प्राकृतिक रबर की कीमतों में उछाल, 160 रुपये किलो के पार पहुंचा भाव.. इस वजह से बढ़ा रेट
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी और आपूर्ति संकट के चलते देश में प्राकृतिक रबर के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं. घरेलू बाजार में कीमत 267 रुपये प्रति किलो तक पहुंची, जबकि बैंकॉक में भी वृद्धि दर्ज हुई. बारिश, उत्पादन में कमी और कच्चे तेल की महंगाई से सिंथेटिक रबर महंगा हुआ, जिससे प्राकृतिक रबर की मांग बढ़ी.
Natural Rubber Price Hike: अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी का असर अब देश के प्राकृतिक रबर के दामों पर भी साफ दिखाई दे रहा है. घरेलू बाजार में रबर की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं और यह बढ़कर 267 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं. जबकि साल की शुरुआत में यह 185 रुपये प्रति किलो थी. व्यापारियों के मुताबिक, केरल के कोट्टायम में तो रबर की खरीद-बिक्री 269 रुपये प्रति किलो तक भी दर्ज की गई है.
साल 2026 में अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी रबर के दाम लगातार बढ़े हैं. बैंकॉक मार्केट में RSS-3 रबर की कीमत, जो साल की शुरुआत में 191.85 रुपये प्रति किलो थी, अब बढ़कर 304.62 रुपये प्रति किलो हो गई है. भारतीय रबर डीलर्स फेडरेशन के अध्यक्ष जॉर्ज वली ने ‘बिजनेसलाइन’ को कहा कि रबर की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के पीछे कई कारण हैं. उन्होंने कहा कि बारिश के कारण आपूर्ति में कमी, अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतें, पश्चिम एशिया संकट से जुड़ी आपूर्ति बाधाएं और कच्चे माल की कमी ने मिलकर रबर के दामों को ऊपर धकेल दिया है.
मॉनसून की शुरुआत और लगातार बारिश ने देश के प्रमुख रबर उत्पादक इलाकों में टेपिंग (रबर निकालने की प्रक्रिया) को प्रभावित किया है. इसके चलते बाजार में रबर शीट की आवक कम हो गई है. जो माल बाजार में आ रहा है, वह ज्यादातर डीलरों और किसानों के पुराने स्टॉक से आ रहा है. वहीं, उद्योगों में रबर की मांग लगातार बनी हुई है, क्योंकि कंपनियां अपने उत्पादन के लिए मौजूदा दामों पर ही खरीदारी कर रही हैं.
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किसान फिर शुरू करेंगे बागानों में टेपिंग
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा ऊंचे दाम किसानों को दोबारा बंद पड़े बागानों में टेपिंग शुरू करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं, जिससे बाजार में रबर की आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है. दक्षिण-पूर्व एशिया के प्रमुख रबर उत्पादक देशों में भी खराब मौसम का असर देखने को मिला है. भारी बारिश और ‘विंटरिंग’ सीजन के कारण टेपिंग के दिन कम हो गए हैं और लेटेक्स उत्पादन घटा है, जिससे आपूर्ति में कमी और कीमतों में तेजी आई है.
रबर की मांग मजबूत बनी हुई है
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है. इससे सिंथेटिक रबर, जो पेट्रोलियम से बनता है, महंगा हो गया है और उसकी आपूर्ति प्रभावित हुई है. नतीजतन, कंपनियां अब प्राकृतिक रबर की ओर ज्यादा रुख कर रही हैं, जिससे इसकी मांग और कीमत दोनों बढ़ रही हैं. वहीं, ऑटोमोबाइल सेक्टर, खासकर तेजी से बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहन (EV) उद्योग से भी रबर की मांग मजबूत बनी हुई है, जिससे दामों को और सहारा मिला है.
प्राकृतिक रबर के उत्पादन में बंपर बढ़ोतरी
पिछले कुछ वर्षों से रबर के उत्पादन और खपत के बीच अंतर बढ़ता जा रहा है, यानी खपत उत्पादन से लगातार ज्यादा है. एएनआरपीसी (ANRPC) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में वैश्विक प्राकृतिक रबर उत्पादन 2.2 फीसदी बढ़कर 15.32 मिलियन टन तक पहुंच सकता है, लेकिन खपत 1.4 फीसदी बढ़कर 15.60 मिलियन टन होने का अनुमान है. इसका मतलब है कि दुनिया में रबर की कमी का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है. 8 सर्चेवल कीवर्ड और 60 शब्दों में EXCERPT लिखो