Mandi Rate: इन कारणों से प्याज हुआ सस्ता, किसानों को 1500 रुपये क्विंटल मिलेगी आर्थिक मदद ?
महाराष्ट्र में प्याज की कीमतों में भारी गिरावट से किसान नाराज हैं. किसानों का कहना है कि लागत नहीं निकल रही. APMC में दाम 600 रुपये से1500 रुपये क्विंटल तक गिर गए हैं, जबकि सरकार ने 12.35 रुपये किलो खरीद की घोषणा की, जिसे किसान अपर्याप्त बता रहे हैं.
Onion Mandi Bhav: महाराष्ट्र में प्याज किसानों की परेशानी बढ़ती जा रही है. नासिक और छत्रपति संभाजीनगर जिलों में किसानों ने थोक मंडियों में प्याज के दाम गिरने के विरोध में प्रदर्शन किया. किसानों का कहना है कि उन्हें प्याज की खेती की लागत भी नहीं मिल पा रही है. उन्होंने कम कीमत पर प्याज बेचने वाले किसानों को 1,500 रुपये प्रति क्विंटल मुआवजा देने की मांग की है. लासलगांव कृषि उपज मंडी समिति के बाजार निदेशक प्रवीण कदम का कहना है कि किसानों को लगातार नुकसान हो रहा है, इसलिए सरकार को कम से कम 1500 रुपये प्रति क्विंटल की मदद देनी चाहिए, ताकि किसानों के हाथ में कुछ पैसा आ सके.
किसानों का कहना है कि प्याज उत्पादन पर 17 रुपये से 20 रुपये प्रति किलो तक खर्च आता है और ऊपर से परिवहन का खर्च भी लगातार बढ़ रहा है, जो पूरी तरह किसानों को ही उठाना पड़ रहा है. किसानों के मुताबिक, यह स्थिति अनियमित मौसम, खराब निर्यात नीति, इस साल हुई अधिक पैदावार और बढ़ती महंगाई के कारण बनी है.
10 लाख हेक्टेयर में प्याज की खेती
महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ और कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में राज्य में 9.78 लाख हेक्टेयर में प्याज की खेती हुई थी और उत्पादन 115-118 लाख मीट्रिक टन रहा. जबकि 2025- 26 में यह बढ़कर 10 लाख हेक्टेयर और 165- 170 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया, जिससे बाजार में भारी आपूर्ति हो गई और दाम गिर गए. इसी बीच शुक्रवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की थी कि केंद्र सरकार किसानों से 12.35 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज खरीदेगी. लेकिन किसानों ने इस कीमत को नाकाफी बताते हुए इसका विरोध जताया है.
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प्याज के दाम 1,500 रुपये प्रति क्विंटल
ऐसे आमतौर पर कटाई के बाद किसान अपनी प्याज नजदीकी APMC मंडी में लेकर आते हैं, जहां नीलामी होती है और प्याज की क्वालिटी देखकर दाम तय किए जाते हैं. इस बार सुपर क्वालिटी प्याज के दाम 1,500 रुपये प्रति क्विंटल मिले, जबकि लाल प्याज 1,417 रुपये प्रति क्विंटल तक बिका. इसके मुकाबले पिछले साल मार्च में कीमतें काफी ज्यादा थीं. उस समय 2,627 रुपये से 3,101 रुपये प्रति क्विंटल तक दाम मिले थे.
12.35 रुपये प्रति किलो प्याज खरीदी
लासलगांव के एक किसान ने कहा कि सरकार की तरफ से तय 12.35 रुपये प्रति किलो की कीमत किसानों के लिए काफी नहीं है. उनका आरोप है कि सरकार उनकी बात नहीं सुन रही है. किसानों का यह भी कहना है कि सरकार के गोदाम खाली पड़े हैं, जिनमें अगर एयर-कूलिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाए तो प्याज को खराब होने से बचाया जा सकता है, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा.
प्याज की खेती में लागत बढ़ गई
किसानों ने यह भी बताया कि कीटनाशक और खाद की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन सरकार उन पर नियंत्रण नहीं कर पा रही है. उनका कहना है कि सरकार को कम से कम इन बढ़ते खर्चों के बीच अंतर को देखते हुए किसानों को मदद देनी चाहिए. महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष भारत दिघोले ने कहा कि कई किसान मजबूरी में 600 रुपये से 850 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर प्याज बेच रहे हैं, क्योंकि उन्हें घर चलाने के लिए तुरंत पैसे की जरूरत होती है. उन्होंने कहा कि महंगाई लगातार बढ़ रही है. खाने से लेकर खेती में इस्तेमाल होने वाली चीजें भी महंगी हो रही हैं. अगर सरकार इन लागतों को नियंत्रित करे, तो किसानों को मुआवजे की मांग नहीं करनी पड़ेगी.