Iran-Israel War: बंदरगाह पर फंसे प्याज, केला और अंगूर के 1000 कंटेनर, किसान- निर्यातकों की बढ़ी चिंता

केला और अंगूर उत्पादक किसान पहले ही लागत बढ़ने और बाजार में उतार-चढ़ाव से जूझ रहे हैं. अब निर्यात रुकने से उनकी परेशानी और बढ़ गई है. कई किसानों ने माल निर्यात के भरोसे पैक कराया था. उन्हें उम्मीद थी कि खाड़ी बाजार से बेहतर दाम मिलेंगे. लेकिन कंटेनर फंसने से भुगतान भी अटक सकता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Updated On: 2 Mar, 2026 | 09:55 AM

Israel Iran US conflict: पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के हालात का असर अब भारत के कृषि व्यापार पर भी साफ दिखने लगा है. समुद्र के रास्ते खाड़ी देशों को भेजे जाने वाले फलों और सब्जियों की खेप बंदरगाहों पर अटक गई है. खास तौर पर प्याज, केला और अंगूर के करीब एक हजार कंटेनर निर्यात के इंतजार में फंसे हुए हैं. इस स्थिति ने किसानों, निर्यातकों और व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यह माल ज्यादा समय तक रोका गया तो भारी नुकसान हो सकता है.

बंदरगाह पर बढ़ी अनिश्चितता

लोकमत की खबर के अनुसार, नवी मुंबई स्थित जेएनपीए बंदरगाह से हर हफ्ते बड़ी मात्रा में कृषि उत्पाद खाड़ी देशों के लिए भेजे जाते हैं. इनमें सऊदी अरब, कतर, इराक और अन्य मध्य पूर्वी देश शामिल हैं. लेकिन मौजूदा युद्ध जैसी स्थिति के कारण समुद्री रास्तों पर खतरा बढ़ गया है. शिपिंग कंपनियां सुरक्षा को लेकर सतर्क हो गई हैं और कई कंपनियों ने खाड़ी क्षेत्र की ओर जाने वाले जहाज अस्थायी रूप से रोक दिए हैं.

कुछ जहाजों को बीच रास्ते से वापस लौटने के निर्देश भी दिए गए हैं. ऐसे में निर्यात के लिए तैयार रखा गया माल कंटेनरों में ही बंदरगाह पर खड़ा है. यह स्थिति अचानक बनी है, जिससे व्यापारियों को संभलने का मौका भी नहीं मिला.

60 प्रतिशत तक प्रभावित हुआ व्यापार

निर्यातकों का कहना है कि मौजूदा हालात में कृषि आयात-निर्यात पर करीब 60 प्रतिशत तक असर पड़ा है. खासकर जल्दी खराब होने वाले उत्पाद जैसे केला और अंगूर सबसे ज्यादा जोखिम में हैं. अगर इन्हें समय पर बाजार तक नहीं पहुंचाया गया तो गुणवत्ता गिर सकती है और विदेशी खरीदार माल लेने से इनकार भी कर सकते हैं.

प्याज का भी बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों में जाता है. ऐसे में निर्यात रुकने से घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ सकती है, जिससे किसानों को कम दाम मिलने की आशंका है. दूसरी तरफ, पहले से भेजा गया माल यदि समय पर नहीं पहुंचा तो विदेशी बाजार में भारतीय उत्पादों की साख पर भी असर पड़ सकता है.

किसानों की बढ़ी चिंता

केला और अंगूर उत्पादक किसान पहले ही लागत बढ़ने और बाजार में उतार-चढ़ाव से जूझ रहे हैं. अब निर्यात रुकने से उनकी परेशानी और बढ़ गई है. कई किसानों ने माल निर्यात के भरोसे पैक कराया था. उन्हें उम्मीद थी कि खाड़ी बाजार से बेहतर दाम मिलेंगे. लेकिन कंटेनर फंसने से भुगतान भी अटक सकता है.

व्यापारियों का कहना है कि अगर यह स्थिति लंबी चली तो छोटे निर्यातक और किसान सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे. कोल्ड स्टोरेज और कंटेनर में माल रखने की भी एक समय सीमा होती है. इसके बाद गुणवत्ता गिरने का खतरा बढ़ जाता है.

सरकार और बंदरगाह प्रशासन की नजर

बंदरगाह प्रशासन का कहना है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है. हर सप्ताह दर्जनों मालवाहक जहाजों की आवाजाही होती है, लेकिन युद्ध की स्थिति में सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता बन जाती है. सरकार की ओर से भी विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की गई है, जिससे साफ है कि हालात गंभीर माने जा रहे हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध का पूरा असर समझने में अभी कुछ दिन लग सकते हैं. अगर समुद्री मार्ग जल्दी सामान्य हो जाते हैं तो नुकसान सीमित रह सकता है. लेकिन यदि तनाव लंबा खिंचा, तो कृषि निर्यात क्षेत्र को बड़ा झटका लग सकता है.

फिलहाल किसान और व्यापारी यही उम्मीद कर रहे हैं कि हालात जल्द शांत हों और फंसे हुए कंटेनर अपने गंतव्य तक सुरक्षित पहुंच सकें, ताकि मेहनत की कमाई पर संकट न आए.

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Published: 2 Mar, 2026 | 09:47 AM

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