खाड़ी संकट से व्यापार पर बड़ा असर, मुंबई पोर्ट पर अटका 4,500 टन से ज्यादा प्याज… किसानों और निर्यातकों की बढ़ी चिंता

समस्या केवल खाड़ी बाजार तक सीमित नहीं है. कई निर्यातकों का कहना है कि यूरोप जाने वाला माल भी इसी मार्ग से होकर जाता था. हाल ही में भारत से यूरोप के लिए शिपमेंट की स्थिति सामान्य हुई थी, लेकिन अब सूएज नहर मार्ग पर अनिश्चितता के कारण जहाजों को केप ऑफ गुड होप के रास्ते घुमाया जा रहा है.

नई दिल्ली | Published: 3 Mar, 2026 | 09:07 AM

Israel iran war: पश्चिम एशिया में बढ़ते इजरायल ईरान संघर्ष का असर अब महाराष्ट्र के प्याज किसानों और निर्यातकों पर साफ दिखाई देने लगा है. नासिक और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों से खाड़ी देशों के लिए भेजे गए 150 से ज्यादा कंटेनर इस समय मुंबई के जवाहरलाल नेहरू पोर्ट (JNPT) पर फंसे हुए हैं. दुबई के बाजार में युद्ध जैसे हालात के कारण कारोबार ठप पड़ गया है, जिससे हजारों टन प्याज बंदरगाह पर ही अटक गया है.

4,500 टन से ज्यादा प्याज पोर्ट पर अटका

बिजनेसलाइन की खबर के मुताबिक हर कंटेनर में औसतन 29 से 30 टन प्याज भरा होता है. इस हिसाब से करीब 4,500 टन प्याज फिलहाल जेएनपीटी पर रुका हुआ है. ये खेप मुख्य रूप से दुबई के रास्ते खाड़ी देशों में भेजी जानी थी, खासकर ईद के मौके पर बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए.

मुंबई के एक प्रमुख निर्यातक ने बताया कि उनके अकेले के आठ कंटेनर फंसे हुए हैं. उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले तक जेबेल अली पोर्ट पर आंशिक रूप से काम शुरू होने की खबर आई थी, लेकिन कई शिपिंग कंपनियां दुबई जाने को तैयार नहीं हैं. ऐसे में पहले से लोड किए गए कंटेनरों को वापस उतारने की नौबत आ सकती है.

यूरोप जाने वाला माल भी प्रभावित

समस्या केवल खाड़ी बाजार तक सीमित नहीं है. कई निर्यातकों का कहना है कि यूरोप जाने वाला माल भी इसी मार्ग से होकर जाता था. हाल ही में भारत से यूरोप के लिए शिपमेंट की स्थिति सामान्य हुई थी, लेकिन अब सूएज नहर मार्ग पर अनिश्चितता के कारण जहाजों को केप ऑफ गुड होप के रास्ते घुमाया जा रहा है. इससे ट्रांजिट समय और लागत दोनों बढ़ गए हैं.

निर्यातकों के मुताबिक व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है. ईद के लिए होने वाली खरीद लगभग शून्य पर आ गई है. इससे घरेलू बाजार में भी दबाव बढ़ने की आशंका है.

कीमतों में गिरावट का खतरा

प्याज की खरीद में अचानक आई कमी से मंडियों में दाम गिर सकते हैं. पहले से ही किसानों को लागत बढ़ने और बाजार में कम भाव मिलने की मार झेलनी पड़ रही थी. अब निर्यात ठप होने से स्थिति और बिगड़ सकती है.

अगर लंबे समय तक कंटेनर पोर्ट पर ही खड़े रहे तो प्याज खराब होने का खतरा भी है. इससे किसानों और निर्यातकों दोनों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. निर्यातकों का कहना है कि उन्हें लाखों रुपये का नुकसान होने की आशंका है.

किसानों की सरकार से मांग

महाराष्ट्र राज्य प्याज उत्पादक किसान संगठन के अध्यक्ष भरत दिघोले ने केंद्र और राज्य सरकार से तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है. उन्होंने प्रति क्विंटल 1,500 रुपये की सब्सिडी देने, फंसे कंटेनरों पर पोर्ट शुल्क और डेमरेज माफ करने, निर्यात शुरू होने तक अस्थायी खरीद योजना लागू करने और युद्ध की स्थिति पर स्पष्ट नीति घोषित करने की मांग उठाई है.

किसानों का कहना है कि वे पहले ही निर्यात नीति में अनिश्चितता और बढ़ती लागत से परेशान हैं. ऐसे में युद्ध के कारण निर्यात पूरी तरह रुक जाना उनके लिए दोहरी मार जैसा है.

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि दुबई का बाजार कब पूरी तरह खुलेगा और शिपिंग सामान्य कब होगी. जब तक स्थिति साफ नहीं होती, तब तक हजारों टन प्याज पोर्ट पर ही फंसा रहेगा.

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