अब बस्तर के ऑर्गेनिक उत्पादों की विदेशों में होगी धूम, किसानों को मिलेगा 3 से 4 गुना ज्यादा दाम

छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर की जैविक खेती को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की बड़ी योजना शुरू की है. जैविक गांवों का प्रमाणन कर उत्पादों को यूरोप समेत विदेशी बाजारों तक पहुंचाने की तैयारी है. इससे किसानों की आय बढ़ाने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और बस्तर की नई पहचान बनाने पर जोर दिया जाएगा.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 11 Jul, 2026 | 10:00 PM

Organic Farming: छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर संभाग की जैविक खेती को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने की दिशा में बड़ी पहल शुरू की है. उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने नवा रायपुर स्थित मंत्रालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि उन गांवों की पहचान की जाए, जहां किसानों ने आज तक रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं किया है. ऐसे गांवों का जैविक प्रमाणन कर उन्हें राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) से जोड़ा जाएगा, ताकि वहां के उत्पाद यूरोप सहित अन्य विदेशी बाजारों तक पहुंच सकें.

नक्सल मुक्त गांवों से मिली नई सोच, किसानों की आय बढ़ाने पर जोर

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि हाल ही में नारायणपुर, कांकेर और बस्तर के अन्य नक्सल मुक्त गांवों के दौरे के दौरान किसानों ने जानकारी दी कि उन्होंने वर्षों से अपने खेतों में किसी भी प्रकार के रासायनिक उर्वरक  का उपयोग नहीं किया है. सरकार ने इसे बस्तर की प्राकृतिक संपदा और विशेष कृषि पहचान के रूप में देखा है. उन्होंने कहा कि इन गांवों को जैविक खेती के मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा. जैविक प्रमाणन मिलने के बाद किसानों को उनके उत्पादों का मौजूदा कीमत से तीन से चार गुना अधिक मूल्य मिलने की संभावना है, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी.

यूरोपीय बाजारों तक पहुंचाने की तैयारी, सहकारी समितियों का होगा गठन

बैठक में राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) और सहभागी गारंटी प्रणाली (PGS) के तहत प्रमाणन प्रक्रिया को लेकर विस्तार से चर्चा की गई. सरकार ने गुणवत्ता, प्रमाणन और विपणन की पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य तय किया है. बस्तर के जैविक उत्पादों को यूरोप सहित अन्य देशों के बाजारों तक पहुंचाने के लिए रणनीति तैयार की जाएगी. इसके लिए ग्राम स्तर पर सहकारी समितियों का गठन किया जाएगा, जिससे किसान उत्पादन, संग्रहण और विपणन की प्रक्रिया में सीधे भागीदार बन सकें. सरकार का उद्देश्य बस्तर के ऑर्गेनिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना है.

संयुक्त दल करेंगे सर्वे, केंद्र से नियमों में छूट की मांग

उप मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के संचालक अश्विनी देवांगन के साथ दो संयुक्त दल गठित करने के निर्देश दिए हैं. ये दल एपीडा, कृषि विभाग और संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर नारायणपुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, कांकेर और बीजापुर जिलों का दौरा करेंगे. सर्वेक्षण के दौरान जैविक क्षेत्रों की पहचान, उत्पादों की टेस्टिंग और प्रमाणन संबंधी तकनीकी प्रक्रिया  पूरी की जाएगी. प्रमाणन के बाद उत्पादों का निर्यात ‘बिहान’ के छत्तीसकला ब्रांड के माध्यम से किया जाएगा. साथ ही, बस्तर की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए एनपीओपी प्रमाणन के लिए आवश्यक तीन वर्ष की अवधि में छूट देने के लिए केंद्र सरकार को पत्र भेजने के निर्देश भी दिए गए हैं. सरकार वनोपज को भी निर्यात के लिए तैयार करने की योजना बना रही है, ताकि स्थानीय लोगों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिल सके.

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Published: 11 Jul, 2026 | 10:00 PM

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