महाराष्ट्र के 50 हजार किसानों से नहीं खरीदी गई धान, परचेज डेडलाइन बढ़ाने की मांग पर अड़े किसान
धान किसान और स्थानीय प्रतिनिधि मांग कर रहे हैं कि खरीद की समय सीमा को तुरंत बढ़ाया जाए और खरीद के लक्ष्य को भी बढ़ाया जाए, ताकि किसानों को अपना धान निजी व्यापारियों को MSP से कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर न होना पड़े. किसानों को उम्मीद है कि सरकार खरीद केंद्रों को दोबारा खोलने का फैसला लेगी.
महाराष्ट्र में खरीफ सीजन की धान खरीद प्रक्रिया बंद कर दी गई है. इससे 50 हजार किसान अपनी उपज बेचने से वंचित रह गए हैं. सर्वाधिक किसान गो्ंदिया जिले के हैं. किसानों ने कहा है कि राज्य सरकार ने उनकी उपज नहीं खरीदी है और पहले ही खरीद प्रक्रिया बंद कर दी गई है. किसानों ने अधिकारियों से कहा है कि धान खरीद की अंतिम तारीख को बढ़ाया जाए.
महाराष्ट्र के विदर्भ इलाके के गोंदिया जिले में भरपूर तरीके से धान की खेती की जाती है. लेकिन, यहां सूखे की स्थिति रहने के चलते धान की कटाई देर तक होती है. इस सीजन धान खरीद की अंतिम तारीख 31 मार्च तय की गई थी. इस तारीख तक करीब 50,000 किसान धान बेच नहीं सके हैं. पीटीआई के अनुसार एक अधिकारी ने बताया कि गोंदिया जिले में खरीफ सीजन के लिए खरीद प्रक्रिया 31 मार्च को खत्म होने के बाद, करीब 50,000 किसान इंतजार कर रहे हैं कि सरकार उनका धान MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर खरीद ले.
83 हजार किसानों से एमएसपी पर धान खरीद
जिला मार्केटिंग अधिकारी विवेक इंगले ने पीटीआई को बताया कि खरीद प्रक्रिया के लिए कुल 1,32,614 किसानों ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया था, जिनमें से 83,439 किसानों से धान खरीदा जा चुका है. उन्होंने आगे बताया कि कुल 49,175 किसान अभी भी अपने धान की खरीद का इंतजार कर रहे हैं. इन किसानों का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि खरीद की समय सीमा (डेडलाइन) बढ़ा दी जाएगी.
क्यों बंद की गई धान खरीद
खरीद प्रक्रिया मुख्य रूप से इसलिए रोक दी गई थी क्योंकि राज्य सरकार की ओर से धान खरीदने के लिए तय किए गए लक्ष्य पूरे हो चुके थे, जिसके चलते रजिस्ट्रेशन कराने वाले किसानों में से करीब एक-तिहाई किसानों को सरकार की ओर से कोई खरीदार नहीं मिल पाया. वहीं, गोंदिया जिले में धान की बुवाई और कटाई देरी से होने के चलते वहां के किसान एमएसपी पर सरकारी खरीद केंद्रों पर तय समयसीमा में अपनी उपज लेकर नहीं पहुंच सके.
किसानों को निजी व्यापारियों को कम कीमत में बेचनी पड़ेगी फसल
धान किसान और स्थानीय प्रतिनिधि मांग कर रहे हैं कि खरीद की समय सीमा को तुरंत बढ़ाया जाए और खरीद के लक्ष्य को भी बढ़ाया जाए, ताकि किसानों को अपना धान निजी व्यापारियों को MSP से कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर न होना पड़े. किसानों को उम्मीद है कि सरकार खरीद केंद्रों को दोबारा खोलने का फैसला लेगी. कई किसानों को डर है कि अगर सरकार ने इस मामले में दखल नहीं दिया, तो उन्हें अपना धान साहूकारों को कम कीमतों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा.
40 हजार किसानों का 313 करोड़ रुपये का भुगतान अटका
खरीद से जुड़ी समस्याओं के अलावा करीब 40,000 किसान पहले से ही आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं, क्योंकि उन्होंने जो धान पहले ही बेच दिया है, उसके लगभग 313 करोड़ रुपये का भुगतान अभी भी बकाया है. विधायक संजय पुरम समेत कई क्षेत्रीय नेताओं ने राज्य सरकार से औपचारिक रूप से अनुरोध किया है कि वे खरीद के लक्ष्य को बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार से संपर्क करें.