हरित क्रांति के बाद अब पंजाब में बागवानी क्रांति, जापान की मदद से बदलेगी खेती की तस्वीर.. योजना तैयार

इस कार्यक्रम का लक्ष्य बागवानी के तहत आने वाले क्षेत्र को लगभग चार गुना बढ़ाकर 4.59 लाख हेक्टेयर से 17.34 लाख हेक्टेयर तक 2035 तक ले जाना है. यदि यह लक्ष्य हासिल हो गया, तो यह पंजाब की कृषि में ग्रीन रिवॉल्यूशन के बाद का सबसे बड़ा संरचनात्मक बदलाव होगा.

नोएडा | Updated On: 10 Mar, 2026 | 02:25 PM

Punjab Agriculture News: पंजाब की जब भी बात होती है, तो लोगों के जेहन में सबसे पहले धान और गेहूं की तस्वीर उभरकर सामने आती है. क्योंकि यहां पर सबसे अधिक गेहूं और धान की सरकारी खरीदी होती है. हालांकि, यहां पर ऐसे भी किसान बड़े स्तर पर धान और गेहूं की खेती करते हैं. लेकिन अब राज्य बागवानी की ओर बढ़ेगा. पंजाब सरकार ने बागवानी में क्रांति लाने के लिए जबरदस्त योजना बनाई है. इसके लिए अगले 10 साल में 1,300 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की जाएगी.

दरअसल, बीते दिनों बजट 2026 पेश करते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने अगले एक दशक में राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था  को बदलने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की. योजना के तहत फल, सब्जियां, फूल और औषधीय फसलों की खेती बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा. उन्होंने कहा था कि राज्य जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) की मदद से अगले 10 साल में 1,300 करोड़ रुपये की लागत वाला विशेष कार्यक्रम लागू करेगा, ताकि पंजाब में जलवायु-रोधी और उच्च-मूल्य वाली बागवानी को बढ़ावा दिया जा सके.

बागवानी का क्षेत्रफल बढ़कर 17.34 लाख हेक्टेयर हो जाएगा

इस कार्यक्रम का लक्ष्य बागवानी के तहत आने वाले क्षेत्र को लगभग चार गुना बढ़ाकर 4.59 लाख हेक्टेयर से 17.34 लाख हेक्टेयर तक 2035 तक ले जाना है. यदि यह लक्ष्य हासिल हो गया, तो यह पंजाब की कृषि में ग्रीन रिवॉल्यूशन के बाद का सबसे बड़ा संरचनात्मक बदलाव होगा. सरकार की योजना के अनुसार, अगर बागवानी फसलों  के तहत क्षेत्र बढ़कर 17.34 लाख हेक्टेयर हो जाता है, तो पारंपरिक कृषि फसलों के लिए उपलब्ध भूमि करीब 23 लाख हेक्टेयर तक घट जाएगी. इस बदलाव से राज्य की फसल पैटर्न में बड़ा असर पड़ेगा.

गेहूं और धान के रकबे में आएगी लाखों हेक्टेयर की कमी

हालांकि, किसान बाकी बचे कृषि क्षेत्र में गेहूं और धान की खेती जारी रखेंगे, फिर भी धान और गेहूं के तहत आने वाला कुल क्षेत्र समय के साथ काफी कम हो सकता है. लगभग 10 लाख हेक्टेयर धान और 12 लाख हेक्टेयर गेहूं का रकबा कम हो जाएगा. इस बदलाव से पंजाब को लंबे समय से चली आ रही भू-जल की कमी और एक ही फसल की अधिक खेती (मोनोक्रॉपिंग) जैसी समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है.

किसानों को उन्नत बीज, तकनीक और कोल्ड स्टोरेज मुहैया कराए जाएंगे

खास बात यह है कि बागवानी कार्यक्रम सिर्फ खेती के क्षेत्र को बढ़ाने तक ही सीमित नहीं होगा, बल्कि इसके लिए एक मजबूत सपोर्ट सिस्टम तैयार करना भी योजना का हिस्सा है. इस प्रोजेक्ट में उन्नत बीज, नर्सरी, शोध, मंडी इन्फ्रास्ट्रक्चर, कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट्स में निवेश के साथ-साथ किसानों के लिए प्रशिक्षण और विस्तार सेवाओं पर भी ध्यान दिया जाएगा.

मार्केटिंग और प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण को मजबूत किया जाएगा

हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि सिंचाई, कीट प्रबंधन और जैविक खेती  जैसी सतत प्रथाओं को मजबूत करते हुए, इस प्रोजेक्ट के जरिए सेक्टर में जरूरी पूंजी लाई जाएगी. साथ ही उन्नत बीज, नर्सरी, शोध, आधुनिक मंडी, कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ किसान प्रशिक्षण और विस्तार सेवाओं में निवेश होगा. सरकार ने हाई-वैल्यू बागवानी फसलों के उदाहरण के तौर पर ड्रैगन फ्रूट जैसी नई फसलों को भी सामने रखा है, जो किसानों के बीच लोकप्रिय हो रही हैं. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बागवनी विस्तार की सफलता काफी हद तक मजबूत मार्केटिंग और प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर निर्भर करेगी.

पंजाब की कृषि परिदृश्य पूरी तरह बदल सकती है

वहीं, पंजाब के कृषि विभाग के पूर्व कृषि अधिकारियों का कहना है कि अगर यह योजना सफलतापूर्वक लागू हो गई, तो यह पंजाब की कृषि परिदृश्य को पूरी तरह बदल सकती है. जल-गहन फसलों पर राज्य की निर्भरता कम कर सकती है और स्वचालित रूप से फसल विविधता भी बढ़ा सकती है.

Published: 10 Mar, 2026 | 02:23 PM

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