India-UK Trade Deal: ब्रिटेन रवाना होगी 2000 किलो ताजी मछली, अब निर्यातकों की बढ़ेगी कमाई
भारत-यूके CETA लागू होने के बाद भारत से ब्रिटेन ताजा मछलियों की पहली खेप भेजी जाएगी. इस समझौते से 99 फीसदी समुद्री उत्पादों को ब्रिटेन में ड्यूटी-फ्री पहुंच मिलेगी. इससे झींगा, मछली और अन्य सीफूड के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही मछुआरों और समुद्री उद्योग के लिए नए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे.
भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) लागू होने के बाद भारत से समुद्री उत्पादों का निर्यात बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. इसी के तहत समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA) तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से ताजी ठंडी मछलियों (फ्रेश चिल्ड फिश) की पहली खेप ब्रिटेन के लिए रवाना करेगा. अधिकारियों के मुताबिक, इस खेप में करीब 2,000 किलोग्राम मछली शामिल होगी. इसका निर्यात ग्लैडसन एक्सपोर्टर्स और जूड फूड्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की ओर से किया जाएगा.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, एमपीईडीए (MPEDA) के अधिकारियों ने कहा कि भारत-यूके CETA समझौता भारत के समुद्री उत्पाद निर्यात क्षेत्र के लिए बड़ा अवसर है. इस समझौते से ब्रिटेन में भारतीय समुद्री उत्पादों की पहुंच और बढ़ने की उम्मीद है. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने ब्रिटेन को 18,898 टन समुद्री उत्पाद निर्यात किए, जिनकी कुल कीमत 12.82 करोड़ अमेरिकी डॉलर (करीब 1,103 करोड़ रुपये) रही.
फ्रोजन मछली का निर्यात
अधिकारियों के अनुसार, ब्रिटेन भारतीय समुद्री उत्पादों का एक बड़ा बाजार है. वहां बड़ी संख्या में भारतीय लोग रहते हैं. इसके चलते झींगा, मछली और स्क्विड जैसे प्रोसेस्ड सीफूड की मांग भी तेजी से बढ़ रही है. इससे भारत से इन उत्पादों के निर्यात को लगातार बढ़ावा मिल रहा है। निर्यात में सबसे बड़ा हिस्सा फ्रोजन श्रिम्प (जमे हुए झींगे) का रहा. इसकी हिस्सेदारी करीब 81 प्रतिशत रही और इसका निर्यात मूल्य 10.37 करोड़ डॉलर (करीब 892 करोड़) रहा. इसके बाद फ्रोजन मछली का स्थान रहा, जिसकी हिस्सेदारी 5.5 प्रतिशत और निर्यात मूल्य 71.2 लाख डॉलर (61 करोड़ रुपये) दर्ज किया गया.
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समुद्री उत्पादों के निर्यात को बड़ा फायदा मिलेगा
भारत-यूके CETA लागू होने से भारतीय समुद्री उत्पादों के निर्यात को बड़ा फायदा मिलेगा. इस समझौते के तहत 99 प्रतिशत उत्पादों पर ब्रिटेन में आयात शुल्क (ड्यूटी) नहीं लगेगा, जिससे भारतीय निर्यातकों की लागत कम होगी और उनके उत्पाद ब्रिटेन के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे. इसका सबसे ज्यादा लाभ वानामी झींगा, ब्लैक टाइगर झींगा, फ्रोजन स्क्विड, लॉबस्टर और फ्रोजन पाम्फ्रेट जैसे समुद्री उत्पादों को मिलेगा. अब ये उत्पाद बिना किसी आयात शुल्क के ब्रिटेन भेजे जा सकेंगे.
समुद्री उत्पादों पर आयात शुल्क खत्म
अधिकारियों के मुताबिक, पहले इन समुद्री उत्पादों पर 4.2 प्रतिशत से 21.5 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगता था. अब यह शुल्क खत्म होने से भारतीय समुद्री उत्पादों का निर्यात बढ़ने, नए बाजार मिलने और पूरे सीफूड कारोबार को फायदा होने की उम्मीद है. भारत-यूके CETA से भारतीय समुद्री उत्पाद उद्योग को कई नए अवसर मिलने की उम्मीद है. इस समझौते से भारतीय समुद्री उत्पादों की वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और निर्यात को मजबूती मिलेगी. इसके साथ ही वैल्यू-एडेड (प्रोसेस्ड) समुद्री उत्पादों में निवेश बढ़ने, उद्योग से जुड़े लोगों के कौशल विकास को बढ़ावा मिलने और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले मछुआरों व मत्स्य उद्योग से जुड़े लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है.