ग्राफ्टेड आम की खेती करेंगे किसान, 200 हेक्टेयर में ड्रैगन फ्रूट लगवाएगा उद्यान विभाग

Grafted Mango and Dragon Fruit Farming : उद्यान विभाग के सहायक संचालक पतराम सिंह ने कहा कि विभाग इस वर्ष 200 हेक्टेयर क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले ग्राफ्टेड आम के पौधे लगाने की तैयारी कर रहा है. राज्य के उन हिस्सों को चयनित किया गया है जो बागवानी के लिए वातावरण के हिसाब से अनुकूल हैं.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 21 Jun, 2026 | 08:01 PM

Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को आधुनिक तरीके से बागवानी की खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. उद्यान विभाग ने राज्य में 200 हेक्टेयर में ग्राफ्टेड तकनीक से आम की खेती कराने का निर्णय लिया है. इसके साथ ही ग्राफ्टेड विधि से ड्रैगन फ्रूट की खेती कराने के लिए भी योजना बनाई है. इसके लिए किसानों को चयनित कर उन्हें ग्राफ्टेड पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं. साथ ही किसानों को बागवानी खेती की ट्रेनिंग भी दी जा रही है.

फलों की खेती के लिए 200 हेक्टेयर में भूमि चयनित

छत्तीसगढ़ के उद्यान विभाग के अनुसार कोरबा जिले में किसानों की आय बढ़ाने और बागवानी को प्रोत्साहित करने के लिए उद्यान विभाग ने विशेष पहल शुरू की है. उद्यान विभाग के सहायक संचालक पतराम सिंह ने कहा कि विभाग इस वर्ष 200 हेक्टेयर क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले ग्राफ्टेड आम के पौधे लगाने की तैयारी कर रहा है. राज्य के उन हिस्सों को चयनित किया गया है जो बागवानी के लिए वातावरण के हिसाब से अनुकूल हैं.

आम के साथ ड्रैगन फ्रूट की खेती करेंगे किसान

कोरबा जिले में उद्यान विभाग के सहायक संचालक पतराम सिंह ने कहा कि किसानों की कमाई बढ़ाने के लिए कमर्शियल फलों की खेती की ओर कदम बढ़ाने के लिए अन्नदाताओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि किसानों को आम के साथ ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है. किसानों को ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए भी पौधे भी विभाग की ओर से उपलब्ध कराए जाएंगे.

Grafting Mango and dragon fruit farming in chhattisgarh

उद्यान विभाग के सहायक संचालक पतराम सिंह ने जानकारी दी.

उद्यान विभाग देगा ग्राफ्टिंग विधि से तैयार पौधे

उद्यान विभाग अपनी नर्सरी में उच्च नस्ल के ग्राफ्टेड आम के पौधे तैयार कर रहा है. ग्राफ्टिंग (Grafting) के जरिए पौधों को उगाने की एक ऐसी कृत्रिम तकनीक है, जिसमें दो अलग-अलग पौधों के हिस्सों को आपस में इस तरह जोड़ा जाता है कि वे एक ही पौधे के रूप में विकसित होते हैं. इस विधि का उपयोग मुख्य रूप से फलों, फूलों और सब्जियों की उन्नत किस्में तैयार करने के लिए किया जाता है. उन्होंने कहा कि नर्सरी में तैयार पौधों को जिले के किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे कम समय में बेहतर उत्पादन और अधिक आय मिलना पक्का हो सकेगा.

फल उत्पादन और किसानों की कमाई बढ़ाना उद्देश्य

सहायक संचालक पतराम सिंह ने कहा कि जिले में पारंपरिक खेती के साथ-साथ अब फलोद्यान आधारित खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है. राष्ट्रीय उद्यानिकी मिशन और जिला खनिज न्यास मद के सहयोग से संचालित इस योजना का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती से आगे बढ़ाकर लाभकारी बागवानी फसलों की ओर आकर्षित करना है. इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि जिले में फल उत्पादन का दायरा भी बढ़ेगा.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 21 Jun, 2026 | 07:56 PM

लेटेस्ट न्यूज़