Iran- Israel War: ईरान-इजरायल युद्ध के चलते केवल भारत में ही नहीं कृषि उत्पादों का निर्यात प्रभावित हुआ है, बल्कि गल्फ देशों पर भी इसका असर पड़ा है. भारत से खाद्य सामाग्री की सप्लाई में कमी आने के चलते कई देशों में महंंगाई बढ़ गई है. खासकर संयुक्त अरब अमीरात में खाद्य महंगाई कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है. यहां 27 फरवरी से समुद्री और हवाई मार्ग प्रभावित हैं. ऐसे में सब्जियों और फलों की कीमतें दोगुनी हो गई हैं. जबकि चावल जैसी अनाज की स्टॉक घट रही है. शारजाह की कुछ दुकानों में सब्जियों की भारी किल्लत हो गई है. वहीं, दुबई में टमाटर और प्याज पहले 1 AED (अरब अमीरात दिरहम) थे, अब 6 और 5 AED हो गए हैं. किराना दुकानों पर भी सामान महंगा मिल रहा है.
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के पास प्रीमियम चावल का केवल 15 दिनों का स्टॉक बचा है, जबकि साधारण चावल लगभग 45 दिन तक चल सकता है. देश में जल्दी ही आलू की कमी भी हो सकती है. दुबई के फ्रूट इम्पोर्टर सीईवी मुहम्मद सिराज ने बिजनेसलाइन से कहा कि संकट के चलते गल्फ मार्केट में भारत से आने वाले कई उत्पादों की कमी महसूस हो रही है. उन्होंने कहा कि ट्रेडर्स फिलहाल श्रीलंका, वियतनाम और थाईलैंड से शिपमेंट के जरिए आपूर्ति संभाल रहे हैं. लेकिन बढ़ती फ्रेट लागत के कारण कई खरीदार खरीदारी को टाल रहे हैं. रामजान के मौसम में अनानास और अन्य फलों की मांग अधिक है, लेकिन सीमित उपलब्धता के कारण उपभोक्ताओं को इससे निपटना पड़ रहा है.
फ्रेट चार्ज में तीन गुना बढ़ोतरी
केरल एक्सपोर्टर्स फोरम के महासचिव मुंशीद अली ने कहा कि उनके फर्म को त्योहारों की मांग पूरी करने के लिए तमिलनाडु से 2,000 किग्रा अनानास और 27 टन नारियल की शिपमेंट ऑर्डर मिली थी. लेकिन बढ़ते फ्रेट चार्ज की वजह से शिपमेंट असंभव हो गया. केरल एयरपोर्ट से अनानास का एयर फ्रेट 70- 80 रुपए प्रति किग्रा से बढ़कर लगभग 210 रुपए हो गया, जिससे खरीदारों ने ऑर्डर कैंसिल कर दिए. नारियल के लिए कंटेनर फ्रेट लगभग 3,800 डॉलर तक पहुंच गया. अली ने कहा कि कुछ माल को शारजाह के ईस्ट कोस्ट पर खोर फक्कन पोर्ट के जरिए भेजा जा रहा है, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से बाहर है.
सड़क मार्ग से हो रही सप्लाई
चेन्नई के रहने वाले अली ने कहा कि यूएई के शासकों ने खाद्य सुरक्षा की गारंटी दी है और एयरमार्ग से आयात बढ़ाने की योजना है. सऊदी अरब और ओमान में भी रेड सी और ओमान पोर्ट का इस्तेमाल किए बिना सड़क मार्ग से गल्फ कोऑपरेटिव काउंसिल के लिए सप्लाई की जा रही है. यूएई अपनी नजदीकी के कारण ओमान की मदद ले रहा है और सड़क मार्ग से चीजें मैनेज की जा रही हैं. मुंशीद अली ने कहा कि शिपमेंट रुकने से केरल से 150 टन से अधिक नाशवान निर्यात रुका हुआ है. एयर और सी मार्ग दोनों प्रभावित हैं, जिससे निर्यात बाधित हो गया है. हालांकि कुछ जरूरी सामान लुलु ग्रुप जैसी कंपनियों द्वारा एयरमार्ग से भेजा जा रहा है, लेकिन पूरी लॉजिस्टिक श्रृंखला गंभीर रूप से बाधित है, जिससे पश्चिम एशिया में उपभोक्ताओं पर असर पड़ रहा है.
अंडों का निर्यात भी रुक गया
बता दें कि ईरान युद्ध के चलते भारत से अंडा , केला और आम निर्यात भी प्रभावित हुआ है. कल ही आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा था कि मौजूदा युद्ध की स्थिति का असर कृषि निर्यात पर पड़ रहा है, जिससे किसानों और उत्पादकों को परेशानी हो रही है. उन्होंने गन्नावरम विधानसभा क्षेत्र के सूरमपल्ली में आयोजित PM किसान- अन्नदाता सुखीभाव कार्यक्रम में किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि रायलसीमा से दुबई और खाड़ी देशों को भेजे जाने वाले केले के निर्यात में दिक्कत आ रही है. साथ ही अंडों का निर्यात भी रुक गया है, जिससे कीमतें गिरने की आशंका है. उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध के कारण गैस सप्लाई की समस्या भी पैदा हो गई है. इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने एक मंत्रियों की समिति बनाई है, जो इन चुनौतियों पर काम करेगी.