ईरान में हालात बिगड़ते ही थमी भारतीय चाय की सप्लाई, निर्यातकों में बेचैनी

ईरान को अच्छी गुणवत्ता वाली ऑर्थोडॉक्स चाय का बड़ा बाजार माना जाता है. वहां के लोग स्वाद और खुशबू को लेकर काफी सजग रहते हैं. असम की चाय का रंग, खुशबू और स्वाद ईरान में खास पहचान रखता है. इसी वजह से ईरान में आई यह रुकावट भारतीय चाय उद्योग के लिए चिंता का विषय बन गई है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 13 Jan, 2026 | 11:13 AM

Tea exports: ईरान में चल रहे हालात ने भारतीय चाय कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है. हाल ही में वहां जो संकट पैदा हुआ है, उसका सीधा असर भारत से ईरान जाने वाली चाय की सप्लाई पर पड़ा है. हालत यह है कि कई खेपें रास्ते में अटक गई हैं और निर्यातकों का ईरान में अपने ग्राहकों से संपर्क पूरी तरह टूट चुका है. न फोन लग रहे हैं, न इंटरनेट काम कर रहा है. ऐसे में चाय कारोबार से जुड़े लोग बेहद परेशान हैं.

ईरान संकट से रुक गया चाय का कारोबार

बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, ईरान भारतीय चाय के लिए एक अहम विदेशी बाजार माना जाता है. खासकर असम की ऑर्थोडॉक्स चाय वहां काफी पसंद की जाती है. ईरान में कई ऐसे ब्रांड हैं, जो भारतीय चाय पर ही निर्भर रहते हैं. लेकिन बीते कुछ दिनों से वहां सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज हो गए हैं. सुरक्षा बलों की सख्ती बढ़ गई है और इंटरनेट व मोबाइल सेवाएं बंद कर दी गई हैं. इसका असर सीधे व्यापार पर पड़ा है.

पूरी तरह टूटा संपर्क, निर्यातक असमंजस में

भारतीय चाय निर्यातकों का कहना है कि फिलहाल ईरान से किसी भी तरह की बातचीत संभव नहीं है. वहां फोन और इंटरनेट दोनों ही ठप हैं. ऐसे में यह पता ही नहीं चल पा रहा कि वहां के बाजारों की स्थिति क्या है और आयातक क्या चाहते हैं. कई निर्यातक पहले से तय समझौतों के तहत चाय भेज चुके हैं, जबकि कुछ की खेप बंदरगाहों पर ही रोक दी गई है. हालात साफ होने तक नई शिपमेंट रोक दी गई है.

प्रीमियम चाय का बड़ा बाजार है ईरान

ईरान को अच्छी गुणवत्ता वाली ऑर्थोडॉक्स चाय का बड़ा बाजार माना जाता है. वहां के लोग स्वाद और खुशबू को लेकर काफी सजग रहते हैं. असम की चाय का रंग, खुशबू और स्वाद ईरान में खास पहचान रखता है. इसी वजह से ईरान में आई यह रुकावट भारतीय चाय उद्योग के लिए चिंता का विषय बन गई है.

पश्चिम एशिया में मजबूत है भारतीय चाय

पश्चिम एशिया लंबे समय से भारतीय चाय का बड़ा खरीदार रहा है. पिछले साल के 11 महीनों में ईरान और इराक को करीब एक करोड़ किलो चाय भेजी गई थी. इसके अलावा संयुक्त अरब अमीरात को भी बड़ी मात्रा में चाय जाती है, जिसका एक हिस्सा ईरान तक पहुंचता है. इसलिए ईरान में संकट का असर आसपास के रास्तों से होने वाले व्यापार पर भी पड़ रहा है.

पहले से तय सौदों पर होता है निर्यात

ईरान के साथ चाय का व्यापार आमतौर पर पहले से तय सौदों यानी फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट के जरिए होता है. इसमें चाय पहले ही खरीद ली जाती है और बाद में भेजी जाती है. मौजूदा हालात में इन सौदों पर असर पड़ सकता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह असर ज्यादा समय तक नहीं रहेगा. हालात सुधरने के बाद व्यापार दोबारा पटरी पर लौट सकता है.

कारोबारियों को है हालात सुधरने की उम्मीद

हालांकि अभी चिंता बनी हुई है, लेकिन चाय उद्योग को भरोसा है कि यह संकट स्थायी नहीं होगा. भारतीय चाय ने ईरान में सालों से अपनी जगह बना रखी है. जैसे ही वहां हालात सामान्य होंगे और संपर्क बहाल होगा, भारतीय चाय की सप्लाई फिर से शुरू होने की उम्मीद है. फिलहाल, सभी की नजरें ईरान में शांति बहाल होने और व्यापार दोबारा शुरू होने पर टिकी हुई हैं.

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