पकने से पहले क्यों फट जाते हैं केले? समझें वजह और बचाव के आसान उपाय

फल फटने से केवल दिखावट खराब नहीं होती, बल्कि उसकी गुणवत्ता और भंडारण क्षमता भी घट जाती है. ऐसे फल जल्दी सड़ने लगते हैं और व्यापारी कम कीमत देते हैं. इसलिए इस समस्या को समझना और समय रहते रोकना बहुत जरूरी है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 24 Feb, 2026 | 09:10 AM

Fruit cracking: केले की खेती भारत में लाखों किसानों की रोजी-रोटी का सहारा है. यह ऐसी नकदी फसल है, जो सही देखभाल के साथ अच्छा मुनाफा देती है. लेकिन कई बार जब फसल कटाई के करीब होती है, तब अचानक फल फटने लगते हैं. किसान के लिए यह सबसे निराशाजनक पल होता है. पूरे साल की मेहनत के बाद अगर फल ही खराब हो जाएं, तो बाजार में सही दाम मिलना मुश्किल हो जाता है. इस समस्या को ही “फ्रूट क्रैकिंग” कहा जाता है.

फल फटने से केवल दिखावट खराब नहीं होती, बल्कि उसकी गुणवत्ता और भंडारण क्षमता भी घट जाती है. ऐसे फल जल्दी सड़ने लगते हैं और व्यापारी कम कीमत देते हैं. इसलिए इस समस्या को समझना और समय रहते रोकना बहुत जरूरी है.

आखिर फल फटते क्यों हैं?

केले के फटने की सबसे बड़ी वजह है पानी का असंतुलन. जब पौधे को लंबे समय तक कम पानी मिलता है और फिर अचानक ज्यादा पानी मिल जाता है चाहे बारिश से या सिंचाई से तो फल के अंदर का हिस्सा तेजी से बढ़ता है. लेकिन छिलका उतनी जल्दी फैल नहीं पाता. अंदर और बाहर के इस दबाव के फर्क से छिलके पर दरार पड़ जाती है.

पोषक तत्वों की कमी भी बड़ी वजह बनती है. अगर मिट्टी में पोटैशियम, कैल्शियम या बोरॉन कम हो, तो फल का छिलका मजबूत नहीं बन पाता. ऐसे में पकते समय हल्का सा दबाव भी दरार पैदा कर देता है. कई बार तेज गर्मी, फिर अचानक ठंडा मौसम या तेज हवा भी फल को नुकसान पहुंचा देती है.

सही पोषण से मजबूत बनता है फल

केले की फसल में संतुलित खाद देना बहुत जरूरी है. पोटैशियम फल को मजबूत और चमकदार बनाता है. कैल्शियम छिलके की मजबूती बढ़ाता है, जिससे वह दबाव सह सके. इसलिए मिट्टी की जांच करवाकर ही खाद डालनी चाहिए.

जैविक खाद जैसे गोबर की सड़ी खाद या वर्मी कम्पोस्ट मिट्टी को उपजाऊ बनाती है. इससे जड़ें अच्छी तरह विकसित होती हैं और पौधा पानी को संतुलित तरीके से लेता है. स्वस्थ पौधा ही स्वस्थ फल देता है.

रोगों से बचाव भी जरूरी

कई बार फलों में फंगल रोग लग जाते हैं, जिससे छिलका कमजोर हो जाता है. ऐसे में फल जल्दी फट सकता है. खेत में नमी ज्यादा रहने पर यह समस्या बढ़ जाती है. इसलिए खेत में पानी जमा न होने दें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह से फफूंदनाशक का उपयोग करें.

फसल की नियमित निगरानी करना बहुत जरूरी है. अगर समय रहते बीमारी पकड़ में आ जाए, तो बड़ा नुकसान टाला जा सकता है.

सिंचाई का संतुलन ही असली कुंजी

केले के लिए नियमित और बराबर पानी जरूरी है. ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाने से मिट्टी में नमी का स्तर स्थिर रहता है. इससे अचानक पानी की अधिकता नहीं होती और फल सुरक्षित रहते हैं.

फल के गुच्छों को सहारा देना भी जरूरी है, ताकि उनका वजन तने पर ज्यादा दबाव न डाले. कुछ किसान धूप से बचाने के लिए गुच्छों को पत्तों से ढक देते हैं, जिससे छिलका सुरक्षित रहता है.

सजग किसान ही बचा सकता है फसल

केले का फल फटना कोई लाइलाज समस्या नहीं है. अगर किसान पानी, खाद और रोग प्रबंधन पर ध्यान दें, तो इस नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है. खेती में छोटी-छोटी सावधानियां ही बड़े नुकसान से बचाती हैं. सही देखभाल से न केवल उपज अच्छी होगी, बल्कि बाजार में बेहतर कीमत भी मिलेगी.

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