आंध्र प्रदेश बना मत्स्य उत्पादन का हब, झींगा खेती से बढ़ी कमाई.. मौसम चुनौतियों ने बढ़ाई चिंता
अध्ययन के अनुसार आंध्र प्रदेश में पिछले तीन दशकों में समुद्री मछली और झींगा उत्पादन राष्ट्रीय औसत से तेजी से बढ़ा है. राज्य देश के कुल मत्स्य उत्पादन में 41 फीसदी योगदान देता है. हालांकि, झींगा उत्पादन में बीमारियों, मौसम और बाजार उतार-चढ़ाव के कारण अस्थिरता भी अधिक देखी गई है.
Fish Farming: आंध्र प्रदेश में समुद्री मछली और झींगा (श्रिम्प) उत्पादन पिछले तीन दशकों में राष्ट्रीय औसत की तुलना में कहीं तेजी से बढ़ा है. हालांकि, राज्य का झींगा उत्पादन उतार-चढ़ाव के मामले में भी देश के औसत से अधिक अस्थिर पाया गया है. यह जानकारी एशियन जर्नल ऑफ एग्रीकल्चरल एक्सटेंशन, इकोनॉमिक्स एंड सोशियोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन में सामने आई है. यह अध्ययन बी. मल्लेश्वरी, ए. अमरेंदर रेड्डी, एस. राजेश्वरी, एसके नफीज उमर और पी. बाला हुसैन रेड्डी द्वारा किया गया. शोधकर्ताओं ने 1995-96 से 2024-25 के बीच समुद्री मत्स्य उत्पादन के रुझानों का विश्लेषण किया.
अध्ययन के अनुसार, आंध्र प्रदेश में समुद्री मछली उत्पादन की वार्षिक वृद्धि दर 5.51 फीसदी रही, जो राष्ट्रीय औसत 1.23 फीसदी से काफी अधिक है. वहीं, राज्य में समुद्री झींगा उत्पादन में हर साल औसतन 8.20 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर झींगा उत्पादन में इस अवधि के दौरान कोई उल्लेखनीय बढ़ोतरी नहीं देखी गई. अध्ययन के अनुसार, आंध्र प्रदेश में समुद्री मछली और झींगा उत्पादन में तेज बढ़ोतरी के पीछे कई प्रमुख कारण हैं. राज्य की 1,027 किलोमीटर लंबी समुद्री तटरेखा, मछली पकड़ने के बेहतर बुनियादी ढांचे, नई तकनीकों का उपयोग, बढ़ता मशीनीकरण, सरकार की अनुकूल जलीय कृषि (एक्वाकल्चर) नीतियां और निर्यात बाजार में मजबूत मांग ने उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
समुद्री मछली और झींगा उत्पादन तेजी से बढ़ा है
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने बताया कि पेनियस वन्नामेई झींगा की व्यावसायिक खेती शुरू होने के बाद राज्य में झींगा उत्पादन को खास बढ़ावा मिला है. इसकी वजह से उत्पादन बढ़ा है और निर्यात में भी सुधार हुआ है, जिससे मत्स्य और झींगा पालन से जुड़े किसानों और कारोबारियों को लाभ मिला है. अध्ययन में यह भी सामने आया कि आंध्र प्रदेश में समुद्री मछली और झींगा उत्पादन तेजी से बढ़ा है, लेकिन इसके साथ उत्पादन में उतार-चढ़ाव भी काफी अधिक है. राज्य में समुद्री झींगा उत्पादन सबसे ज्यादा अस्थिर पाया गया. शोधकर्ताओं के अनुसार, झींगा उत्पादन में यह उतार-चढ़ाव मुख्य रूप से बीमारियों के प्रकोप, पर्यावरणीय बदलाव, मौसम की अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग-कीमतों के बदलाव के कारण होता है.
आंध्र प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 41 फीसदी है
वहीं, समुद्री मछली उत्पादन भी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है. अत्यधिक मछली पकड़ने, मौसमी बदलाव और समुद्री पर्यावरण के बिगड़ने से उत्पादन प्रभावित हो रहा है. अध्ययन के मुताबिक, देश के कुल मत्स्य उत्पादन में आंध्र प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 41 फीसदी है और यह क्षेत्र राज्य की सकल घरेलू उत्पाद (GSDP) में 7.4 फीसदी योगदान देता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि शुरुआती वर्षों में मत्स्य उत्पादन में अच्छी वृद्धि हुई, लेकिन हाल के वर्षों में विशेषकर समुद्री मछली पकड़ने (मरीन कैप्चर फिशरीज) के क्षेत्र में वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ गई है. इसका कारण समुद्री संसाधनों पर बढ़ता दबाव और अन्य संरचनात्मक चुनौतियां हैं. शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि आंध्र प्रदेश का मत्स्य क्षेत्र तेजी से बढ़ने वाला लेकिन जोखिम भरा क्षेत्र है. उन्होंने दीर्घकालिक विकास के लिए समुद्री संसाधनों का सतत प्रबंधन, जलवायु-अनुकूल उत्पादन तकनीकों का उपयोग, रोग नियंत्रण, गहरे समुद्र में मत्स्य पालन की संभावनाओं का बेहतर इस्तेमाल और प्रभावी जोखिम प्रबंधन उपाय अपनाने पर जोर दिया है.