भारत में महंगा पर पाकिस्तान में क्यों सस्ता हो रहा पेट्रोल-डीजल, चौंका देगी वजह
ईरान-इजरायल तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव जारी है, लेकिन कई देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े हैं. भारत में भी पिछले महीनों में ईंधन महंगा हुआ है, जबकि पाकिस्तान में कीमतें घट रही हैं. अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के रुझान, IMF शर्तें और तेल कंपनियों की नीति इसका मुख्य कारण मानी जा रही हैं.
Pakistan Petrol Price: ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच जारी तनाव के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है, जिससे कई देशों में पेट्रोल-डीजल महंगा हो गया है. पिछले तीन महीनों में अधिकतर देशों में ईंधन के दाम बढ़े हैं. भारत में भी मई से अब तक पेट्रोल की कीमत में करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 7.50 से 7.80 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी हुई है. तेल कंपनियों ने यह बढ़ोतरी चार चरणों में की है, जिससे परिवहन और आम लोगों की लागत बढ़ गई है. दिल्ली में अभी पेट्रोल करीब 102 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है. वहीं, इसके उलट पाकिस्तान में ईंधन की कीमतों में कटौती की गई है, जिससे वहां पेट्रोल और डीजल सस्ता हो गया है…
जानकारों को मुताबिक, ईरान-इजरायल तनाव और मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक संकट के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है. इसके बावजूद पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतों में लगातार चार बार कटौती की गई है. अभी तक पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 22 रुपये तक की कटौती की गई है. इन कटौतियों के बाद देश में पेट्रोल का खुदरा मूल्य घटकर 377.78 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हो गया है. इससे आम जनता ने राहत की सांस ली है. लेकिन ऐसे में सवाल उठा रहा है आखिर आर्थिक रूप से कमजोर देश होने के बावजूद पाकिस्तान कीमतों में बढ़ोतरी करने के बजाए कटौती कैसे कर रहा है.
पाकिस्तान में इन 5 वजहों से सस्ता हो रहा पेट्रोल
- मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार हर 15 दिन में पेट्रोल और डीजल की कीमतों की समीक्षा करती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति के अनुसार इन्हें बढ़ाती या घटाती है. चूंकि पाकिस्तान अपनी ज्यादातर ईंधन जरूरतों के लिए आयातित कच्चे तेल पर निर्भर है, इसलिए वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम होने पर वहां पेट्रोल और डीजल सस्ता हो जाता है. वहीं, कीमतें बढ़ने पर ईंधन के दाम भी बढ़ जाते हैं.
- मौजूदा वक्त में अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड ऑयल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई हैं. विशेषज्ञों का मानना है इसका फायदा पाकिस्तान को मिल रहा है. इस वजह से वहां की सरकार पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती कर रही है.
- एक्सपर्ट का ये भी कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पाकिस्तान को आर्थिक मदद यानी बेलआउट पैकेज देने के लिए कुछ सख्त शर्तें रखी थीं. इन्हीं शर्तों के तहत पाकिस्तान सरकार ने धीरे-धीरे ईंधन पर दी जाने वाली सब्सिडी खत्म कर दी है. अब वहां पेट्रोल-डीजल की कीमतें सरकार तय नहीं करतीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दामों के उतार-चढ़ाव के हिसाब से बदलती रहती है. इसके चलते भी कीमतें कम हो रही हैं.
- पाकिस्तानी रुपये की विनिमय दर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले स्थिर होने से आयात सस्ता हो गया है. इसका कारण यह है कि पाकिस्तान को कच्चा तेल और अन्य जरूरी सामान डॉलर में खरीदना पड़ता है. जब रुपया मजबूत या स्थिर रहता है, तो डॉलर कम लगते हैं, जिससे आयात की लागत घट जाती है. इसी वजह से वहां ईंधन की कीमतें कम करना आसान हो गया है.
- पाकिस्तान सरकार पेट्रोल और डीजल पर पेट्रोलियम लेवी और कार्बन टैक्स जैसे अतिरिक्त शुल्क लगाती है. जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम कम होते हैं, तो सरकार इन टैक्सों में कमी या बदलाव करके लोगों को राहत देती है. इससे ईंधन की कीमतों पर सीधा असर पड़ता है और आम जनता को पेट्रोल-डीजल सस्ता मिलता है.
भारत में क्यों बढ़ रहीं ईंधन की कीमतें
वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में राहत के संकेत मिलने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम कम नहीं हो रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ समय पहले जब कच्चा तेल 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया था, तब सरकारी तेल कंपनियों- इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने बढ़ी हुई लागत के बावजूद देश में दाम नहीं बढ़ाए थे और ग्राहकों को पुरानी कीमतों पर ही ईंधन दिया था. इस दौरान इन कंपनियों को भारी नुकसान भी उठाना पड़ा था. अब जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कुछ गिरावट आई है, तो ये कंपनियां अपने पहले के नुकसान की भरपाई करने की कोशिश कर रही हैं, जिसके कारण देश में ईंधन के दाम उम्मीद के मुताबिक कम नहीं हो रहे हैं.