KCC Loan: यूपी के किसानों पर 1.40 लाख करोड़ का कर्ज, 5 साल में 16,900 करोड़ रुपये बढ़ा बकाया

KCC Loan: उत्तर प्रदेश में किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) का बकाया कर्ज 2025-26 में 1,39,986 करोड़ रुपये रहा, जो देश में सबसे ज्यादा है. पिछले पांच साल में यूपी का KCC बकाया करीब 16,900 करोड़ रुपये बढ़ा है. बढ़ती खेती लागत और KCC की बढ़ी लोन सीमा इसके पीछे अहम वजहें हैं.

नोएडा | Published: 13 Sep, 2026 | 11:53 AM

Kisan Credit Card Loan: उत्तर प्रदेश देश का बड़ा कृषि राज्य है और यहां करोड़ों किसान खेती से जुड़े हैं. अब किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC के बकाए कर्ज के आंकड़ों ने राज्य की एक दूसरी तस्वीर सामने रखी है. केंद्र सरकार की ओर से लोकसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश के किसानों पर KCC के तहत 1,39,986 करोड़ रुपये का बकाया कर्ज है. यह देश के सभी राज्यों में सबसे ज्यादा है. इस मामले में यूपी ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक जैसे बड़े कृषि राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया है.

पांच साल में करीब 17 हजार करोड़ रुपये बढ़ा कर्ज

आंकड़ों को देखें तो उत्तर प्रदेश में KCC का बकाया कर्ज पिछले पांच साल में लगातार बढ़ा है. वित्त वर्ष 2021-22 में यह रकम 1,23,076 करोड़ रुपये थी. इसके बाद 2022-23 में बढ़कर 1,28,123 करोड़ रुपये हो गई. वित्त वर्ष 2023-24 में KCC का बकाया 1,38,621 करोड़ रुपये और 2024-25 में 1,41,375 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. हालांकि 2025-26 में इसमें थोड़ी कमी आई और बकाया 1,39,986 करोड़ रुपये रहा. यानी पांच साल में कुल बकाया कर्ज करीब 16,900 करोड़ रुपये बढ़ चुका है.

राजस्थान समेत इन राज्यों से आगे निकला यूपी

KCC के बकाए के मामले में उत्तर प्रदेश के बाद राजस्थान का नंबर है. 2025-26 में राजस्थान में KCC का बकाया 1,15,769 करोड़ रुपये रहा. मध्य प्रदेश में यह 87,391 करोड़, गुजरात में 81,322 करोड़ और कर्नाटक में 67,398 करोड़ रुपये था.

राज्य 2025-26 2024-25 2023-24
उत्तर प्रदेश 1,39,986 करोड़ 1,41,375 करोड़ 1,38,621 करोड़
राजस्थान 1,15,769 करोड़ 1,12,364 करोड़ 1,08,973 करोड़
मध्य प्रदेश 87,391 करोड़ 88,732 करोड़ 84,523 करोड़
गुजरात 81,322 करोड़ 77,441 करोड़ 71,132 करोड़
कर्नाटक 67,398 करोड़ 67,542 करोड़ 62,794 करोड़

खेती का खर्च बढ़ना भी बड़ी वजह

KCC का इस्तेमाल किसान खेती से जुड़े जरूरी खर्च पूरे करने के लिए करते हैं. बीज, खाद, कीटनाशक, डीजल, सिंचाई और कृषि मशीनरी जैसी चीजों पर खर्च बढ़ने से किसानों को फसल तैयार करने के लिए ज्यादा कर्ज की जरूरत पड़ सकती है. KCC की खासियत यह है कि किसानों को बैंक और दूसरे संस्थागत माध्यमों से सस्ती दर पर फसल लोन मिल जाता है. लेकिन दूसरी तरफ बकाए की इतनी बड़ी रकम यह भी बताती है कि खेती से होने वाली आमदनी और लागत के बीच संतुलन बनाना अभी भी किसानों के लिए चुनौती बना हुआ है.

KCC की सीमा बढ़ने से किसानों को मिल सकता है फायदा

सरकार ने बजट 2025-26 में संशोधित ब्याज अनुदान योजना के तहत KCC लोन की सीमा 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने का ऐलान किया था. इसका मकसद किसानों को ज्यादा मात्रा में सस्ता संस्थागत कर्ज उपलब्ध कराना है. सरकार का मानना है कि KCC के जरिए मिलने वाला आसान और सस्ता कर्ज किसानों की साहूकारों और दूसरे गैर-संस्थागत स्रोतों पर निर्भरता कम कर सकता है. हालांकि, यूपी में KCC का बकाया लगातार ऊंचे स्तर पर बना रहना इस बात का संकेत है कि किसानों के लिए सिर्फ सस्ता कर्ज ही नहीं, बल्कि खेती की लागत कम करना और फसल से बेहतर आमदनी हासिल करना भी उतना ही जरूरी है.

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