उड़द बुवाई में 10 फीसदी बढ़ोतरी, 21 लाख हेक्टेयर के पार पहुंचा रकबा.. कीमतों में गिरावट शुरू
देश में उड़द की कीमतों में लगातार नरमी देखने को मिल रही है. मध्य और उत्तर भारत में बुवाई 10 फीसदी बढ़ने से बेहतर उत्पादन की उम्मीद है. कमजोर मांग और आयात बढ़ने की संभावना से भी बाजार पर दबाव है. विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम अनुकूल रहा तो सितंबर से नई फसल की आवक के साथ कीमतें और घट सकती हैं.
Black Gram Sowing: कुछ सप्ताह पहले तक लगातार बढ़ रही उड़द की कीमतों में अब नरमी देखने को मिल रही है. इसकी वजह मध्य और उत्तर भारत में उड़द की बुवाई बढ़ने से बेहतर उत्पादन की उम्मीद है. इसके अलावा दाल मिलों की ओर से मांग कमजोर रहने से भी कीमतों पर दबाव बना है. हालांकि, 31 जुलाई तक देश में उड़द की बुवाई 21.08 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जो पिछले साल की समान अवधि के 19.8 लाख हेक्टेयर के मुकाबले करीब 10 फीसदी अधिक है. हालांकि, कुल दलहनी फसलों का बुवाई क्षेत्र अभी भी पिछले साल की तुलना में कम बना हुआ है.
31 जुलाई तक उत्तर प्रदेश में उड़द की बुवाई सबसे ज्यादा बढ़ी है. यहां रकबा करीब 61 फीसदी बढ़कर 5.52 लाख हेक्टेयर हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 3.42 लाख हेक्टेयर था. मध्य प्रदेश में उड़द का रकबा 16 फीसदी बढ़कर 6.72 लाख हेक्टेयर पहुंच गया है. पिछले साल यहां 5.79 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी. वहीं, राजस्थान में 20 फीसदी बढ़ोतरी के साथ रकबा 3.75 लाख हेक्टेयर और गुजरात में 40 फीसदी बढ़कर 0.71 लाख हेक्टेयर हो गया है.
झारखंड में उड़द बुवाई में 72 फीसदी की बढ़ोतरी
झारखंड में सबसे अधिक 72 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जहां उड़द की बुवाई 0.44 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है. छत्तीसगढ़ में रकबा 21 फीसदी बढ़कर 0.58 लाख हेक्टेयर और आंध्र प्रदेश में 43 फीसदी बढ़कर 0.16 लाख हेक्टेयर हो गया है. हालांकि, सभी राज्यों में स्थिति एक जैसी नहीं है. कर्नाटक में उड़द की बुवाई 25 फीसदी घटकर 0.71 लाख हेक्टेयर रह गई है, जबकि महाराष्ट्र में इसमें 50 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. यहां रकबा पिछले साल के 3.58 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.76 लाख हेक्टेयर रह गया है.
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उड़द का ताजा मंडी भाव
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, देश में उड़द का औसत थोक मंडी भाव लगातार घट रहा है. 3 अगस्त तक उड़द का औसत थोक भाव 8,638 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जबकि एक सप्ताह पहले यह 8,908 रुपये और दो सप्ताह पहले 8,980 रुपये प्रति क्विंटल था. करीब तीन सप्ताह पहले उड़द का औसत थोक भाव 9,132.55 रुपये प्रति क्विंटल के हालिया उच्च स्तर पर पहुंच गया था. एक महीने पहले यह करीब 8,233 रुपये प्रति क्विंटल था.
उड़द की कीमतों में लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट
इंडिया पल्सेज एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (IPGA) की साप्ताहिक बाजार रिपोर्ट के मुताबिक, 1 अगस्त को समाप्त सप्ताह में घरेलू और आयातित दोनों तरह की उड़द की कीमतों में लगातार दूसरे सप्ताह गिरावट दर्ज की गई. एसोसिएशन का कहना है कि अधिक आयात की संभावना, म्यांमार से नरम भाव, रुपये की मजबूती, अच्छी बारिश के बाद खरीफ बुवाई बढ़ने और उड़द दाल व गोटा की कमजोर मांग के कारण दाल मिलों और कारोबारियों की खरीद धीमी है. यही वजह है कि उड़द की कीमतों पर दबाव बना हुआ है.
उड़द करीब 9,500 रुपये प्रति क्विंटल पर कारोबार कर रही
इंडिया पल्सेज एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (IPGA) के अनुसार, म्यांमार की एसक्यू (SQ) क्वालिटी की उड़द करीब 9,500 रुपये प्रति क्विंटल पर कारोबार कर रही है. यदि यह स्तर टूटता है तो कीमतें 9,350 रुपये प्रति क्विंटल तक आ सकती हैं. सितंबर और अक्टूबर की अग्रिम खरीद (फॉरवर्ड डील) भी मौजूदा कीमतों से कम भाव पर हो रही है. एसोसिएशन का कहना है कि हाल के सप्ताहों में खरीफ सीजन में उड़द की बुवाई अच्छी रही है. यदि मौसम अनुकूल बना रहता है तो इस बार बेहतर उत्पादन की उम्मीद है.