SSP Fertilizer: खरीफ सीजन में हर साल बड़ी संख्या में किसान डीएपी और यूरिया की उपलब्धता को लेकर चिंता में रहते हैं. समय पर खाद नहीं मिलने से फसलों की बढ़वार प्रभावित होने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में कृषि वैज्ञानिक प्रमोद कुमार के अनुसार, किसानों को केवल डीएपी पर निर्भर रहने के बजाय वैकल्पिक उर्वरकों का भी उपयोग करना चाहिए. बाजार में सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) और नैनो यूरिया जैसे विकल्प पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हैं, जो कम लागत में बेहतर परिणाम देने में मदद कर सकते हैं. सही मात्रा और संतुलित उपयोग से फसल उत्पादन के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहती है.
SSP क्यों माना जाता है डीएपी का बेहतर विकल्प?
कृषि वैज्ञानिक प्रमोद कुमार के अनुसार, सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) फॉस्फोरस युक्त उर्वरक है, जिसमें लगभग 16 प्रतिशत फॉस्फोरस, 11 प्रतिशत सल्फर और कैल्शियम भी पाया जाता है. यह पौधों की जड़ों को मजबूत बनाने, बेहतर विकास करने और फसल की गुणवत्ता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. SSP में मौजूद सल्फर पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक माना जाता है. इसका असर धीरे-धीरे दिखाई देता है, लेकिन इसका प्रभाव लंबे समय तक बना रहता है. विशेषज्ञों का कहना है कि डीएपी के अत्यधिक उपयोग से जहां मिट्टी कठोर हो सकती है, वहीं SSP मिट्टी की संरचना को बेहतर बनाए रखने और उसकी उर्वरता बढ़ाने में मदद करता है.
कम कीमत में ज्यादा फायदा, नैनो यूरिया भी उपयोगी
विशेषज्ञों के अनुसार, डीएपी की तुलना में SSP काफी सस्ता विकल्प है. जहां डीएपी की एक बोरी की कीमत लगभग 1,350 से 1,500 रुपये तक होती है, वहीं SSP की एक बोरी लगभग 300 से 400 रुपये में उपलब्ध हो जाती है. इससे किसानों की लागत में उल्लेखनीय कमी आ सकती है. इसके अलावा नैनो यूरिया भी आधुनिक और प्रभावी विकल्प माना जा रहा है. इसकी 500 मिलीलीटर की एक बोतल पारंपरिक 45 किलोग्राम यूरिया के बराबर प्रभाव देने की क्षमता रखती है. यह पौधों को पत्तियों के माध्यम से नाइट्रोजन उपलब्ध कराता है, जिससे पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग होता है और फसल की बढ़वार में सुधार देखने को मिलता है.
संतुलित मात्रा में करें उर्वरकों का उपयोग
कृषि वैज्ञानिक प्रमोद कुमार के अनुसार, किसानों को किसी भी उर्वरक का एक साथ अधिक मात्रा में उपयोग नहीं करना चाहिए. कपास, सोयाबीन, मिर्च और अन्य खरीफ फसलों में SSP, पोटाश और यूरिया का संतुलित उपयोग बेहतर परिणाम देता है. विशेषज्ञों की सलाह है कि प्रति एकड़ लगभग 200 किलोग्राम SSP, 25 किलोग्राम पोटाश और 140 से 150 किलोग्राम यूरिया का उपयोग अलग-अलग चरणों में किया जाए. इससे पौधों को जरूरत के अनुसार पोषक तत्व मिलते रहते हैं और उर्वरकों की बर्बादी भी कम होती है. वैज्ञानिकों का मानना है कि संतुलित पोषण प्रबंधन अपनाकर किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. साथ ही SSP और नैनो यूरिया जैसे विकल्पों को अपनाकर डीएपी पर निर्भरता भी कम की जा सकती है, जिससे खेती अधिक टिकाऊ और लाभदायक बन सकती है