किसान महापंचायत से पहले MP में बयानबाजी तेज, मोहन यादव ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

कांग्रेस इस किसान महापंचायत को बड़े किसान अभियान की शुरुआत बता रही है. पार्टी का आरोप है कि केंद्र और राज्य सरकार की नीतियां किसानों के हित में नहीं हैं. विशेष रूप से अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर कांग्रेस ने इसे किसान विरोधी करार दिया है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 24 Feb, 2026 | 09:31 AM

MP Kisan Mahapanchayat 2026: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में प्रस्तावित कांग्रेस की किसान महापंचायत से पहले राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है. एक ओर कांग्रेस इसे राष्ट्रीय स्तर पर किसानों के मुद्दों को उठाने की बड़ी शुरुआत बता रही है, तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर किसानों को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया है. महापंचायत से पहले ही बयानबाजी का दौर तेज हो गया है और दोनों दल आमने-सामने नजर आ रहे हैं.

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों के नाम पर राजनीति करने वालों को पहले अपने पिछले कार्यकाल का हिसाब देना चाहिए. उन्होंने राहुल गांधी से आत्ममंथन करने की बात कहते हुए उन पर देश और आस्था के मुद्दों पर भी सवाल उठाए. सीएम का कहना है कि प्रदेश सरकार ने बीते समय में किसानों के हित में कई बड़े फैसले लिए हैं, जिनका सीधा लाभ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला है.

कांग्रेस की महापंचायत और ट्रेड डील का मुद्दा

कांग्रेस इस किसान महापंचायत को बड़े किसान अभियान की शुरुआत बता रही है. पार्टी का आरोप है कि केंद्र और राज्य सरकार की नीतियां किसानों के हित में नहीं हैं. विशेष रूप से अमेरिका के साथ प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर कांग्रेस ने इसे किसान विरोधी करार दिया है. पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि विदेशी कृषि उत्पादों को ज्यादा छूट दी गई, तो इसका असर स्थानीय किसानों पर पड़ेगा.

हालांकि मुख्यमंत्री ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सरकार किसानों के हितों से किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगी. उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में सिंचाई का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है और नई औद्योगिक इकाइयों से कृषि आधारित रोजगार को भी बढ़ावा मिल रहा है.

भावांतर योजना और बोनस पर सरकार का जोर

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने बयान में कहा कि सोयाबीन किसानों को भावांतर योजना के तहत 1500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी गई है. उनका कहना है कि इससे लाखों किसानों को राहत मिली है और उन्हें उचित मूल्य मिल सका है. अब सरकार सरसों की फसल को भी भावांतर योजना में शामिल करने पर विचार कर रही है.

इसके साथ ही उड़द की खेती को बढ़ावा देने के लिए 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने की तैयारी की बात भी कही गई है. सरकार का तर्क है कि फसल विविधीकरण से किसानों की आय बढ़ेगी और वे एक ही फसल पर निर्भर नहीं रहेंगे. सरसों के रकबे में 27 प्रतिशत वृद्धि का दावा करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे किसानों के भरोसे का परिणाम बताया.

कृषि क्षेत्र में उपलब्धियों का दावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने अपने लंबे शासनकाल में जो कार्य नहीं किए, वह उनकी सरकार ने कम समय में पूरे किए हैं. उन्होंने दलहन उत्पादन में बढ़ोतरी, मसूर और चना के उपार्जन की व्यवस्था तथा पीला मोजेक जैसी समस्याओं से जूझ रहे किसानों को राहत देने के प्रयासों का भी उल्लेख किया.

सरकार का कहना है कि सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार, टेक्सटाइल पार्क की स्थापना और कृषि से जुड़े उद्योगों को प्रोत्साहन देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है. उनका दावा है कि प्रदेश में कृषि उत्पादन लगातार बढ़ रहा है और किसानों को बाजार से बेहतर जुड़ाव मिल रहा है.

सियासत के बीच किसान केंद्र में

भोपाल की किसान महापंचायत से पहले जिस तरह से आरोप-प्रत्यारोप तेज हुए हैं, उससे साफ है कि किसान मुद्दा अब प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ चुका है. एक तरफ कांग्रेस सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रही है, तो दूसरी ओर सरकार अपने कामकाज और योजनाओं को ऐतिहासिक बता रही है.

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि किसान महापंचायत में कौन से मुद्दे प्रमुखता से उठते हैं और सरकार किस तरह उनका जवाब देती है. फिलहाल, भोपाल में किसान राजनीति का बड़ा मंच तैयार हो चुका है और प्रदेश की सियासत का रुख काफी हद तक इसी पर निर्भर करता दिख रहा है.

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