प्राकृतिक रबर की कीमतों में बढ़ोतरी, 221 रुपये किलो हुआ रेट.. किसानों की बंपर कमाई

कोट्टायम में प्राकृतिक रबर की कीमत 221 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है. कम आपूर्ति , गर्मी, तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशों में रबर की बढ़ती मांग इसे प्रभावित कर रही हैं. किसान स्टॉक रोक रहे हैं और राजनीतिक व वैश्विक तनाव के कारण कीमतें अल्पकालिक रूप से ऊंची बनी हैं.

नोएडा | Updated On: 31 Mar, 2026 | 10:00 PM

Rubber Price Hike: प्राकृतिक रबर की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. सोमवार को कोट्टायम मार्केट में यह 221 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई. ऐसे में रबर किसानों की अच्छी कमाई हो रही है. हालांकि, कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे घरेलू और विदेशी कारण बताए जा रहे हैं. व्यापारियों का कहना है कि रबर की कीमतें इसलिए बढ़ रही हैं, क्योंकि मार्केट में रबर कम उपलब्ध है. साथ ही रबर उगाने वाले इलाके में अधिक गर्मी पड़ रही है, जिससे पैदावार पर असर पड़ा है. इसके अलावा तेल की कीमतें बदल रही हैं और विदेशों में रबर की कीमतें भी बढ़ गई हैं.

भारतीय रबर डीलर्स फेडरेशन के अध्यक्ष जॉर्ज वैली ने बिजनेसलाइन से कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के कारण भी चिंता बढ़ी है. इससे रासायनिक पदार्थ और सिंथेटिक रबर जैसी जरूरी आयातित सामग्री की सप्लाई प्रभावित हो सकती है. तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ ही सिंथेटिक रबर के दाम भी बढ़ रहे हैं, जिससे प्राकृतिक रबर की कीमतों को भी बढ़ावा मिल रहा है. उन्होंने कहा कि हालांकि गर्मियों की बारिश ने कुछ राहत दी है, लेकिन प्रमुख रबर उत्पादन क्षेत्रों में बढ़ते तापमान के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ है. वहीं, किसान बेहतर दाम की उम्मीद में स्टॉक रोककर रख रहे हैं, क्योंकि वैश्विक बाजार भी मजबूत है.

कांग्रेस ने समर्थन मूल्य बढ़ाने का किया वादा

इसके अलावा राजनीतिक वजह भी कीमतों को प्रभावित कर रही है. कोट्टायम में चुनावी प्रचार के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि अगर सत्ता में आए तो UDF पहली कैबिनेट बैठक में प्राकृतिक रबर का समर्थन मूल्य 250 रुपये प्रति किलोग्राम तय करेगी. UDF के घोषणापत्र में इसे चरणबद्ध तरीके से 300 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ाने की योजना भी है. व्यापारी मानते हैं कि इससे किसान बिक्री में देरी कर बेहतर रिटर्न की उम्मीद कर रहे हैं.

टायर उद्योग घरेलू बाजार से रबर नहीं खरीद रहा

उन्होंने कहा कि टायर उद्योग इस समय घरेलू बाजार से रबर खरीदने में सक्रिय नहीं है, क्योंकि वेस्ट एशिया में तनाव के चलते कच्चे माल की सप्लाई लाइन पर असर पड़ने का डर है. इससे रबर, रासायनिक पदार्थ, पेट्रोकेमिकल और सिंथेटिक रबर की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है.

प्राकृतिक रबर का उपयोग बढ़ा रहा है

हैरिसन्स मलयालम लिमिटेड के CEO संतोष कुमार ने कहा कि वेस्ट एशिया की परेशानियों और उससे पैदा हुई आर्थिक परिस्थितियों ने विभिन्न कमोडिटी ट्रेड पर असर डाला है और प्राकृतिक रबर भी इससे अछूता नहीं है. वर्तमान में उत्पादन कम होने और सिंथेटिक रबर की आपूर्ति रुक जाने से बाजार में प्राकृतिक रबर पर दबाव बढ़ गया है, जिससे उद्योग कुछ हद तक प्राकृतिक रबर का उपयोग बढ़ा रहा है.

प्राकृतिक रबर की कीमतें स्थिर रह सकती हैं

इस स्थिति के कारण प्राकृतिक रबर की कीमतों में अल्पकालिक तेजी देखी गई है. विशेषज्ञों का कहना है कि आपूर्ति में सुधार और समस्याओं के हल होने में समय लग सकता है, इसलिए आने वाले कुछ समय तक प्राकृतिक रबर की कीमतें स्थिर और ऊंची बनी रह सकती हैं.

 

Published: 31 Mar, 2026 | 10:30 PM

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