मनरेगा बचाओ संग्राम पर शिवराज का पलटवार… बोले– यह गरीबों का नहीं, भ्रष्टाचार बचाने का आंदोलन है

केंद्रीय मंत्री ने VB-G RAM G कानून का बचाव करते हुऐ कहा कि यह मनरेगा से भी आगे की सोच वाला कानून है. उनका कहना है कि इस नऐ कानून का मकसद ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी बनाना और काम के दिनों के साथ-साथ भुगतान प्रणाली को भी मजबूत करना है.

Kisan India
नई दिल्ली | Updated On: 4 Jan, 2026 | 12:41 PM

देश की राजनीति में एक बार फिर मनरेगा और नए VB-G RAM G कानून को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. कांग्रेस ने जहां 10 जनवरी से देशभर में “मनरेगा बचाओ संग्राम” शुरू करने का ऐलान किया है, वहीं केंद्र सरकार की ओर से इस पर तीखा जवाब सामने आया है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस के इस आंदोलन को सिरे से खारिज करते हुऐ इसे “भ्रष्टाचार बचाओ संग्राम” करार दिया है. शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि सरकार ने मनरेगा को ज्यादा पारदर्शी और मजदूरों के लिऐ भरोसेमंद बनाया है, लेकिन कांग्रेस को यही बात सबसे ज्यादा चुभ रही है.

कांग्रेस के आंदोलन पर सरकार का कड़ा रुख

कांग्रेस ने VB-G RAM G कानून को चुनौती देने के लिऐ जिस तरह देशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है, उस पर शिवराज सिंह चौहान ने साफ शब्दों में कहा कि यह आंदोलन गरीबों और मजदूरों के हित में नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस मनरेगा के नाम पर उस पुराने सिस्टम को बचाना चाहती है, जिसमें भ्रष्टाचार और देरी आम बात थी. शिवराज ने कहा कि पहले मनरेगा में मजदूरों को महीनों तक तन्ख्वाह का इंतजार करना पड़ता था, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं.

125 दिन काम और समय पर भुगतान का दावा

शिवराज सिंह चौहान ने जोर देकर कहा कि मौजूदा सरकार ने मनरेगा व्यवस्था को मजबूत किया है. उन्होंने बताया कि अब मजदूरों को 125 दिन के काम की गारंटी दी जा रही है और सबसे अहम बात यह है कि भुगतान समय पर सीधे खाते में पहुंच रहा है. उनके मुताबिक, पहले मजदूरों को यह भरोसा नहीं होता था कि मेहनत का पैसा कब मिलेगा, लेकिन अब तकनीक और पारदर्शी सिस्टम की वजह से देरी की समस्या काफी हद तक खत्म हो चुकी है.

VB-G RAM G कानून को बताया बेहतर विकल्प

केंद्रीय मंत्री ने VB-G RAM G कानून का बचाव करते हुऐ कहा कि यह मनरेगा से भी आगे की सोच वाला कानून है. उनका कहना है कि इस नऐ कानून का मकसद ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी बनाना और काम के दिनों के साथ-साथ भुगतान प्रणाली को भी मजबूत करना है. शिवराज सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि कांग्रेस को इसी बदलाव से परेशानी है, क्योंकि नऐ सिस्टम में भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम हो गई है.

कांग्रेस पर बार

शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर तीखे शब्दों में हमला करते हुऐ कहा कि भ्रष्टाचार कांग्रेस की जड़ों और उसके डीएनए में रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस को राम और विकास से भी परेशानी रहती है. शिवराज के मुताबिक, जब भी सरकार कोई पारदर्शी और जनहित की योजना लाती है, कांग्रेस उसे विवादित बनाने की कोशिश करती है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस भ्रम फैलाकर राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है.

कांग्रेस की मांगों पर सरकार की प्रतिक्रिया

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी के अन्य नेताओं ने VB-G RAM G कानून को वापस लेने और मनरेगा को अधिकार आधारित कानून के रूप में बहाल करने की मांग की है. इस पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस को पहले यह बताना चाहिए कि जब वह सत्ता में थी, तब मनरेगा में मजदूरों को समय पर पैसा क्यों नहीं मिलता था. उन्होंने कहा कि आज सरकार जवाबदेह है और हर रुपये का हिसाब सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध है.

पंचायतों और केंद्र के नियंत्रण पर उठे सवाल

कांग्रेस का आरोप है कि नए कानून से पंचायतों की ताकत कम हो रही है और केंद्र का नियंत्रण बढ़ रहा है. इस पर शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पंचायतों की भूमिका खत्म नहीं की गई है, बल्कि उन्हें एक साफ और जवाबदेह व्यवस्था से जोड़ा गया है. उनका कहना है कि पहले पंचायत स्तर पर भी कई बार गड़बड़ियां होती थीं, जिसका खामियाजा मजदूरों को भुगतना पड़ता था.

आंदोलन की राजनीति बनाम शासन की जिम्मेदारी

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कांग्रेस आंदोलन की राजनीति कर रही है, जबकि सरकार की जिम्मेदारी शासन चलाने की है. उन्होंने साफ कहा कि सरकार गरीब, मजदूर और ग्रामीण परिवारों के हित में फैसले ले रही है और किसी भी दबाव में आकर सुधारों से पीछे नहीं हटेगी. शिवराज ने कांग्रेस से अपील की कि वह झूठे आरोप लगाने के बजाय जनता को यह बताए कि उसने अपने शासनकाल में मनरेगा को कैसे लागू किया था.

क्या होगा सियासी असर

8 जनवरी से शुरू होने वाले “मनरेगा बचाओ संग्राम” के बीच यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में मनरेगा और VB-G RAM G कानून को लेकर राजनीतिक टकराव और तेज होगा. ऐक तरफ कांग्रेस इसे गरीबों के अधिकारों का मुद्दा बता रही है, तो दूसरी तरफ सरकार इसे पारदर्शिता और सुधार का कदम बता रही है. शिवराज सिंह चौहान के तीखे पलटवार के बाद यह बहस सिर्फ कानून तक सीमित नहीं रही, बल्कि भ्रष्टाचार, जवाबदेही और विकास की राजनीति तक पहुंच गई है.

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Published: 4 Jan, 2026 | 12:36 PM

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