Litchi Farming: जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में इस वर्ष लीची उत्पादन ने नया रिकॉर्ड बनाया है. जिले में लगभग 300 मीट्रिक टन लीची का उत्पादन हुआ है, जिससे स्थानीय बागवानी क्षेत्र को बड़ा आर्थिक लाभ मिल रहा है. बाजार में लीची की कीमत 200 रुपये प्रति किलो से अधिक मिलने के कारण किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. ANI के एक प्रकाशित विडियो में मुख्य बागवानी अधिकारी अश्वनी शर्मा ने बताया कि सरकारी योजनाओं और आधुनिक बागवानी तकनीकों के कारण उत्पादन में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है.
300 मीट्रिक टन उत्पादन से बढ़ी किसानों की आय
इस वर्ष कठुआ जिले में लीची का उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है. अधिकारियों के अनुसार, जिले में लगभग 300 मीट्रिक टन लीची का उत्पादन हुआ है. बाजार में इसकी कीमत 200 रुपये प्रति किलो से अधिक होने के कारण किसानों को अच्छी आमदनी हो रही है. मुख्य बागवानी अधिकारी अश्वनी शर्मा ने कहा कि लीची एक उच्च मूल्य वाली फसल है, जो अन्य कई पारंपरिक फसलों की तुलना में अधिक लाभ देती है. कम मेहनत और बेहतर बाजार मूल्य के कारण किसान तेजी से इस फसल की ओर आकर्षित हो रहे हैं.
कम मेहनत में अधिक मुनाफा देने वाली फसल
अश्वनी शर्मा के अनुसार, लीची ऐसी फसल है जिसमें अपेक्षाकृत कम श्रम की आवश्यकता होती है, लेकिन इसका आर्थिक लाभ काफी अधिक होता है. इसकी सबसे बड़ी विशेषता ये है कि यह हर वर्ष उत्पादन देती है, जिससे किसानों को नियमित आय का स्रोत मिलता है. उन्होंने बताया कि अन्य फसलों की तुलना में लीची की खेती अधिक लाभकारी साबित हो रही है. यही कारण है कि जिले के कई किसान अब पारंपरिक खेती छोड़कर बागवानी की ओर रुख कर रहे हैं.
#WATCH | Kathua, J&K: On record litchi production boosting horticulture sector, Chief Horticulture Officer, Ashwani Sharma, says, “…litchi is a high-value crop that offers excellent returns. Compared to other crops, it requires minimal effort yet yields the highest profit, and… pic.twitter.com/UoGh2H3HKl
— ANI (@ANI) June 23, 2026
लगभग जैविक फसल के रूप में उभर रही लीची
लीची की खेती का एक बड़ा फायदा यह भी है कि इसमें कीट और बीमारियों का प्रकोप अपेक्षाकृत कम होता है. इसके चलते किसानों को कीटनाशकों का बहुत कम उपयोग करना पड़ता है. अधिकारियों का कहना है कि न्यूनतम रासायनिक उपयोग के कारण यह फसल लगभग जैविक स्वरूप में तैयार होती है. इससे न केवल उत्पादन लागत कम होती है बल्कि बाजार में इसकी मांग और कीमत भी बेहतर मिलती है. उपभोक्ता भी सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण फलों को प्राथमिकता दे रहे हैं.
सरकारी योजनाओं और स्थानीय रोजगार को मिला बढ़ावा
मुख्य बागवानी अधिकारी ने बताया कि विभिन्न सरकारी योजनाओं, विशेष रूप से बागवानी विकास कार्यक्रमों के तहत पुराने लीची बागानों के जीर्णोद्धार और नई तकनीकों को बढ़ावा दिया गया है. इन प्रयासों का सकारात्मक असर उत्पादन पर साफ दिखाई दे रहा है. उन्होंने कहा कि पहले लीची की कटाई और अन्य कार्यों के लिए पंजाब तथा दूसरे राज्यों के मजदूरों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब कठुआ लीची उत्पादन में अग्रणी बन चुका है. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं. अधिकारियों का मानना है कि नई योजनाओं से प्रोत्साहित होकर आने वाले वर्षों में और अधिक किसान लीची की खेती अपनाएंगे, जिससे जिले की अर्थव्यवस्था को और मजबूती मिलेगी.