स्थिरता आएगी.

Published: 22 Apr, 2026 | 08:16 AM

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