संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने भारत अमेरिकी व्यापार समझौते के विरोध में हल्लाबोल दिया है. संगठन ने देशभर के गावों में पंचायत करने और राजधानियों में महापंचायत का ऐलान किया है. गांवों में जनता के साथ पंचायत कर उन्हें अमेरिकी डील से होने वाले नुकसान के बारे में बताने का आह्वान किया गया है. राष्ट्रपति के नाम खुली चिट्ठी भी लिखी गई है, जिसमें द्रौपदी मुर्मू से अपील की गई है कि वह पीएम मोदी से कहें कि अमेरिकी समझौता न किया जाए. इसके अलावा वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को बर्खास्त करने की मांग की गई है. एसकेएम शुरू से ही पीयूष गोयल का इस्तीफा मांग रहा है.
गांवों में पंचायत करेंगे किसान
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने पूरे भारत के किसानों से इंडिया-US अंतरिम ट्रेड डील के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर गांवों में पंचायत करने को कहा है. किसान संगठनों का समूह संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि है 9 मार्च से पहले देश भर की गांव-गांव मीटिंग में राष्ट्रपति को लिखे गए एक ओपन लेटर को अपनाने की अपील की, ताकि उसे पास किया जा सके. बता दें कि संसद का बजट सेशन ब्रेक के बाद 9 मार्च से फिर से शुरू हो रहा है.
राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी पर समझौता नहीं करने की अपील
SKM ने अपने लेटर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को US ट्रेड डील पर आगे न बढ़ने का निर्देश देने की अपील की है. इसमें कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल को “मल्टीनेशनल कॉर्पोरेशन्स की लूट के लिए खेती को खोलने पर सहमत होने” के लिए बर्खास्त करने की भी मांग की है और उनसे फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण को जनवरी में जारी लेटर वापस लेने का निर्देश देने को कहा है.
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धान और गेहूं बोनस रोकने का विरोध
एसकेएम के लेटर में कहा गया है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 9 जनवरी को राज्य सरकारों से धान और गेहूं किसानों को दिया जा रहा बोनस खत्म करने को कहा था. इसको लेकर किसान संगठन ने विरोध किया है और राज्यों को दिए आदेश को वापस लेने की मांग की है. SKM की मीडिया सेल ने एक बयान में कहा कि किसान गांव के पोस्ट ऑफिस तक जुलूस निकालेंगे और लेटर राष्ट्रपति भवन भेजेंगे.
राष्ट्रपति को लिखे ओपन लेटर में ये मांगें भी की गईं
- अमेरिका के साथ डील के तहत इंडस्ट्रियल और एग्रीकल्चरल सामानों पर इंडियन एग्रीकल्चर टैरिफ और नॉन-टैरिफ रुकावटों को खत्म या कम होने से बचाएं.
- कॉम्पिटिटिव कीमत वाले रशियन क्रूड ऑयल का इम्पोर्ट रोकने और तेल खरीद पर U.S. सर्विलांस की इजाज़त देने की मांगों को खारिज करें.
- हर साल $100 बिलियन की U.S. एनर्जी, टेक्नोलॉजी, फूड और एग्रीकल्चरल प्रोडक्ट खरीदने की मजबूरी का विरोध करें.
- 11 फीसदी कॉटन इम्पोर्ट ड्यूटी को वापस लेकर घरेलू कॉटन किसानों की सुरक्षा बनाए रखें, जिससे कीमतों को नुकसान हुआ है.
- भारतीय किसानों को सेब, मक्का (मक्का), सोयाबीन, डेयरी प्रोडक्ट और गेहूं जैसे सब्सिडी वाले U.S. प्रोडक्ट के इम्पोर्ट से बचाएं, जो लोकल प्रोडक्शन के लिए खतरा हैं.
- मार्केट खोलने और इनपुट सब्सिडी कम करने की U.S. की मांगों से खतरे में पड़े इंडिया के सब्सिडी, प्रोक्योरमेंट और फूड सिक्योरिटी उपायों को बचाएं.
- ट्रेड डील के तहत भारतीय बीज और खेती के सामान के बाजारों को U.S. के लिए खोलने से रोकें और भारत की बायोडायवर्सिटी और किसानों की आजादी की रक्षा करें.