अब अमेरिकी बाजार में चमकेगा भारतीय कृषि सेक्टर, सरकार बोली- किसानों को होगा सीधा फायदा

India US trade deal 2026: इस समझौते के तहत भारतीय किसानों को अपने उत्पाद अमेरिका में निर्यात करने के बेहतर मौके मिलेंगे. खास तौर पर समुद्री उत्पाद, बासमती चावल, मसाले, चाय, कॉफी, तिलहन और कई तरह के फलों के निर्यात में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है.

नई दिल्ली | Published: 25 Mar, 2026 | 08:50 AM

India US trade deal 2026: अमेरिका के साथ हुए नए व्यापार समझौते को लेकर सरकार का मानना है कि इससे देश के किसानों को सीधा फायदा मिलेगा. अब भारतीय किसान अपने उत्पादों को दुनिया के सबसे बड़े और मजबूत बाजारों में से एक अमेरिका तक आसानी से पहुंचा सकेंगे. इससे न केवल उनके उत्पादों की मांग बढ़ेगी, बल्कि उन्हें बेहतर कीमत मिलने की भी संभावना है.

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि यह समझौता खास तौर पर किसानों और मछुआरों के लिए फायदेमंद साबित होगा. इससे भारत के कृषि और समुद्री उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी.

किसानों के लिए खुले नए अवसर

इस समझौते के तहत भारतीय किसानों को अपने उत्पाद अमेरिका में निर्यात करने के बेहतर मौके मिलेंगे. खास तौर पर समुद्री उत्पाद, बासमती चावल, मसाले, चाय, कॉफी, तिलहन और कई तरह के फलों के निर्यात में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है.

इन उत्पादों की विदेशों में पहले से ही अच्छी मांग है, लेकिन अब टैरिफ में छूट और आसान व्यापार नियमों के कारण इनकी बिक्री और तेज हो सकती है. इससे किसानों को अपनी फसल का सही दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी और उनकी आय में सुधार हो सकता है.

14 लाख करोड़ रुपये के बड़े बाजार तक पहुंच

इस व्यापार समझौते का सबसे बड़ा फायदा यह है कि भारतीय कृषि उत्पादों को अमेरिका के करीब 14 लाख करोड़ रुपये के विशाल आयात बाजार तक पहुंच मिलेगी. यह बाजार दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक है, जहां उच्च गुणवत्ता वाले कृषि उत्पादों की लगातार मांग रहती है. ऐसे में भारत के किसानों के लिए यह एक सुनहरा अवसर साबित हो सकता है. सरकार का मानना है कि टैरिफ में दी गई रियायतों से भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती से अपनी जगह बना पाएंगे.

प्रोसेस्ड फूड सेक्टर को भी मिलेगा फायदा

इस समझौते का असर सिर्फ कच्चे कृषि उत्पादों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रोसेस्ड फूड इंडस्ट्री को भी इसका बड़ा लाभ मिलेगा. जूस, पल्प, जैम, नारियल उत्पाद, बीज, सब्जियां और अन्य कृषि आधारित वस्तुओं के निर्यात में भी तेजी आने की उम्मीद है. इससे फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. इसके साथ ही एग्री-फॉरेस्ट्री सेक्टर को भी मजबूती मिलेगी, जिससे किसानों की आय के नए स्रोत खुल सकते हैं.

किसानों के हितों की पूरी सुरक्षा

सरकार ने इस समझौते में किसानों के हितों का खास ध्यान रखा है. कुछ महत्वपूर्ण फसलों जैसे चावल, गेहूं, डेयरी उत्पाद, मक्का और शहद पर कोई टैरिफ छूट नहीं दी गई है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी उत्पादों से देश के किसानों को नुकसान न हो और घरेलू बाजार सुरक्षित बना रहे. यानी सरकार ने संतुलन बनाते हुए यह कदम उठाया है, जिससे किसानों को फायदा तो मिले, लेकिन किसी तरह का जोखिम न हो.

सीमित आयात से बाजार संतुलन

मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में कहा कि कुछ उत्पाद जैसे सेब, अखरोट और सोयाबीन तेल, जिनकी देश में मांग ज्यादा है, उनके लिए सीमित और कोटा आधारित आयात की अनुमति दी गई है. इससे जहां एक ओर बाजार में कमी पूरी होगी, वहीं दूसरी ओर घरेलू किसानों पर दबाव नहीं पड़ेगा. इसी तरह पशु आहार से जुड़े उत्पादों और कपास के मामले में भी संतुलित नीति अपनाई गई है, ताकि किसानों के हित सुरक्षित रहें.

किसानों को मिल रहा आर्थिक और डिजिटल समर्थन

सरकार किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए भी लगातार काम कर रही है. वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान करीब 17 करोड़ किसानों को 25.49 लाख करोड़ रुपये का संस्थागत कर्ज दिया गया है. इसमें से 13 करोड़ छोटे और सीमांत किसानों को 14.40 लाख करोड़ रुपये का कर्ज मिला है.

इसके अलावा ‘फार्मर आईडी’ के जरिए किसानों को डिजिटल पहचान दी जा रही है. अब तक 9.20 करोड़ से ज्यादा किसानों की आईडी बनाई जा चुकी है, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके.

उत्पादन में भी लगातार बढ़ोतरी

भारत में कृषि और पशुपालन दोनों क्षेत्रों में उत्पादन लगातार बढ़ रहा है. देश में दूध उत्पादन 2022-23 के 230.58 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 247.87 मिलियन टन हो गया है. वहीं खाद्यान्न उत्पादन भी बढ़कर 2021-22 के 3156 लाख टन से 2024-25 में 3577 लाख टन तक पहुंच गया है. यह आंकड़े बताते हैं कि देश का कृषि क्षेत्र लगातार मजबूत हो रहा है और नए अवसरों के लिए तैयार है.

ऐसे में भारत-अमेरिका व्यापार समझौता किसानों के लिए एक बड़ा अवसर लेकर आया है. इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा, बल्कि किसानों की आमदनी और कृषि क्षेत्र की मजबूती भी बढ़ेगी.

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