Saudi Arabia poultry ban: हाल ही में सऊदी अरब ने एहतियातन कदम उठाते हुए भारत समेत कई देशों से पोल्ट्री उत्पादों के आयात पर अस्थायी रोक लगा दी. यह फैसला बर्ड फ्लू और अन्य पशु रोगों की आशंका को देखते हुए लिया गया है. खबर सामने आते ही कई लोगों को चिंता हुई कि क्या इससे भारत के पोल्ट्री उद्योग को बड़ा झटका लगेगा? लेकिन उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि सऊदी अरब की इस पाबंदी का भारत के पोल्ट्री कारोबार पर लगभग कोई असर नहीं पड़ेगा.
सऊदी का हिस्सा बेहद छोटा
बिजनेसलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, सल में भारत का पोल्ट्री निर्यात कई देशों में होता है, लेकिन सऊदी अरब इसमें बहुत छोटी हिस्सेदारी रखता है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने सऊदी अरब को करीब 79 टन पोल्ट्री उत्पाद निर्यात किए, जिनकी कुल कीमत लगभग 0.10 मिलियन डॉलर रही. यह मात्रा भारत के कुल पोल्ट्री निर्यात की तुलना में बेहद मामूली है.
इसी अवधि में भारत का कुल पोल्ट्री निर्यात 10 लाख टन से ज्यादा रहा, जिसकी कीमत करीब 168 मिलियन डॉलर थी. ऐसे में सऊदी अरब का हिस्सा नाममात्र का ही रहा. यही वजह है कि इस प्रतिबंध से न तो घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव पड़ने की संभावना है और न ही उत्पादन पर कोई खास असर दिख रहा है.
खाड़ी देशों में मजबूत बाजार
भारत खासतौर पर पश्चिम एशिया के कई देशों को अंडे और पोल्ट्री उत्पाद निर्यात करता है. तमिलनाडु का नामक्कल क्षेत्र अंडा उत्पादन और निर्यात के लिए जाना जाता है. यहां से रोजाना लाखों अंडे ओमान, यूएई, कतर और तुर्की जैसे देशों में भेजे जाते हैं.
उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि भारत से पश्चिम एशिया में रोज करीब एक करोड़ अंडों का निर्यात होता है, लेकिन इसमें सऊदी अरब की हिस्सेदारी बहुत कम है. इसलिए बाजार में कोई बड़ी हलचल नहीं है. दूसरे देशों में मांग स्थिर बनी हुई है, जिससे निर्यात संतुलित चल रहा है.
घरेलू मांग बनी मजबूत सहारा
भारत में पोल्ट्री उद्योग का आकार अब लगभग 30 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है. यह क्षेत्र सीधे और परोक्ष रूप से करीब 60 लाख लोगों को रोजगार देता है. ब्रॉयलर यानी मांस के लिए पाले जाने वाले मुर्गों की सालाना संख्या करीब 5.5 अरब है, जबकि अंडा देने वाली मुर्गियों की संख्या लगभग 35 करोड़ है. इसके अलावा 4 करोड़ से ज्यादा देसी या बैकयार्ड पक्षी भी देश में मौजूद हैं.
भारत दुनिया का सबसे बड़ा अंडा उत्पादक देश बन चुका है. सालाना अंडा उत्पादन 142 अरब से ज्यादा है. ऐसे में घरेलू खपत भी काफी बड़ी है. शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में अंडे और चिकन की मांग लगातार बढ़ रही है. यही वजह है कि अगर किसी एक देश से निर्यात प्रभावित भी हो, तो घरेलू बाजार और अन्य निर्यात गंतव्य उस कमी को संभाल सकते हैं.
सावधानी के तौर पर लिया गया फैसला
सऊदी अरब का यह कदम पूरी तरह से एहतियाती माना जा रहा है. कई बार किसी क्षेत्र में बर्ड फ्लू या अन्य पशु रोग की खबर आने पर देश अस्थायी रूप से आयात रोक देते हैं. इसका मतलब यह नहीं होता कि उत्पाद की गुणवत्ता पर सवाल है, बल्कि यह स्वास्थ्य सुरक्षा का सामान्य कदम होता है.
भारत में भी पोल्ट्री फार्मों में जैव-सुरक्षा के कड़े नियम लागू किए जाते हैं. समय-समय पर निगरानी और जांच की जाती है, ताकि किसी भी बीमारी का फैलाव रोका जा सके. उद्योग संगठनों का कहना है कि भारत की पोल्ट्री प्रणाली अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है और निर्यात करने वाले फार्मों में विशेष सावधानियां बरती जाती हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल इस प्रतिबंध से घबराने की जरूरत नहीं है. अगर भविष्य में सऊदी अरब अपने फैसले की समीक्षा करता है तो व्यापार फिर से सामान्य हो सकता है. वहीं, भारत के लिए यह भी एक मौका है कि वह नए बाजार तलाशे और अपने निर्यात को और विविध बनाए.