LPG की कमी और ठंडे मौसम ने घटाई चीनी की मिठास, अप्रैल में खपत 2 लाख टन तक कम होने का अनुमान

मतौर पर मार्च-अप्रैल के महीनों में गर्मी बढ़ने के साथ ही ठंडे पेय पदार्थों, मिठाइयों और अन्य चीजों की मांग बढ़ती है, जिससे चीनी की खपत भी ज्यादा होती है. लेकिन इस बार मौसम सामान्य से ठंडा बना हुआ है, जिससे खपत पर असर पड़ा है. इसके साथ ही LPG की कमी ने भी इस स्थिति को और प्रभावित किया है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 8 Apr, 2026 | 07:31 AM

India sugar demand: देश में इस समय मौसम और वैश्विक हालात का असर सिर्फ लोगों की दिनचर्या पर ही नहीं, बल्कि खाने-पीने की चीजों की खपत पर भी साफ दिखाई दे रहा है. खासकर चीनी (शुगर) की मांग में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. उद्योग से जुड़े आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल महीने में चीनी की खपत में करीब 2 लाख टन तक की कमी आ सकती है. इसके पीछे ठंडा मौसम और LPG सिलेंडर की कमी को मुख्य वजह माना जा रहा है.

मौसम और LPG संकट का असर

बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, आमतौर पर मार्च-अप्रैल के महीनों में गर्मी बढ़ने के साथ ही ठंडे पेय पदार्थों, मिठाइयों और अन्य चीजों की मांग बढ़ती है, जिससे चीनी की खपत भी ज्यादा होती है. लेकिन इस बार मौसम सामान्य से ठंडा बना हुआ है, जिससे खपत पर असर पड़ा है. इसके साथ ही LPG की कमी ने भी इस स्थिति को और प्रभावित किया है. कई जगहों पर गैस की उपलब्धता कम होने से लोग खाना बनाने और मिठाइयों के उत्पादन में कटौती कर रहे हैं, जिससे चीनी की मांग घट रही है.

फरवरी तक बढ़ी थी खपत, मार्च में आई गिरावट

दिलचस्प बात यह है कि चालू सीजन (2025-26) में अक्टूबर से फरवरी तक चीनी की खपत तय कोटे से करीब 60,000 टन ज्यादा रही थी. लेकिन मार्च आते-आते स्थिति बदल गई और खपत में करीब 2 लाख टन की गिरावट दर्ज की गई. विशेषज्ञों का मानना है कि यही ट्रेंड अप्रैल में भी जारी रह सकता है, जिससे कुल खपत के आंकड़े पर असर पड़ेगा.

पूरे सीजन की खपत में कमी की संभावना

इंडियन शुगर एंड बायोएनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के अनुसार, पूरे 2025-26 सीजन में चीनी की खपत घटकर करीब 277 लाख टन रह सकती है, जबकि पिछले साल यह 281 लाख टन थी. यानी कुल मिलाकर इस साल खपत में साफ गिरावट देखने को मिल सकती है, जो उद्योग के लिए चिंता का विषय है.

उत्पादन भी थोड़ा कम रहने का अनुमान

इस सीजन में चीनी का कुल उत्पादन भी पहले के अनुमान से थोड़ा कम रहने की संभावना है. अनुमान है कि कुल उत्पादन करीब 320 लाख टन रहेगा, जो पहले के 324 लाख टन के अनुमान से कम है. हालांकि इसमें से करीब 34-35 लाख टन चीनी को एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. इसके बाद शुद्ध चीनी उत्पादन करीब 285-286 लाख टन के आसपास रह सकता है.

सरकार का अनुमान और रणनीति

सरकार के अनुसार इस सीजन में कुल उत्पादन 320 से 325 लाख टन के बीच रह सकता है. एथेनॉल के लिए करीब 35 लाख टन चीनी का उपयोग किया जाएगा, जिससे बाजार में उपलब्ध शुद्ध चीनी की मात्रा सीमित हो सकती है. हालांकि सरकार ने फिलहाल चीनी निर्यात पर रोक लगाने का कोई फैसला नहीं लिया है. पहले 15 लाख टन से ज्यादा चीनी निर्यात की मंजूरी दी गई थी, लेकिन वैश्विक हालात के चलते पूरा निर्यात हो पाना मुश्किल माना जा रहा है.

एथेनॉल नीति और भविष्य की योजना

भारत ने पहले ही पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E20) का लक्ष्य हासिल कर लिया है. अब सरकार इस नीति को और आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है. देश में एथेनॉल उत्पादन की क्षमता लगभग 2000 करोड़ लीटर प्रति वर्ष तक पहुंच चुकी है, जो मौजूदा जरूरत से ज्यादा है. ऐसे में सरकार यह सोच रही है कि इस अतिरिक्त क्षमता का कैसे उपयोग किया जाए—क्या एथेनॉल मिश्रण बढ़ाया जाए या फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा दिया जाए.

एथेनॉल चूल्हों पर भी विचार

सरकार एथेनॉल आधारित चूल्हों को बढ़ावा देने पर भी विचार कर रही है, जिससे LPG पर निर्भरता कम की जा सके. हालांकि इसके लिए कुछ नियमों में बदलाव की जरूरत होगी, जिस पर काम चल रहा है. अगर यह योजना लागू होती है, तो खासकर उन इलाकों में जहां एथेनॉल प्लांट हैं, वहां लोगों को एक नया और सस्ता विकल्प मिल सकता है.

गेहूं फसल पर भी नजर

इसी बीच गेहूं की फसल को लेकर भी सरकार सतर्क है. हरियाणा और राजस्थान में बेमौसम बारिश के कारण फसल को नुकसान की आशंका जताई गई है. सरकार ने इन राज्यों में टीम भेजकर स्थिति का आकलन शुरू कर दिया है और जरूरत पड़ने पर किसानों को राहत देने के लिए गुणवत्ता मानकों में छूट देने पर भी विचार किया जा रहा है.

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