India US trade deal: चीन को कड़ी टक्कर देने की तैयारी, अमेरिकी बाजार में भारतीय चाय होगी सस्ती

अब तक अमेरिकी बाजार में भारतीय चाय पर भारी शुल्क लगता था. पिछले साल तो हालात इतने खराब हो गए थे कि भारतीय चाय पर 50 प्रतिशत तक टैक्स लगा दिया गया. इसका नतीजा यह हुआ कि कई अमेरिकी खरीदारों ने ऑर्डर रद्द कर दिए. निर्यातकों को मजबूरी में कम दाम पर सौदे करने पड़े और कई बार नुकसान उठाना पड़ा.

नई दिल्ली | Published: 10 Feb, 2026 | 02:04 PM

Indian tea export: भारतीय चाय की खुशबू अब अमेरिका में बिना किसी रुकावट के फैलने वाली है. भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते ने देश के चाय उद्योग को बड़ी राहत दी है. इस समझौते के तहत अब भारतीय चाय को अमेरिकी बाजार में बिना किसी आयात शुल्क के प्रवेश मिलेगा. लंबे समय से टैक्स और ऑर्डर रद्द होने की मार झेल रहे चाय निर्यातकों के लिए यह फैसला किसी राहत भरी सांस से कम नहीं है.

चाय उद्योग से जुड़े लोग मानते हैं कि यह सिर्फ एक व्यापारिक फैसला नहीं, बल्कि लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ा अहम कदम है. इससे न केवल निर्यातकों को फायदा होगा, बल्कि चाय बागानों में काम करने वाले मजदूरों और छोटे किसानों की स्थिति भी बेहतर हो सकती है.

क्यों खास है यह फैसला?

अब तक अमेरिकी बाजार में भारतीय चाय पर भारी शुल्क लगता था. पिछले साल तो हालात इतने खराब हो गए थे कि भारतीय चाय पर 50 प्रतिशत तक टैक्स लगा दिया गया. इसका नतीजा यह हुआ कि कई अमेरिकी खरीदारों ने ऑर्डर रद्द कर दिए. निर्यातकों को मजबूरी में कम दाम पर सौदे करने पड़े और कई बार नुकसान उठाना पड़ा. अब जब यह शुल्क पूरी तरह हटा दिया गया है, तो भारतीय चाय कीमत के मामले में ज्यादा मजबूत होकर सामने आएगी. इससे अमेरिकी खरीदारों के लिए भारतीय चाय फिर से आकर्षक बन सकेगी.

चीन से मुकाबले में भारत को क्यों मिलेगी बढ़त?

बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, अमेरिका में चाय के बाजार में चीन भारत का सबसे बड़ा प्रतिस्पर्धी माना जाता है. अब तक कीमत के कारण कई बार चीन की चाय आगे निकल जाती थी. लेकिन ड्यूटी हटने के बाद भारतीय चाय को कीमत और गुणवत्ता दोनों का फायदा मिलेगा. इंडियन टी एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के चेयरमैन अंशुमन कनोरिया का कहना है कि अब भारतीय निर्यातक अमेरिकी बाजार के लिए लंबी अवधि की योजनाएं बना पाएंगे. हालांकि वह यह भी मानते हैं कि अमेरिका चाय के मामले में बहुत तेजी से बढ़ने वाला बाजार नहीं है, इसलिए अचानक बड़ा उछाल नहीं दिखेगा, लेकिन पुराने स्तर तक पहुंचना अब आसान होगा.

पिछले साल की मुश्किलें अब पीछे

2025 भारतीय चाय उद्योग के लिए कठिन साल रहा. ऊंचे टैक्स की वजह से निर्यात घट गया और कई पुराने ग्राहक हाथ से निकल गए.
दक्षिण भारत चाय निर्यातक संघ के अध्यक्ष दीपक शाह कहते हैं कि यह फैसला उस बाजार को वापस पाने का मौका है, जिसे ऊंचे शुल्क ने हमसे छीन लिया था. उनके मुताबिक, “यह उद्योग के लिए संजीवनी जैसा है.”

अमेरिका में भारतीय चाय की कितनी मांग?

अमेरिका भारत की कुल चाय निर्यात का करीब 5 से 7 प्रतिशत हिस्सा खरीदता है. वहां खासतौर पर आइस टी और रेडी-टू-ड्रिंक चाय की मांग ज्यादा है. पिछले साल भारत ने अमेरिका को 1.52 करोड़ किलो चाय भेजी थी. अब उद्योग को उम्मीद है कि आने वाले समय में यह आंकड़ा बढ़कर 2 करोड़ किलो तक पहुंच सकता है.

बागान मालिकों और मजदूरों को क्या फायदा?

युनाइटेड प्लांटर्स एसोसिएशन ऑफ साउदर्न इंडिया के अध्यक्ष अजय थिपैया मानते हैं कि यह समझौता सिर्फ निर्यात बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा. इससे चाय बागानों की आमदनी सुधरेगी, जिसका सीधा असर मजदूरों की मजदूरी और रोजगार पर पड़ेगा. उनका कहना है कि चाय के साथ-साथ कॉफी, रबर और मसालों जैसे अन्य बागान उत्पादों के लिए भी नए रास्ते खुल सकते हैं.

जानकारों का मानना है कि ड्यूटी हटना एक बड़ा मौका है, लेकिन इसका पूरा फायदा तभी मिलेगा जब भारतीय चाय उद्योग गुणवत्ता, पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर भी ध्यान दे. अमेरिकी उपभोक्ताओं की पसंद के हिसाब से नए फ्लेवर और प्रीमियम उत्पाद लाए गए तो भारत अपनी पकड़ और मजबूत कर सकता है.

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