24 घंटे में 15 फीसदी महंगा हो गया प्याज, 2600 रुपये क्विंटल के पार रेट.. इस वजह से बढ़ीं कीमतें

देश की सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगांव एपीएमसी में प्याज के थोक दाम छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं. आवक घटने और निर्यात मांग बढ़ने से कीमतों में तेजी आई है. खुले बाजार में बेहतर भाव मिलने से किसान सरकारी खरीद एजेंसियों की बजाय मंडियों में बिक्री को प्राथमिकता दे रहे हैं.

नोएडा | Updated On: 24 Jun, 2026 | 07:55 AM

Onion Mandi Rate: देश की सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगांव एपीएमसी में मंगलवार को प्याज के थोक दाम में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई. औसत थोक कीमत 15 प्रतिशत बढ़कर 2,000 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच गई, जो पिछले छह महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है. इससे पहले दिसंबर 2025 में प्याज के भाव इसी स्तर के आसपास थे. हालांकि, सोमवार को मंडी में प्याज का औसत थोक भाव 1,740 रुपये प्रति क्विंटल था, जो एक दिन में बढ़कर 2,000 रुपये प्रति क्विंटल हो गया. मंगलवार को मंडी में प्याज का न्यूनतम भाव 800 रुपये और अधिकतम भाव 2,628 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया. हालांकि, व्यापारियों का कहना है कि आवक में कमी और मांग बढ़ने के कारण प्याज की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है.

लासलगांव एपीएमसी के एक अधिकारी ने द टाइम्स ऑफ इंडिया को कहा कि पिछले कुछ दिनों में मंडी में प्याज की आवक  कम होने से थोक कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने कहा कि रोजाना आने वाला प्याज करीब 18,000 क्विंटल से घटकर 12,000 क्विंटल रह गया है. इसके साथ ही घरेलू और खासकर निर्यात बाजार में मांग बढ़ने से पिछले 15 दिनों में प्याज के दाम लगातार बढ़े हैं.

एनसीसीएफ ने प्याज की खरीद धीमी कर दी

प्याज की कीमतों में आई इस तेजी का असर सरकारी खरीद पर भी पड़ा है. बढ़ती कीमतों के कारण केंद्र सरकार की एजेंसियां भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ(नाफेड) और भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ (एनसीसीएफ) ने प्याज की खरीद धीमी कर दी है. अधिकारियों के अनुसार, ऊंचे दामों के चलते इन एजेंसियों की खरीद गतिविधियों पर असर पड़ा है.

प्याज की बढ़ती कीमतों के बीच किसान सरकारी एजेंसियों को बेचने के बजाय खुले बाजार में अपनी उपज बेचने को प्राथमिकता दे रहे हैं. इसकी वजह यह है कि सरकारी एजेंसियां प्याज की खरीद 1,730 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कर रही हैं, जबकि मंडियों में किसानों को बेहतर कीमत मिल रही है. एपीएमसी मंडियों  में ग्रेड-ए और ग्रेड-बी गुणवत्ता वाले प्याज के भाव 1,800 से 2,000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं. ऐसे में किसान अधिक मुनाफे के लिए खुले बाजार का रुख कर रहे हैं.

मंडियों में प्याज की आवक घटने से औसत थोक कीमतों में बढ़ोतरी

लासलगांव एपीएमसी के एक अधिकारी के अनुसार, मंडियों में प्याज की आवक घटने से औसत थोक कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. फिलहाल बाजार में जो प्याज आ रहा है, वह मार्च और अप्रैल में कटाई की गई ग्रीष्मकालीन फसल का है. इस किस्म के प्याज को सामान्य तौर पर छह से सात महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है, इसलिए किसान बेहतर दाम मिलने का इंतजार भी कर रहे हैं.

प्याज की भंडारण क्षमता छह से सात महीने तक होती है

विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मियों में पैदा होने वाले प्याज की भंडारण क्षमता  छह से सात महीने तक होती है. यही वजह है कि कई किसान बेहतर दाम मिलने की उम्मीद में अपनी उपज को अभी बेचने के बजाय स्टोर करके रख रहे हैं. किसान अपनी आर्थिक जरूरतों के अनुसार ही प्याज की खेप मंडियों में ला रहे हैं. चूंकि नई प्याज की फसल अब खरीफ प्याज के रूप में अक्टूबर के मध्य तक ही बाजार में आएगी, इसलिए तब तक बाजार की मांग मुख्य रूप से भंडारित ग्रीष्मकालीन प्याज से ही पूरी की जाएगी. ऐसे में सीमित आवक और स्टॉक रखने की रणनीति के कारण आने वाले समय में प्याज की कीमतों पर दबाव बना रह सकता है.

Published: 24 Jun, 2026 | 07:41 AM

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