खाद संकट के बीच किसानों के लिए राहत, यूरिया-डीएपी से भरे 4 जहाज भारत आ रहे.. आपूर्ति बढ़ेगी

Fertilizer Supply India: खरीफ सीजन से पहले किसानों के लिए राहत की खबर है. यूरिया, डीएपी और सल्फर से भरे चार जहाज भारत की ओर रवाना हो चुके हैं, जो कृष्णापट्टनम, काकीनाडा, पारादीप और मुंद्रा बंदरगाहों पर पहुंचेंगे. सरकार के अनुसार देश में खाद का उत्पादन, आयात और भंडार पर्याप्त है, जिससे किसानों को उर्वरकों की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा.

Isha Gupta
नोएडा | Updated On: 23 Jun, 2026 | 01:53 PM

Urea Supply India: देश के कई राज्यों में खरीफ सीजन के दौरान खाद की मांग तेजी से बढ़ जाती है. ऐसे समय में किसानों की सबसे बड़ी चिंता समय पर यूरिया और डीएपी जैसी जरूरी खाद की उपलब्धता को लेकर होती है. हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के कारण उर्वरकों की सप्लाई को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई थीं. लेकिन अब किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. यूरिया, डीएपी और सल्फर से लदे 4 बड़े मालवाहक जहाज सुरक्षित रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पार कर भारत की ओर रवाना हो चुके हैं.

इन चार जहाजों में लगभग 1 लाख 80 हजार टन उर्वरक और खाद उत्पादन के लिए कच्चा मील है. इस खेप में करीब 92,250 टन यूरिया शामिल है. सरकार का कहना है कि, इन जहाजों के भारत पहुंचने के बाद खाद का भंडार और मजबूत होगा, जिससे खरीफ फसलों की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी.

भारत के इन बंदरगाहों पर पहुंचेगी खाद

रसायन और उर्वरक मंत्रालय के ताजा अपडेट के अनुसार यूरिया, डीएपी और सल्फर लेकर आ रहे ये जहाज देश के अलग-अलग बंदरगाहों पर पहुंचेंगे. इनमें से दो जहाजों में 50,000 टन और 42,750 टन यूरिया है. ये जहाज कृष्णापट्टनम, काकीनाडा, पारादीप और मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचेंगे. जहाजों के पहुंचने के बाद खाद को अलग-अलग राज्यों में भेजा जाएगा, ताकि किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराया जा सके. सरकार का मानना है कि, इससे खरीफ सीजन के दौरान सप्लाई चेन को मजबूत बनाए रखने में मदद मिलेगी.

देश में बढ़ा खाद का भंडार, बिक्री भी हुई ज्यादा

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 22 जून 2026 तक देश में कुल करीब 196 लाख टन उर्वरकों का भंडार मौजूद था, जबकि पिछले साल इसी समय यह लगभग 169 लाख टन था. यानी इस बार किसानों के लिए खाद का स्टॉक पहले के मुकाबले ज्यादा उपलब्ध है. इसमें यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी और एसएसपी जैसे प्रमुख उर्वरक शामिल हैं. एसएसपी को छोड़कर बाकी सभी प्रमुख खादों का भंडार पिछले साल से अधिक बताया गया है.

वहीं, खाद की मांग भी बढ़ी है. 1 मार्च से 21 जून 2026 के बीच देश में करीब 153 लाख टन उर्वरकों की बिक्री हुई, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह करीब 140 लाख टन थी. इससे साफ है कि खरीफ सीजन को देखते हुए किसानों ने खाद की खरीद बढ़ा दी है और खेती की तैयारियां तेजी से चल रही हैं.

खाद का उत्पादन बढ़ा

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च से अब तक देश में 133 लाख टन से अधिक उर्वरकों का उत्पादन किया जा चुका है. वहीं विदेशों से भी बड़ी मात्रा में खाद का आयात किया गया है. सरकार लगातार घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ आयात के जरिए भी खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने में जुटी हुई है. इसका मकसद किसानों को किसी तरह की कमी का सामना न करना पड़े.

खरीफ सीजन के लिए पहले से की गई तैयारी

खरीफ सीजन को देखते हुए सरकार ने किसानों के लिए खाद की पर्याप्त व्यवस्था करने का दावा किया है. इसके तहत विदेशों से बड़ी मात्रा में यूरिया खरीदने के समझौते किए गए हैं. साथ ही फास्फेट और पोटाश वाले उर्वरकों का भी पर्याप्त भंडार रखा गया है.

सरकार का कहना है कि खरीफ फसलों की बुवाई और देखभाल के दौरान किसानों को खाद की कमी का सामना न करना पड़े, इसके लिए जरूरी इंतजाम पहले ही कर लिए गए हैं. इससे किसानों को समय पर खाद मिलने की उम्मीद है और खेती के काम में कोई बड़ी परेशानी नहीं आएगी.

कई देशों से आ रही है खाद की सप्लाई

भारत अपनी जरूरत का कुछ हिस्सा घरेलू उत्पादन से पूरा करता है, जबकि बाकी उर्वरकों का आयात अलग-अलग देशों से किया जाता है. यूरिया की आपूर्ति ओमान, मलेशिया, वियतनाम, नाइजीरिया, रूस, मिस्र और अन्य देशों से की जा रही है. वहीं डीएपी और एनपीके खाद की सप्लाई भी कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों से लगातार जारी है. इससे वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत अपनी खाद जरूरतों को पूरा करने में सक्षम बना हुआ है.

पिछले साल के मुकाबले बढ़ा स्टॉक

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस समय देश में उर्वरकों का कुल भंडार पिछले साल की तुलना में काफी अधिक है. यूरिया, डीएपी, एनपीके और पोटाश समेत अधिकांश प्रमुख उर्वरकों के स्टॉक में बढ़ोतरी दर्ज की गई है. पर्याप्त भंडार होने से किसानों को खाद की उपलब्धता बेहतर रहेगी और अचानक मांग बढ़ने पर भी सप्लाई प्रभावित नहीं होगी. खरीफ सीजन के दौरान धान, मक्का, सोयाबीन, कपास और दलहन जैसी फसलों के लिए खाद की मांग बढ़ जाती है.

ऐसे में सरकार राज्यों, सहकारी समितियों और वितरण एजेंसियों के साथ मिलकर लगातार निगरानी कर रही है. सरकार का दावा है कि देश में खाद सुरक्षा मजबूत बनी हुई है और किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं.

कितने दिन में किसानों तक पहुंचेगी खाद

पश्चिम एशियाई देशों से उर्वरक लेकर भारत आ रहे जहाजों के 5 दिनों में भारतीय बंदरगाहों में पहुंचने की उम्मीद है. उसके बाद करीब 2 दिन उर्वरकों को उतारने और 2 दिन कंपनियों में पहुंचने का समय लग सकता है. जबकि, प्रॉसेसिंग में करीब एक सप्ताह का समय लग सकता है. इस तरह देखें तो करीब 25 दिनों में यह खाद बाजार में पहुंचने की उम्मीद है. ऐसे में जानकारों का कहना है कि किसानों तक खाद आपूर्ति बढ़ाने में और खाद संकट दूर करने में मदद मिलेगी.

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Published: 23 Jun, 2026 | 12:53 PM

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