Food Stores: अल नीनो के संभावित असर के बीच सरकार और आम जानता के लिए राहत की खबर है. भारत के केंद्रीय पूल में खाद्यान्न का भंडार 1 जून तक बढ़कर रिकॉर्ड 12.2 करोड़ टन पर पहुंच गया है. यह भंडार देश की सालभर की अनाज खपत के लगभग बराबर है. रिकॉर्ड स्तर का यह स्टॉक सरकार को खाद्य सुरक्षा बनाए रखने के साथ-साथ 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त अनाज उपलब्ध कराने वाली योजनाओं को बिना किसी बाधा के जारी रखने में मदद करेगा.
दरअसल, मुफ्त राशन योजना के तहत 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को हर साल करीब 5.6 करोड़ टन अनाज की जरूरत होती है. मौजूदा खाद्यान्न भंडार इतना बड़ा है कि इससे इस योजना को लगभग दो साल तक बिना किसी परेशानी के चलाया जा सकता है. भारतीय खाद्य निगम (FCI) के आंकड़ों के मुताबिक, केंद्रीय पूल में मौजूद 12.26 करोड़ टन खाद्यान्न में 6.83 करोड़ टन चावल, 5.34 करोड़ टन गेहूं और 9 लाख टन मोटे अनाज शामिल हैं. चावल के भंडार में धान की वह मात्रा भी शामिल है जिसे चावल के बराबर माना गया है.
वर्ष 2025-26 में कुल 5.61 करोड़ टन खाद्यान्न का वितरण
वहीं, सरकारी योजनाओं के तहत वर्ष 2025-26 में कुल 5.61 करोड़ टन खाद्यान्न का वितरण किया गया. यह अनाज राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), पीएम पोषण योजना, आंगनवाड़ी और ICDS, सेना व अर्धसैनिक बलों, आपदा राहत कार्यक्रमों, त्योहारों के विशेष आवंटन और किशोरियों के लिए चलाई जा रही योजनाओं के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया गया. इस कुल वितरण में 1.799 करोड़ टन गेहूं और 3.81 करोड़ टन चावल शामिल रहा.
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खाद्यान्न भंडार और वितरण के प्रमुख आंकड़े
| विवरण | मात्रा |
|---|---|
| मुफ्त राशन योजना के लाभार्थी | 80 करोड़ से अधिक लोग |
| सालाना खाद्यान्न आवश्यकता | 5.6 करोड़ टन |
| केंद्रीय पूल में कुल खाद्यान्न भंडार | 12.26 करोड़ टन |
| कुल चावल भंडार | 6.83 करोड़ टन |
| कुल गेहूं भंडार | 5.34 करोड़ टन |
| मोटे अनाज का भंडार | 9 लाख टन |
| मौजूदा भंडार से योजना चलाने की क्षमता | करीब 2 वर्ष |
खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंता नहीं
केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने ‘बिजनेसलाइन’ से कहा है कि सेंट्रल पूल में खाद्यान्न का भंडार जरूरत से अधिक है, इसलिए देश में खाद्य सुरक्षा को लेकर किसी तरह की चिंता नहीं है. उन्होंने कहा कि भले ही मॉनसून सामान्य से कम रहे, लेकिन बुनियादी खाद्य उपलब्धता पर कोई असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर सरकार ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के तहत अनाज को बाजार में उतार सकती है. इसके जरिए राज्यों और बड़े उपभोक्ताओं को थोक में अनाज उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि कीमतों पर नियंत्रण रखा जा सके.
कमजोर मॉनसून के अनुमान (लगभग 90 फीसदी लॉन्ग पीरियड एवरेज) के बावजूद सरकार ने 2026-27 में खरीफ खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य 1761.6 लाख टन रखा है. यह 2025-26 के वास्तविक उत्पादन 1760.4 लाख टन के लगभग बराबर है. सरकार ने 2026-27 के लिए खरीफ खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य तय किया है. इसके तहत 1231.5 लाख टन चावल, 84 लाख टन दलहन, 289.2 लाख टन तिलहन, 135.6 लाख टन न्यूट्री अनाज और 310.4 लाख टन मक्का उत्पादन का अनुमान रखा गया है.
2026-27 खरीफ सीजन उत्पादन लक्ष्य
| फसल | उत्पादन लक्ष्य (लाख टन) |
|---|---|
| चावल | 1231.5 |
| दलहन | 84.0 |
| तिलहन | 289.2 |
| न्यूट्री अनाज (मोटा अनाज/श्रीअन्न) | 135.6 |
| मक्का | 310.4 |
| कुल खरीफ खाद्यान्न उत्पादन लक्ष्य | 1761.6 |
क्या बोले पूर्व कृषि सचिव
पूर्व कृषि सचिव और एफसीआई के पूर्व CMD सिराज हुसैन ने कहा है कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) के तहत अधिक मात्रा में अनाज जारी करना पड़ सकता है. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि चावल का उपयोग इथेनॉल उत्पादन के लिए जो 2,320 रुपये प्रति क्विंटल की सब्सिडी दर पर किया जा रहा है, उसे पहले घोषित लगभग 52 लाख टन से काफी कम किया जाना चाहिए, ताकि खाद्य भंडार संतुलित बना रहे और कीमतों पर दबाव न बढ़े.