रूस ने पाकिस्तान को दी बड़ी राहत, आलू आयात से हटाया बैन.. जानें भारत पर क्या होगा असर

यह प्रतिबंध हटना पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी सकारात्मक खबर है, क्योंकि देश इस समय विदेशी मुद्रा की कमी और भारी कर्ज जैसी समस्याओं से जूझ रहा है. रूस के साथ व्यापार बढ़ने से बार्टर जैसे समझौतों के जरिए लेन-देन की संभावना भी बन सकती है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा.

नोएडा | Updated On: 11 Apr, 2026 | 04:22 PM

Potato export: पाकिस्तान को एक बड़ी राहत मिली है. रूस ने देश से आलू के आयात पर लगाया गया प्रतिबंध हटा दिया है. यह फैसला 8 अप्रैल से लागू हो गया है और इसे पाकिस्तानी किसानों के लिए एक बड़ा फायदा माना जा रहा है. अब पंजाब के आलू सीधे रूस के बाजारों में निर्यात किए जा सकेंगे, जिससे व्यापार के नए अवसर बढ़ेंगे. ऐसे यह प्रतिबंध मई 2025 में इसलिए लगाया गया था, क्योंकि रूस ने दावा किया था कि पाकिस्तानी आलू में कीट और वायरस पाए गए हैं. इसके जवाब में पाकिस्तान ने रूस की निगरानी संस्था Rosselkhoznadzor को वैज्ञानिक रिपोर्ट और लैब टेस्ट के नतीजे सौंपे. इन रिपोर्टों में यह साबित हुआ कि आलू सुरक्षित हैं और उनमें कोई हानिकारक रोग नहीं है, जिसके बाद प्रतिबंध हटा दिया गया. हालांकि, इससे पहले रूस ने भारत को आलू निर्यात करने को मंजूरी दी थी. अब ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान को मंजूरी मिलेने से भारत का कारोबार प्रभावित होगा.

कृषि विशेषज्ञ निर्मल यादव ने किसान इंडिया से बात करते हुए कहा कि भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आलू उत्पादक देश है. पाकिस्तान भारत के मुकाबले सीमित मात्रा में आलू का प्रोडक्शन करता है. अगर बैन हटने के बाद पाकिस्तान रूस को आलू निर्यात करता है, तो भारत पर बहुत कम असर पड़ेगा. हालांकि, उन्होंने कहा कि गुणत्ता के मामले में पाकिस्तान के कृषि उत्पाद भारत के सामने कहीं नहीं ठहरते हैं और विदेशों में बेस्ट क्वालिटी के खाद्य पदार्थों का ही निर्यात होता है. इसलिए भारत अगर अपने आलू की क्वालिटी मेंटेन रखता है, तो निर्यात पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

और भी कंपनियों को यह मंजूरी मिल सकती है

फिलहाल रूस ने पाकिस्तान की तीन कंपनियों को आलू निर्यात  की अनुमति दी है. इनमें चेज इंटरनेशनल, जहीद किनो ग्राइंडिंग एंड वैक्सिंग प्लांट और नेशनल फ्रूट शामिल हैं. आने वाले समय में और भी कंपनियों को यह मंजूरी मिल सकती है. पाकिस्तान के व्यापार अधिकारी नए निर्यातकों को जोड़ने और ऑनलाइन व्यापार बैठकें आयोजित करके आलू के निर्यात को और बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं.

पाकिस्तान में 1.2 करोड़ टन आलू उत्पादन

यह प्रतिबंध हटना पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी सकारात्मक खबर है, क्योंकि देश इस समय विदेशी मुद्रा की कमी और भारी कर्ज जैसी समस्याओं से जूझ रहा है. रूस के साथ व्यापार बढ़ने से बार्टर जैसे समझौतों के जरिए लेन-देन की संभावना भी बन सकती है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा. इसका फायदा किसानों को भी मिलेगा, क्योंकि पाकिस्तान ने इस साल रिकॉर्ड 1.2 करोड़ टन आलू का उत्पादन  किया है, जिसमें करीब 40 लाख टन अतिरिक्त (सरप्लस) है. ज्यादा उत्पादन के कारण किसानों को अच्छे दाम नहीं मिल पा रहे थे, लेकिन निर्यात बढ़ने से उनकी कमाई में सुधार होने की उम्मीद है.

पाकिस्तान के टोरखम बॉर्डर के बंद होने के बाद व्यापार पर असर पड़ा है, इसलिए अब देश चीन और ईरान के रास्तों से होकर मध्य एशियाई बाजारों तक पहुंचने के वैकल्पिक मार्ग तलाश रहा है. अब रूस को आलू निर्यात फिर से शुरू होने से इन कोशिशों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है, जिससे क्षेत्रीय व्यापार संबंध भी बेहतर होंगे और निर्यात के नए रास्ते खुलेंगे.

जनवरी में भारत को मिली थी निर्यात की मंजूरी

पाकिस्तान से पहले रूस ने भारत को आलू निर्यात की मंजूरी दी थी. भारत को ये मंजूरी रूस की अंतरराष्ट्रीय प्रयोगशाला से मिली ताजा रिपोर्ट के आधार पर मिली थी. रिपोर्ट ने यह साफ कर दिया था कि भारत में उगाई जा रही कुछ खास किस्में वैश्विक मानकों पर पूरी तरह खरी उतरती हैं. खास तौर पर 3797 और सूर्या किस्म के आलू ने गुणवत्ता, स्वाद और भंडारण के मामले में रूस की जांच में सफलता हासिल की थी. जबकि चिप्सोना किस्म इस बार मानकों पर खरी नहीं उतर पाई.

इन किस्मों का होता है निर्यात

दरअसल, पिछले साल उत्तर प्रदेश से तीन प्रमुख किस्मों 3797, सूर्या और चिप्सोना के आलू के सैंपल रूस भेजे गए थे. इन सैंपलों की जांच रूस की अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रयोगशालाओं में की गई, जहां आलू की संरचना, स्वाद, नमी, स्टोरेज क्षमता और घरेलू उपयोग की अनुकूलता जैसे कई पैमानों पर परीक्षण हुआ. जांच के नतीजों में 3797 और सूर्या किस्म ने सभी जरूरी मानकों को पूरा किया, जिसके बाद रूस ने इन दोनों किस्मों के आयात को बिना किसी शर्त के मंजूरी दे दी.

Published: 11 Apr, 2026 | 04:19 PM

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